कोयला गैसीकरण को ₹46,000 करोड़ का बूस्ट: किशन रेड्डी ने बताया 2030 तक 10 करोड़ टन का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में घोषणा की कि भारत में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को तेज़ करने के लिए ₹46,000 करोड़ के निवेश की योजना तैयार की गई है। यह कदम देश में उर्वरक, गैस और रासायनिक उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास है।
मुख्य घोषणाएँ और निवेश योजना
नई दिल्ली में आयोजित 'अग्रसर भारत मंच' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री किशन रेड्डी ने कहा कि सरकार कोयले को सिंथेटिक गैस (सिनगैस), अमोनिया, यूरिया और मेथनॉल में रूपांतरित करने की परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सतही कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए ₹37,500 करोड़ के वित्तीय प्रावधान वाली एक अलग योजना को पहले ही मंजूरी दे दी है।
यह कुल निवेश संरचना दो स्तरों पर काम करती है — मंत्रिमंडल अनुमोदित ₹37,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना और समग्र परियोजना परिव्यय के रूप में ₹46,000 करोड़ का लक्ष्य। वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संदर्भ
मंत्री ने रेखांकित किया कि कोयला अभी भी भारत की प्राथमिक ऊर्जा ज़रूरतों का लगभग 55 प्रतिशत पूरा करता है और देश के कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 74 प्रतिशत है। ऐसे में कोयले को सिर्फ ईंधन के रूप में नहीं, बल्कि एक औद्योगिक कच्चे माल के रूप में उपयोग करना ऊर्जा रासायनिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत अभी एलएनजी (LNG), यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल का बड़े पैमाने पर आयात करता है। कोयला गैसीकरण के माध्यम से इन उत्पादों का घरेलू उत्पादन शुरू होने पर विदेशी मुद्रा व्यय में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
महत्वपूर्ण खनिजों पर रणनीतिक पहल
किशन रेड्डी ने यह भी बताया कि सरकार महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू उत्पादन के साथ साथ विदेशों में खनन परिसंपत्तियों की तलाश पर भी समानांतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, "हम फिलहाल अर्जेंटीना की खदानों में अन्वेषण कर रहे हैं और साथ ही अन्य देशों के साथ भी बातचीत जारी है।"
वर्ष 2025 में खान मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (MECL) ने अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत की सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। लिथियम के विशाल भंडार के कारण अर्जेंटीना को भारत के लिए एक रणनीतिक साझेदार बताया गया, क्योंकि यह खनिज इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरियों और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए अपरिहार्य है।
रेयर अर्थ कॉरिडोर और घरेलू आपूर्ति
मंत्री ने बताया कि सरकार केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में रेयर अर्थ एलिमेंट (REE) कॉरिडोर विकसित कर रही है। यह पहल EV, दूरसंचार उपकरणों, सौर ऊर्जा इकाइयों और रक्षा उपकरणों जैसे उच्च तकनीकी उत्पादों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रेयर अर्थ तत्वों पर चीन का प्रभुत्व भारत सहित कई देशों की सामरिक चिंता का विषय बना हुआ है। किशन रेड्डी ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारत इन खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, कोयला गैसीकरण परियोजनाओं की सफलता तकनीकी व्यवहार्यता, कार्बन उत्सर्जन प्रबंधन और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर निर्भर करेगी। सरकार का कहना है कि वह भारतीय उद्यमियों को महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और प्रसंस्करण के लिए विदेशों में काम करने हेतु प्रोत्साहित कर रही है। कोयला गैसीकरण और खनिज आत्मनिर्भरता — दोनों मिलकर भारत की औद्योगिक और ऊर्जा नीति का अगला अध्याय लिखने की दिशा में काम कर रहे हैं।