विश्व विकास सूचना दिवस 24 अक्टूबर: 1972 में संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 3038 से हुई थी शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
विश्व विकास सूचना दिवस प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है — वही तारीख जो संयुक्त राष्ट्र दिवस के रूप में भी विश्वभर में पहचानी जाती है। इस दिवस का केंद्रीय उद्देश्य सूचना एवं संचार तकनीक (आईसीटी), इंटरनेट और मीडिया के माध्यम से विकास संबंधी जानकारी को समाज के हर तबके तक पहुँचाना है। 19 दिसंबर 1972 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 27वें सत्र में पारित प्रस्ताव संख्या 3038 इस दिवस की वैधानिक नींव है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 1972 में जब विश्व शीत युद्ध के चरम पर था, भू-राजनीतिक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय सहयोग बाधित था और सूचनाओं का प्रवाह अत्यंत सीमित था। इसी गतिरोध को तोड़ने के लिए व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) के तृतीय सत्र में विकास की समस्याओं के समाधान हेतु सूचना के व्यापक प्रसार का विचार सामने आया।
यह दिवस 1970 में अपनाई गई 'द्वितीय संयुक्त राष्ट्र विकास दशक की अंतरराष्ट्रीय विकास रणनीति' की स्मृति को भी समर्पित है। गौरतलब है कि 24 अक्टूबर 1973 को आयोजित प्रथम विश्व विकास सूचना दिवस सम्मेलन में चिदंबरम सुब्रमण्यम तथा एडेबायो एडेडेजी जैसे नीति-निर्माताओं ने संवाद स्थापित किया। अक्टूबर 1974 में प्रख्यात अर्थशास्त्री जॉन केनेथ गालब्रेथ ने इस वैश्विक मंच को संबोधित किया।
दिवस का मूल उद्देश्य
संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित सिद्धांतों के अनुसार, इस दिवस का मूल संदेश यह है कि विकास का अंतिम उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण में निरंतर सुधार लाना और समाज के सभी वर्गों तक उसका लाभ पहुँचाना है। संयुक्त राष्ट्र स्पष्ट रेखांकित करता है कि यदि समाज में अनुचित विशेषाधिकार, संपत्ति की असमानता और सामाजिक अन्याय बने रहते हैं, तो विकास अपने मूल उद्देश्य में विफल हो जाता है।
इस दिवस का केंद्रीय स्तंभ 'जनमत का एकत्रीकरण' है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विकसित देशों की सरकारों का यह दायित्व है कि वे अपने नागरिकों को वैश्विक विकास की परस्पर निर्भरता समझाएँ और विकासशील देशों को संसाधन व प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रदान करें।
युवा और डिजिटल ऊर्जा
आँकड़ों के अनुसार, विश्व स्तर पर 15 से 24 वर्ष आयु के 79 प्रतिशत युवा इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में युवाओं की डिजिटल ऊर्जा को रचनात्मक विकास से जोड़ना समय की माँग बन चुका है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब डिजिटल विभाजन को पाटना सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राथमिकता में है।
भारत का डिजिटल मॉडल: एक वैश्विक प्रमाण
समावेशी सूचना तंत्र के सकारात्मक प्रभाव का सबसे ठोस उदाहरण भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है। एकीकृत भुगतान प्रणाली (UPI) ने वर्ष 2016 में मात्र 0.01 करोड़ मासिक लेनदेन से शुरुआत की और वर्ष 2025 तक 2,000 करोड़ से अधिक मासिक लेनदेन का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया।
आधार, UPI और इंडिया स्टैक पर आधारित यह ढाँचा विकासशील विश्व के लिए एक प्रमाणित मॉडल बनकर उभरा है, जिसे विश्व के शीर्ष 10 सबसे प्रभावी सुधारों में स्थान मिला है। विश्व बैंक के एक अध्ययन के अनुसार, UPI से जुड़ने वाले बैंकों ने 2 प्रतिशत अधिक वृद्धि दर्ज की। वित्त वर्ष 2021-22 में ही UPI ने 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का लेनदेन संसाधित किया।
यह दिवस आज के डिजिटल युग में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है — जब सूचना तक पहुँच ही विकास की पहली सीढ़ी बन चुकी है।