भारत बना डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक अग्रणी, 24 देशों संग MoU; UPI का 49% वैश्विक हिस्सा
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका मजबूती से स्थापित कर ली है — फरवरी 2026 तक 24 देशों के साथ इंडिया स्टैक और DPI प्रणाली पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। 27 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में यह जानकारी दी गई, जिसमें डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, डेटा एक्सचेंज और सेवा वितरण को इन साझेदारियों के मुख्य क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2026 को अपने 11 वर्ष पूरे करने वाला है।
11 वर्षों में बना विश्व-स्तरीय डिजिटल इकोसिस्टम
आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में भारत ने दुनिया के सबसे बड़े DPI इकोसिस्टम में से एक का निर्माण किया है। आधार, डिजिलॉकर, CoWIN, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM), दीक्षा, उमंग और ई-संजीवनी जैसे प्लेटफॉर्म अब कई देशों में डिजिटल प्रशासन के मॉडल के रूप में अपनाए जा रहे हैं। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को नौ प्रमुख स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य डिजिटल पहुंच का विस्तार और नवाचार को प्रोत्साहन देना था।
UPI की वैश्विक उड़ान: 8 से अधिक देशों में संचालन
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका सहित 8 से अधिक देशों में संचालित हो रहा है। फैक्टशीट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतान लेनदेन का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा भारत में होता है — जो वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की असाधारण स्थिति को दर्शाता है। गौरतलब है कि यह वह देश है जहाँ एक दशक पहले डिजिटल भुगतान की पहुंच अत्यंत सीमित थी।
GDP में डिजिटल अर्थव्यवस्था का बढ़ता योगदान
फैक्टशीट में बताया गया है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में अब लगभग 12 से 14 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अनुमान है कि अगले एक दशक में यह हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत हो सकती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि और कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों तक व्यापक रूप से बढ़ी है।
G20 अध्यक्षता से मिली वैश्विक पहचान
भारत ने वर्ष 2023 में G20 की अपनी अध्यक्षता के दौरान 'इंडिया स्टैक ग्लोबल' और 'ग्लोबल DPI रिपॉजिटरी' की शुरुआत की, जिससे भारतीय डिजिटल समाधानों की वैश्विक पहुंच और विस्तृत हुई। यह ऐसे समय में हुआ जब विकासशील देश अपनी डिजिटल गवर्नेंस नींव तलाश रहे थे — और भारत ने एक तैयार, सिद्ध मॉडल पेश किया।
आगे की राह: AI, क्लाउड और 'विकसित भारत 2047'
सरकार के अनुसार, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को भी मजबूती दी है। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में यह कार्यक्रम समावेशी विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नागरिक सशक्तिकरण को निरंतर गति देने का माध्यम बताया जा रहा है। स्टार्टअप इकोसिस्टम और विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक के उपयोग को भी इस अभियान से नई रफ्तार मिली है।