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क्या भारत त्वरित भुगतान में ग्लोबल लीडर बना? जून में यूपीआई से हुआ 24 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन: आईएमएफ

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क्या भारत त्वरित भुगतान में ग्लोबल लीडर बना? जून में यूपीआई से हुआ 24 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन: आईएमएफ

सारांश

भारत ने त्वरित भुगतान के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। जून में यूपीआई के माध्यम से 24 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। यह जानकारी आईएमएफ द्वारा जारी की गई है। जानें, यूपीआई की यह सफलता किस प्रकार से डिजिटल भुगतान को प्रभावित कर रही है।

मुख्य बातें

भारत ने यूपीआई के माध्यम से 24 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन किया है।
डिजिटल वित्तीय सेवाओं में यूपीआई की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है।
यूपीआई ने फाइनेंशियल इंक्लूजन को बढ़ावा दिया है।
यह प्लेटफॉर्म 49.1 करोड़ व्यक्तियों को सेवाएँ प्रदान करता है।
यूपीआई का प्रभाव वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है।

नई दिल्ली, 20 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने त्वरित भुगतान के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यूपीआई के माध्यम से केवल जून में 24.03 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन 18.39 अरब ट्रांजैक्शन के माध्यम से किया गया। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा रविवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

पिछले महीने, सालाना आधार पर यूपीआई लेनदेन की संख्या में 32 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पिछले साल जून में यूपीआई लेनदेन की संख्या 13.88 अरब थी।

आईएमएफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान में भारत में सभी डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है और वैश्विक स्तर पर सभी रियल टाइम डिजिटल भुगतानों में यूपीआई की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है।

यह प्लेटफॉर्म अब प्रतिदिन 64 करोड़ से अधिक लेनदेन संभालता है, जो कि वीजा जैसी वैश्विक कंपनियों की तुलना में बहुत अधिक है, जो प्रतिदिन लगभग 63.9 करोड़ लेनदेन करती हैं।

यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपीआई ने केवल नौ वर्षों में इस मुकाम को हासिल किया है।

यूपीआई प्लेटफॉर्म वर्तमान में 49.1 करोड़ व्यक्तियों और 6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवाएँ प्रदान करता है और 675 बैंकों को एक ही प्रणाली के माध्यम से जोड़ता है।

इसने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुँचने में मदद मिली है।

आईएमएफ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की सफलता वर्षों की डिजिटल आधारभूत संरचना और समावेशी विकास के लिए तकनीक के उपयोग का परिणाम है।

यूपीआई, जो एक भुगतान प्रणाली के रूप में शुरू हुआ था, अब वैश्विक मानक बन गया है।

यूपीआई का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। यह पहले से ही संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस जैसे सात देशों में सक्रिय है।

फ्रांस में इसकी शुरूआत यूरोप में इसके प्रवेश का प्रतीक है, जिससे वहां यात्रा करने वाले या रहने वाले भारतीय निर्बाध भुगतान कर सकेंगे।

भारत ब्रिक्स समूह में यूपीआई को भुगतान मानक के रूप में अपनाने की भी वकालत कर रहा है, जिसमें हाल ही में छह नए सदस्य देश शामिल हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि इसे स्वीकार किया जाता है, तो इससे सीमा पार भुगतान तेज, सस्ता और अधिक सुरक्षित बन सकता है, जिससे भारत की वैश्विक डिजिटल लीडर के रूप में स्थिति मजबूत होगी।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा 2016 में लॉन्च किया गया यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को सरल, तेज और सुलभ बना दिया है।

मोबाइल फोन पर कुछ ही टैप के जरिए, उपयोगकर्ता व्यापारियों को भुगतान कर सकते हैं, दोस्तों को पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, या अपने बैंक खातों का प्रबंधन कर सकते हैं। इसकी सुविधा और गति ने इसे व्यक्तियों और व्यवसायों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बना दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि भारत की सफलता त्वरित भुगतान में न केवल तकनीकी प्रगति का परिणाम है, बल्कि यह समग्र वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा कदम है। यूपीआई की सफलता भारत को एक डिजिटल सुपरपावर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में यूपीआई का प्रभाव क्या है?
यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान का स्वरूप बदल दिया है, जिससे लाखों लोगों को सरल और तेज भुगतान की सुविधा मिली है।
आईएमएफ ने यूपीआई के बारे में क्या कहा है?
आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में यूपीआई की सफलता को भारत में डिजिटल वित्तीय सेवाओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में बताया है।
क्या यूपीआई केवल भारत में ही उपयोग किया जाता है?
नहीं, यूपीआई अब कई अन्य देशों में भी उपयोग किया जा रहा है, जैसे कि संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, और फ्रांस।
यूपीआई का भविष्य क्या है?
यूपीआई का भविष्य उज्ज्वल है, और इसके अंतरराष्ट्रीय उपयोग में वृद्धि हो रही है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर एक मानक बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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