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फलों-सब्जियों के 70,652 सैंपल में केवल 3.1% में FSSAI कीटनाशक सीमा उल्लंघन: संसद में सरकार का खुलासा

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फलों-सब्जियों के 70,652 सैंपल में केवल 3.1% में FSSAI कीटनाशक सीमा उल्लंघन: संसद में सरकार का खुलासा

सारांश

सरकार के संसदीय आँकड़े बताते हैं कि 23 राज्यों में जाँचे गए 70,652 फल-सब्जी नमूनों में केवल 3.1% में FSSAI की MRL सीमा का उल्लंघन मिला — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह निगरानी तंत्र देश के विशाल कृषि उत्पादन के अनुपात में पर्याप्त है।

मुख्य बातें

पिछले तीन वर्षों में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फलों-सब्जियों के 70,652 नमूनों की जाँच हुई।
केवल 3.1% नमूनों में कीटनाशक अवशेष FSSAI की MRL सीमा से अधिक पाए गए।
40 प्रयोगशालाओं के माध्यम से MPRNL परियोजना 2005-06 से सक्रिय है।
2021-22 से 2025-26 के बीच 1,353 किसान फील्ड स्कूल से 46,969 किसान और 2,384 जागरूकता अभियानों से 76,702 किसान लाभान्वित हुए।
21 राज्यों ने कीटनाशक अवशेष निगरानी के लिए समर्पित समितियाँ गठित की हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म NPSS किसानों को रियल-टाइम कीट पहचान और विशेषज्ञ सलाह देता है।

केंद्र सरकार ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को संसद में बताया कि पिछले तीन वर्षों में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फलों और सब्जियों के 70,652 नमूनों की जाँच की गई, जिनमें से मात्र 3.1 प्रतिशत नमूनों में कीटनाशक अवशेष भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित 'अधिकतम अवशेष सीमा' (MRL) से अधिक पाए गए। यह आँकड़ा कृषि उत्पादों की खाद्य सुरक्षा निगरानी में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्रीय निगरानी परियोजना की भूमिका

कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि कृषि और किसान कल्याण विभाग वर्ष 2005-06 से 'राष्ट्रीय स्तर पर कीटनाशक अवशेषों की निगरानी' (MPRNL) परियोजना संचालित कर रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत देशभर की 40 प्रयोगशालाओं से नमूने एकत्र किए जाते हैं।

परीक्षण रिपोर्टें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि विभागों के साथ साझा की जाती हैं, ताकि किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित और उचित उपयोग के बारे में जागरूक किया जा सके और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा सकें।

डिजिटल निगरानी: राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली

सरकार ने राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) भी शुरू की है — एक डिजिटल मंच जिसमें मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल शामिल हैं। यह प्रणाली कीड़ों की पहचान, निगरानी और विशेषज्ञ सलाह तक रियल-टाइम पहुँच की सुविधा देती है। मंत्री चौहान के अनुसार, यह प्रणाली पंजीकरण समिति द्वारा अनुमोदित कीटनाशकों का उपयोग केवल आवश्यकता होने पर और निर्धारित मात्रा में करने की सलाह देती है।

किसान प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान

कृषि मंत्रालय अपने 48 केंद्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्रों (CIPMС) और टिड्डी-सह-केंद्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्रों (LCIPMС) के माध्यम से जागरूकता और क्षमता-निर्माण कार्यक्रम संचालित कर रहा है।

2021-22 से 2025-26 के बीच इन केंद्रों ने 1,353 'किसान फील्ड स्कूल' कार्यक्रम आयोजित किए, जिनसे 46,969 किसान लाभान्वित हुए। इसी अवधि में 680 दो-दिवसीय मानव संसाधन विकास कार्यक्रमों से 37,664 किसानों को प्रशिक्षण मिला, जबकि कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग पर 2,384 अभियानों से 76,702 किसान जुड़े। इसके अतिरिक्त, 2,548 बीज उपचार अभियानों से 81,048 किसान लाभान्वित हुए।

बागवानी और राज्य-स्तरीय समितियाँ

सरकार बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर' (MIDH) भी लागू कर रही है, जिसमें फलों और सब्जियों का उत्पादन शामिल है। गौरतलब है कि 21 राज्यों ने कीटनाशक अवशेषों की निगरानी और एकीकृत कीट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए समर्पित समितियाँ गठित की हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य सुरक्षा और कृषि रसायनों के अत्यधिक उपयोग को लेकर उपभोक्ता जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है। आगे चलकर राज्य-स्तरीय समितियों की रिपोर्टें नीति-निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में रखना ज़रूरी है — भारत सालाना करोड़ों टन फल-सब्जियाँ उत्पादित करता है, और 23 राज्यों में तीन वर्षों में 70,652 नमूने इस विशाल पैमाने के सापेक्ष बेहद सीमित नमूनाकरण है। MPRNL परियोजना दो दशक पुरानी है, फिर भी इसका विस्तार अभी भी 40 प्रयोगशालाओं तक सीमित है। असली कसौटी यह है कि MRL उल्लंघन पाए जाने के बाद उन किसानों और उत्पादों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होती है — यह जानकारी संसद में साझा नहीं की गई। जागरूकता अभियान सराहनीय हैं, लेकिन जवाबदेही तंत्र के बिना ये केवल संख्याओं का खेल बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FSSAI की MRL सीमा क्या होती है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
MRL यानी 'अधिकतम अवशेष सीमा' वह अधिकतम मात्रा है जितना कीटनाशक अवशेष किसी खाद्य उत्पाद में स्वीकार्य माना जाता है। FSSAI इसे तय करती है ताकि उपभोक्ताओं को हानिकारक रसायनों से बचाया जा सके।
सरकार ने कितने सैंपल जाँचे और कितने में उल्लंघन मिला?
पिछले तीन वर्षों में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 70,652 फल-सब्जी नमूनों की जाँच की गई, जिनमें से 3.1% में FSSAI की MRL सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए गए।
MPRNL परियोजना क्या है और यह कैसे काम करती है?
'राष्ट्रीय स्तर पर कीटनाशक अवशेषों की निगरानी' (MPRNL) परियोजना 2005-06 से चल रही है। इसके तहत 40 प्रयोगशालाओं से नमूने एकत्र कर परीक्षण किए जाते हैं और रिपोर्ट राज्य कृषि विभागों के साथ साझा की जाती है।
किसानों को कीटनाशक सुरक्षा के लिए क्या प्रशिक्षण दिया जा रहा है?
2021-22 से 2025-26 के बीच 1,353 किसान फील्ड स्कूल, 680 मानव संसाधन विकास कार्यक्रम और 2,384 जागरूकता अभियान चलाए गए, जिनसे कुल मिलाकर लाखों किसान लाभान्वित हुए।
राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) किसानों की कैसे मदद करती है?
NPSS एक डिजिटल मंच है जिसमें मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के ज़रिए किसान कीड़ों की पहचान, निगरानी और विशेषज्ञ सलाह रियल-टाइम में प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रणाली केवल अनुमोदित और आवश्यक मात्रा में कीटनाशक उपयोग की सलाह देती है।
राष्ट्र प्रेस
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