खाद कालाबाजारी पर सरकार का प्रहार: 2025 में 4,84,663 छापे, 847 FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को राज्यसभा में बताया कि वर्ष 2025 के दौरान देश भर में घटिया खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी, डायवर्जन और अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए कुल 4,84,663 छापे मारे गए। इन कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप 17,392 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 6,941 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए और 847 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गईं।
राज्यसभा में मंत्री का खुलासा
रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उच्च सदन में यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति और किफायती मूल्य बनाए रखने के लिए एक व्यापक प्रणाली के तहत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास का हिस्सा है।
उर्वरक उपलब्धता: माँग से अधिक आपूर्ति
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता माँग से काफी अधिक रही। यूरिया की 381 लाख मीट्रिक टन की आवश्यकता के मुकाबले 450.79 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध रहा। इसी तरह, डीएपी (DAP) की 110 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के विरुद्ध 121.72 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति सुनिश्चित की गई। एमओपी (MOP) और एनपीकेएस (NPKs) की आपूर्ति भी माँग के अनुरूप पर्याप्त बनाए रखी गई।
आपूर्ति की निगरानी और ट्रैकिंग व्यवस्था
सभी प्रमुख सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही को इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के जरिए रियल-टाइम में ट्रैक किया जाता है। कृषि और किसान कल्याण विभाग एवं उर्वरक विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर महीने-वार और राज्य-वार जरूरतों का आकलन करते हैं तथा मासिक योजनाओं के माध्यम से आपूर्ति का आवंटन करते हैं।
गौरतलब है कि सरकार घरेलू उत्पादन और माँग के बीच के अंतर को पाटने के लिए उर्वरक आयात की योजना पहले से ही तैयार कर लेती है। उर्वरक रेक (मालगाड़ी के डिब्बों) की प्राथमिकता के आधार पर आवाजाही के लिए रेल मंत्रालय के साथ भी समन्वय किया जाता है, जबकि राज्य सरकारें जिला स्तर पर वितरण की निगरानी करती हैं।
किसानों के लिए सब्सिडी व्यवस्था
यूरिया सब्सिडी योजना के तहत 45 किलोग्राम के यूरिया बैग की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹242 प्रति बैग निर्धारित है। वास्तविक डिलीवरी लागत और इस कीमत के बीच के अंतर की भरपाई निर्माताओं या आयातकों को सब्सिडी के रूप में की जाती है।
पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (NBS) योजना के तहत डीएपी को खरीफ 2026 के दौरान ₹1,350 प्रति 50 किलोग्राम बैग पर किफायती बनाए रखने के लिए, आयातित और घरेलू डीएपी तथा आयातित टीएसपी पर NBS सब्सिडी के अतिरिक्त ₹3,500 प्रति मीट्रिक टन की विशेष सहायता प्रदान की गई है।
कीटनाशकों की गुणवत्ता पर भी नजर
मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत गठित पंजीकरण समिति किसी भी कीटनाशक की प्रभावशीलता और सुरक्षा का गहन मूल्यांकन करने के बाद ही उसे पंजीकृत करती है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त कीटनाशक निरीक्षक विनिर्माण इकाइयों और खुदरा दुकानों से नियमित रूप से नमूने एकत्र कर गुणवत्ता जाँच करते हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्सों में किसान उर्वरकों की कमी और नकली खाद की शिकायतें लगातार उठाते रहे हैं। आने वाले खरीफ और रबी सत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और निगरानी तंत्र की परीक्षा होगी।