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खाद कालाबाजारी पर सरकार का प्रहार: 2025 में 4,84,663 छापे, 847 FIR दर्ज

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खाद कालाबाजारी पर सरकार का प्रहार: 2025 में 4,84,663 छापे, 847 FIR दर्ज

सारांश

2025 में खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सरकार ने लगभग 4.85 लाख छापे मारे — 847 FIR और 6,941 लाइसेंस रद्द। साथ ही यूरिया की आपूर्ति माँग से 70 लाख मीट्रिक टन अधिक रही। किसानों को सस्ती खाद देने की सरकारी प्रणाली की यह सबसे बड़ी वार्षिक कार्रवाई है।

मुख्य बातें

वर्ष 2025 में खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ देश भर में 4,84,663 छापे मारे गए।
17,392 कारण बताओ नोटिस जारी, 6,941 लाइसेंस निलंबित या रद्द और 847 FIR दर्ज की गईं।
वित्त वर्ष 2025-26 में यूरिया की उपलब्धता 450.79 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि माँग 381 लाख मीट्रिक टन थी।
डीएपी की 121.72 लाख मीट्रिक टन आपूर्ति के मुकाबले माँग 110 लाख मीट्रिक टन रही।
यूरिया का MRP ₹242 प्रति 45 किग्रा बैग ; डीएपी खरीफ 2026 में ₹1,350 प्रति 50 किग्रा बैग पर उपलब्ध।
सभी सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही IFMS के जरिए रियल-टाइम ट्रैक की जाती है।

केंद्र सरकार ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को राज्यसभा में बताया कि वर्ष 2025 के दौरान देश भर में घटिया खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी, डायवर्जन और अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए कुल 4,84,663 छापे मारे गए। इन कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप 17,392 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 6,941 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए और 847 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गईं।

राज्यसभा में मंत्री का खुलासा

रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उच्च सदन में यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति और किफायती मूल्य बनाए रखने के लिए एक व्यापक प्रणाली के तहत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास का हिस्सा है।

उर्वरक उपलब्धता: माँग से अधिक आपूर्ति

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता माँग से काफी अधिक रही। यूरिया की 381 लाख मीट्रिक टन की आवश्यकता के मुकाबले 450.79 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध रहा। इसी तरह, डीएपी (DAP) की 110 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के विरुद्ध 121.72 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति सुनिश्चित की गई। एमओपी (MOP) और एनपीकेएस (NPKs) की आपूर्ति भी माँग के अनुरूप पर्याप्त बनाए रखी गई।

आपूर्ति की निगरानी और ट्रैकिंग व्यवस्था

सभी प्रमुख सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही को इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के जरिए रियल-टाइम में ट्रैक किया जाता है। कृषि और किसान कल्याण विभाग एवं उर्वरक विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर महीने-वार और राज्य-वार जरूरतों का आकलन करते हैं तथा मासिक योजनाओं के माध्यम से आपूर्ति का आवंटन करते हैं।

गौरतलब है कि सरकार घरेलू उत्पादन और माँग के बीच के अंतर को पाटने के लिए उर्वरक आयात की योजना पहले से ही तैयार कर लेती है। उर्वरक रेक (मालगाड़ी के डिब्बों) की प्राथमिकता के आधार पर आवाजाही के लिए रेल मंत्रालय के साथ भी समन्वय किया जाता है, जबकि राज्य सरकारें जिला स्तर पर वितरण की निगरानी करती हैं।

किसानों के लिए सब्सिडी व्यवस्था

यूरिया सब्सिडी योजना के तहत 45 किलोग्राम के यूरिया बैग की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹242 प्रति बैग निर्धारित है। वास्तविक डिलीवरी लागत और इस कीमत के बीच के अंतर की भरपाई निर्माताओं या आयातकों को सब्सिडी के रूप में की जाती है।

पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (NBS) योजना के तहत डीएपी को खरीफ 2026 के दौरान ₹1,350 प्रति 50 किलोग्राम बैग पर किफायती बनाए रखने के लिए, आयातित और घरेलू डीएपी तथा आयातित टीएसपी पर NBS सब्सिडी के अतिरिक्त ₹3,500 प्रति मीट्रिक टन की विशेष सहायता प्रदान की गई है।

कीटनाशकों की गुणवत्ता पर भी नजर

मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत गठित पंजीकरण समिति किसी भी कीटनाशक की प्रभावशीलता और सुरक्षा का गहन मूल्यांकन करने के बाद ही उसे पंजीकृत करती है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त कीटनाशक निरीक्षक विनिर्माण इकाइयों और खुदरा दुकानों से नियमित रूप से नमूने एकत्र कर गुणवत्ता जाँच करते हैं।

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्सों में किसान उर्वरकों की कमी और नकली खाद की शिकायतें लगातार उठाते रहे हैं। आने वाले खरीफ और रबी सत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और निगरानी तंत्र की परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने मामलों में दोषसिद्धि हुई — FIR और लाइसेंस रद्दीकरण से आगे। भारत में उर्वरक वितरण की कालाबाजारी कोई नई समस्या नहीं है; हर फसल सत्र से पहले यही शिकायतें उठती हैं। IFMS जैसी डिजिटल निगरानी प्रणाली सही दिशा में कदम है, लेकिन जब तक जिला स्तर पर वास्तविक जवाबदेही नहीं होगी, छापों की संख्या महज सांख्यिकीय उपलब्धि बनकर रह जाएगी। यूरिया का MRP एक दशक से अधिक समय से स्थिर रखना किसानों के लिए राहत की बात है, परंतु इससे काला बाजार को भी प्रोत्साहन मिलता है — यह विरोधाभास नीति-निर्माताओं के लिए अभी भी अनसुलझा है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2025 में खाद की कालाबाजारी के खिलाफ कितने छापे मारे गए?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश भर में खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी, डायवर्जन और घटिया गुणवत्ता की बिक्री के खिलाफ कुल 4,84,663 छापे मारे गए। इन कार्रवाइयों में 17,392 कारण बताओ नोटिस जारी हुए, 6,941 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए और 847 FIR दर्ज की गईं।
यूरिया और डीएपी की कीमत किसानों के लिए कितनी है?
यूरिया सब्सिडी योजना के तहत 45 किलोग्राम के यूरिया बैग की अधिकतम खुदरा कीमत ₹242 प्रति बैग निर्धारित है। डीएपी को खरीफ 2026 के दौरान ₹1,350 प्रति 50 किलोग्राम बैग पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके लिए NBS सब्सिडी के अतिरिक्त ₹3,500 प्रति मीट्रिक टन की विशेष सहायता दी गई है।
क्या 2025-26 में उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति रही?
हाँ, सरकारी आँकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में उर्वरकों की उपलब्धता माँग से अधिक रही। यूरिया की 381 लाख मीट्रिक टन की माँग के मुकाबले 450.79 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध रहा, और डीएपी की 110 लाख मीट्रिक टन की माँग के विरुद्ध 121.72 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई।
IFMS क्या है और यह उर्वरक वितरण में कैसे मदद करता है?
इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) एक डिजिटल निगरानी प्रणाली है जो सभी प्रमुख सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही को रियल-टाइम में ट्रैक करती है। यह प्रणाली डायवर्जन और कालाबाजारी पर नजर रखने में मदद करती है और आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
कीटनाशकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है?
कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत गठित पंजीकरण समिति प्रभावशीलता और सुरक्षा का मूल्यांकन करने के बाद ही कीटनाशकों को पंजीकृत करती है। केंद्र और राज्य सरकारों के कीटनाशक निरीक्षक विनिर्माण इकाइयों और खुदरा दुकानों से नियमित रूप से नमूने एकत्र कर गुणवत्ता जाँच करते हैं।
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