खरीफ 2026: यूरिया ₹242 और डीएपी ₹1,350 प्रति बैग — सरकार ने संसद में दी उर्वरक उपलब्धता की गारंटी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा में स्पष्ट किया कि खरीफ सीजन 2026 के दौरान देशभर के किसानों को यूरिया और डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है और पिछले तीन वर्षों में इन उर्वरकों की कोई कमी नहीं रही है। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
मांग आकलन और राज्यवार आवंटन
मंत्री ने बताया कि प्रत्येक फसल मौसम शुरू होने से पहले कृषि विभाग सभी राज्य सरकारों के साथ समन्वय करके राज्यवार और माहवार उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन करता है। इसी आधार पर राज्यों को हर महीने पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का आवंटन किया जाता है। उर्वरकों की उपलब्धता पर इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) नामक ऑनलाइन वेब-आधारित प्रणाली के ज़रिये रियल टाइम निगरानी रखी जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब किसान संगठन कई राज्यों में खाद की अनुपलब्धता और ऊँची कीमतों की शिकायतें उठाते रहे हैं। सरकार का यह बयान उन्हीं चिंताओं के जवाब में संसद में आया है।
यूरिया और डीएपी की सब्सिडी दरें
यूरिया सब्सिडी योजना के तहत 45 किलोग्राम के एक बैग की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹242 निर्धारित की गई है — इसमें नीम कोटिंग और लागू कर शामिल नहीं हैं। खेत तक पहुँचने वाली यूरिया की वास्तविक लागत और बाज़ार कीमत के बीच का अंतर केंद्र सरकार सब्सिडी के रूप में निर्माता या आयातक को प्रदान करती है।
खरीफ 2026 सीजन के लिए डीएपी को ₹1,350 प्रति 50 किलोग्राम बैग की किफायती दर पर उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत ₹3,500 प्रति मीट्रिक टन की अतिरिक्त सहायता दी जा रही है, जिसमें फैक्टरी से खेत तक परिवहन लागत, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का प्रभाव और जीएसटी जैसी लागतें शामिल हैं। यह सुविधा घरेलू और आयातित डीएपी तथा आयातित टीएसपी (ट्रिपल सुपर फॉस्फेट) दोनों पर लागू है।
आयात और रेलवे समन्वय
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि यूरिया और अन्य उर्वरकों की घरेलू माँग तथा उत्पादन के बीच के अंतर को आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है और आवश्यक आयात की योजना पहले से तैयार की जाती है। इसके अलावा, राज्यों तक उर्वरकों की समय पर ढुलाई के लिए रेलवे मंत्रालय के साथ नियमित समन्वय किया जाता है और पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराए जाते हैं।
फॉस्फेटिक और पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिए न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) योजना भी जारी है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे माल की कीमतों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी दरें तय की जाती हैं।
नैनो उर्वरक और आत्मनिर्भरता
सरकार ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता शिविर, वेबिनार, खेत प्रदर्शन और क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्मों का सहारा लिया है। ये उत्पाद प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (PMKSK) के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हालाँकि, नैनो उर्वरकों पर फिलहाल कोई सरकारी सब्सिडी नहीं दी जाती।
आयातित फॉस्फेटिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु उत्पादकों को उचित मूल्य निर्धारण और प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कालाबाजारी पर निगरानी
उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत वसूली रोकने के लिए कृषि विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमित निगरानी करता है और राज्यों द्वारा की गई कार्रवाई की साप्ताहिक समीक्षा भी होती है। गौरतलब है कि उर्वरक वितरण में अनियमितताएँ पिछले कई सीजन में विवाद का विषय रही हैं, और यह साप्ताहिक समीक्षा तंत्र उसी दिशा में एक संस्थागत कदम है।
आगे चलकर यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि IFMS प्रणाली और रेलवे समन्वय के ये दावे ज़मीनी स्तर पर किस हद तक कारगर साबित होते हैं, खासकर उन राज्यों में जहाँ वितरण नेटवर्क अभी भी कमज़ोर है।