7 अगस्त 2026
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खरीफ 2026: यूरिया ₹242 और डीएपी ₹1,350 प्रति बैग — सरकार ने संसद में दी उर्वरक उपलब्धता की गारंटी

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खरीफ 2026: यूरिया ₹242 और डीएपी ₹1,350 प्रति बैग — सरकार ने संसद में दी उर्वरक उपलब्धता की गारंटी

सारांश

खरीफ 2026 में यूरिया ₹242 और डीएपी ₹1,350 प्रति बैग — केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि IFMS निगरानी, रेलवे समन्वय और पूर्व-नियोजित आयात से पिछले तीन वर्षों में उर्वरकों की कोई कमी नहीं रही। नैनो उर्वरकों को बढ़ावा और कालाबाजारी पर साप्ताहिक समीक्षा भी जारी है।

मुख्य बातें

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा में बताया कि पिछले तीन वर्षों और खरीफ 2026 में यूरिया व डीएपी की कोई कमी नहीं रही।
यूरिया की MRP ₹242 प्रति 45 किग्रा बैग तय है; डीएपी खरीफ 2026 में ₹1,350 प्रति 50 किग्रा बैग पर उपलब्ध है।
डीएपी पर ₹3,500 प्रति मीट्रिक टन की अतिरिक्त सहायता दी जा रही है, जो घरेलू व आयातित डीएपी और आयातित टीएसपी पर लागू है।
IFMS (इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम) से उर्वरक आपूर्ति शृंखला पर रियल टाइम निगरानी की जा रही है।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी PMKSK के ज़रिये उपलब्ध; फिलहाल इन पर कोई सरकारी सब्सिडी नहीं।
कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए राज्यों की कार्रवाई की साप्ताहिक समीक्षा जारी है।

केंद्र सरकार ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा में स्पष्ट किया कि खरीफ सीजन 2026 के दौरान देशभर के किसानों को यूरिया और डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है और पिछले तीन वर्षों में इन उर्वरकों की कोई कमी नहीं रही है। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

मांग आकलन और राज्यवार आवंटन

मंत्री ने बताया कि प्रत्येक फसल मौसम शुरू होने से पहले कृषि विभाग सभी राज्य सरकारों के साथ समन्वय करके राज्यवार और माहवार उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन करता है। इसी आधार पर राज्यों को हर महीने पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का आवंटन किया जाता है। उर्वरकों की उपलब्धता पर इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) नामक ऑनलाइन वेब-आधारित प्रणाली के ज़रिये रियल टाइम निगरानी रखी जाती है।

यह ऐसे समय में आया है जब किसान संगठन कई राज्यों में खाद की अनुपलब्धता और ऊँची कीमतों की शिकायतें उठाते रहे हैं। सरकार का यह बयान उन्हीं चिंताओं के जवाब में संसद में आया है।

यूरिया और डीएपी की सब्सिडी दरें

यूरिया सब्सिडी योजना के तहत 45 किलोग्राम के एक बैग की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹242 निर्धारित की गई है — इसमें नीम कोटिंग और लागू कर शामिल नहीं हैं। खेत तक पहुँचने वाली यूरिया की वास्तविक लागत और बाज़ार कीमत के बीच का अंतर केंद्र सरकार सब्सिडी के रूप में निर्माता या आयातक को प्रदान करती है।

खरीफ 2026 सीजन के लिए डीएपी को ₹1,350 प्रति 50 किलोग्राम बैग की किफायती दर पर उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत ₹3,500 प्रति मीट्रिक टन की अतिरिक्त सहायता दी जा रही है, जिसमें फैक्टरी से खेत तक परिवहन लागत, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का प्रभाव और जीएसटी जैसी लागतें शामिल हैं। यह सुविधा घरेलू और आयातित डीएपी तथा आयातित टीएसपी (ट्रिपल सुपर फॉस्फेट) दोनों पर लागू है।

आयात और रेलवे समन्वय

अनुप्रिया पटेल ने बताया कि यूरिया और अन्य उर्वरकों की घरेलू माँग तथा उत्पादन के बीच के अंतर को आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है और आवश्यक आयात की योजना पहले से तैयार की जाती है। इसके अलावा, राज्यों तक उर्वरकों की समय पर ढुलाई के लिए रेलवे मंत्रालय के साथ नियमित समन्वय किया जाता है और पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराए जाते हैं।

फॉस्फेटिक और पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिए न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) योजना भी जारी है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे माल की कीमतों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी दरें तय की जाती हैं।

नैनो उर्वरक और आत्मनिर्भरता

सरकार ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता शिविर, वेबिनार, खेत प्रदर्शन और क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्मों का सहारा लिया है। ये उत्पाद प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (PMKSK) के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हालाँकि, नैनो उर्वरकों पर फिलहाल कोई सरकारी सब्सिडी नहीं दी जाती।

आयातित फॉस्फेटिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु उत्पादकों को उचित मूल्य निर्धारण और प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कालाबाजारी पर निगरानी

उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत वसूली रोकने के लिए कृषि विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमित निगरानी करता है और राज्यों द्वारा की गई कार्रवाई की साप्ताहिक समीक्षा भी होती है। गौरतलब है कि उर्वरक वितरण में अनियमितताएँ पिछले कई सीजन में विवाद का विषय रही हैं, और यह साप्ताहिक समीक्षा तंत्र उसी दिशा में एक संस्थागत कदम है।

आगे चलकर यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि IFMS प्रणाली और रेलवे समन्वय के ये दावे ज़मीनी स्तर पर किस हद तक कारगर साबित होते हैं, खासकर उन राज्यों में जहाँ वितरण नेटवर्क अभी भी कमज़ोर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन IFMS जैसी डिजिटल निगरानी प्रणालियों की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन ज़मीनी आँकड़ों से होना चाहिए, न केवल संसद के पटल पर दिए गए वक्तव्यों से। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में किसान संगठन वितरण में देरी और ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें उठाते रहे हैं। नैनो उर्वरकों को प्रोत्साहन देना दीर्घकालिक दृष्टि से सही कदम है, परंतु सब्सिडी के अभाव में छोटे और सीमांत किसानों की पहुँच सीमित रह सकती है — यह अंतर्विरोध नीति में अभी अनसुलझा है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खरीफ 2026 में यूरिया और डीएपी की कीमत क्या है?
खरीफ 2026 में यूरिया की अधिकतम खुदरा कीमत ₹242 प्रति 45 किलोग्राम बैग और डीएपी की कीमत ₹1,350 प्रति 50 किलोग्राम बैग निर्धारित है। डीएपी पर ₹3,500 प्रति मीट्रिक टन की अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है।
सरकार उर्वरकों की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित करती है?
कृषि विभाग हर फसल मौसम से पहले राज्यवार और माहवार माँग का आकलन करता है और उसी के अनुसार आवंटन करता है। IFMS प्रणाली से रियल टाइम निगरानी और रेलवे मंत्रालय के साथ समन्वय से समय पर ढुलाई सुनिश्चित की जाती है।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों को कहाँ मिलेंगे?
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (PMKSK) के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हालाँकि, इन उत्पादों पर फिलहाल कोई सरकारी सब्सिडी नहीं दी जाती।
उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
कृषि विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत वसूली पर नियमित निगरानी रखता है। राज्यों द्वारा की गई कार्रवाई की साप्ताहिक समीक्षा भी की जाती है।
क्या भारत उर्वरकों के लिए आयात पर निर्भर है?
हाँ, घरेलू उत्पादन और माँग के बीच का अंतर आयात से पूरा किया जाता है, जिसकी योजना पहले से बनाई जाती है। सरकार आयातित फॉस्फेटिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने के लिए घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन भी दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
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