खाद स्टॉक पिछले साल से 50%25 बेहतर, जेपी नड्डा ने खड़गे के दावे को बताया राजनीति से प्रेरित
सारांश
Key Takeaways
- जेपी नड्डा ने 24 अप्रैल 2025 को खड़गे के खाद कमी के दावे को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज किया।
- DAP का स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है, NPK में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- भारत में यूरिया किसानों को मात्र 266.5 रुपए प्रति बोरी मिल रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कीमत 4,000 रुपए से अधिक है।
- सरकार ने वैश्विक टेंडर के जरिए 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया की अतिरिक्त व्यवस्था की है।
- जमाखोरी और काला बाजारी के खिलाफ राज्य सरकारों के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई जारी है।
- भारतीय दूतावासों के माध्यम से वैकल्पिक उर्वरक आपूर्ति स्रोत भी सुनिश्चित किए गए हैं।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल 2025 — केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खाद की कमी संबंधी बयान को सिरे से नकारते हुए इसे राजनीति से प्रेरित और किसानों को गुमराह करने की कोशिश करार दिया। नड्डा ने स्पष्ट किया कि देश में उर्वरक का मौजूदा स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है और आपूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित है।
खड़गे के बयान पर नड्डा का सीधा हमला
जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता का पद संभालने के बावजूद इस तरह की भ्रामक जानकारी देना हैरान करने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस किसानों को महज वोट बैंक समझती है और सच्चाई सामने रखने की बजाय झूठे तथ्यों को हवा देती है। नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार हमेशा किसानों के हित में खड़ी रही है और आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले भारत में सस्ती खाद
नड्डा ने तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि वैश्विक बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत 4,000 रुपए से अधिक है, जबकि भारत में किसानों को यह केवल 266.5 रुपए में दी जा रही है। इसी प्रकार DAP (डाइअमोनियम फॉस्फेट) की एक बोरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 रुपए से ज्यादा की है, लेकिन भारत में किसानों को यह मात्र 1,350 रुपए में उपलब्ध कराई जा रही है।
यह भारी सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा वहन की जा रही है, जो किसानों को वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव के प्रभाव से बचाने की मोदी सरकार की नीति का हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक उर्वरक कीमतों में भारी उछाल आया था, जिसके बावजूद भारत में किसानों पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया गया।
स्टॉक की स्थिति — ताज़ा आंकड़े
जेपी नड्डा ने बताया कि वर्तमान में DAP का स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। NPK (नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटाश) का स्टॉक करीब 30 प्रतिशत अधिक है और यूरिया की उपलब्धता पर्याप्त एवं स्थिर बनी हुई है।
यह आंकड़े ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं जब देश में खरीफ बुवाई सीजन नजदीक है और किसानों को उर्वरक की सबसे अधिक जरूरत होती है। गौरतलब है कि 2022-23 में वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान भी भारत ने उर्वरक उपलब्धता बनाए रखी थी।
जमाखोरी रोकने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के कदम
नड्डा ने बताया कि उन्होंने स्वयं कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों से सीधी बात कर खाद की सुचारु उपलब्धता के निर्देश दिए हैं। जमाखोरी, काला बाजारी और अवैध बिक्री के खिलाफ राज्य सरकारों के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
इसके अलावा सरकार ने वैश्विक टेंडर के माध्यम से 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया की अतिरिक्त व्यवस्था की है। भारतीय दूतावासों के जरिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत भी सुनिश्चित किए गए हैं, जिससे किसी भी वैश्विक व्यवधान की स्थिति में देश के किसान प्रभावित न हों।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव और कई राज्यों में उपचुनाव नजदीक हैं, जहां किसान वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के बीच कृषि नीति पर यह टकराव नया नहीं है — 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी उर्वरक सब्सिडी और एमएसपी के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हो चुकी है।
आने वाले हफ्तों में सरकार के उर्वरक वितरण तंत्र की असली परीक्षा खरीफ सीजन की बुवाई के दौरान होगी, जब जमीनी स्तर पर आपूर्ति की वास्तविकता सामने आएगी।