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खरीफ 2026: उर्वरक भंडार 197.56 लाख मीट्रिक टन, जरूरत का 51% पहले से तैयार — उर्वरक मंत्रालय

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खरीफ 2026: उर्वरक भंडार 197.56 लाख मीट्रिक टन, जरूरत का 51% पहले से तैयार — उर्वरक मंत्रालय

सारांश

पश्चिम एशिया संघर्ष से वैश्विक सप्लाई चेन डगमगाई, पर भारत का उर्वरक भंडार 197.56 लाख मीट्रिक टन — जरूरत का 51% — पहले से तैयार है। जैविक खाद की खरीद तीन गुना उछली। सरकार का दावा: अग्रिम योजना और साप्ताहिक सब्सिडी भुगतान से खरीफ सीजन सुरक्षित।

मुख्य बातें

उर्वरक मंत्रालय के अनुसार खरीफ 2026 के लिए 197.56 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध, जो कुल जरूरत 383.9 LMT का 51% से अधिक है।
सामान्यतः इस समय तक केवल 33 प्रतिशत भंडार होता था — इस वर्ष स्तर काफी बेहतर।
7 जून 2026 तक किसानों ने 86.65 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक खरीदे, जो कुल जरूरत का 22.57% ।
जैविक खाद की खरीद 3.20 LMT से बढ़कर 11.17 LMT — तीन गुने से अधिक वृद्धि।
28 फरवरी से अब तक आयात व घरेलू उत्पादन से 147.40 LMT उर्वरक उपलब्धता बढ़ाई गई।
जून में 25 LMT से अधिक यूरिया, डीएपी, एनपीके बंदरगाहों पर पहुँचने की उम्मीद; 17 LMT यूरिया के लिए नई वैश्विक निविदा जारी।

उर्वरक मंत्रालय ने 8 जून 2026 को जारी अपडेट में बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान के बावजूद, चालू खरीफ सीजन 2026 में किसानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए देश में उर्वरकों का भंडार पर्याप्त और संतोषजनक स्तर पर है। मंत्रालय के अनुसार, अग्रिम योजना और कुशल रसद प्रबंधन की बदौलत यह भंडार सामान्य वर्षों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है।

मौजूदा भंडार की स्थिति

मंत्रालय के बयान के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए उर्वरक की कुल आवश्यकता 383.9 लाख मीट्रिक टन (LMT) आँकी गई है। इसके सापेक्ष, वर्तमान में 197.56 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो कुल जरूरत का 51 प्रतिशत से अधिक है। यह आँकड़ा उल्लेखनीय है, क्योंकि सामान्यतः इस समय तक केवल लगभग 33 प्रतिशत भंडार ही उपलब्ध होता है।

7 जून 2026 तक भारतीय किसान चालू खरीफ सीजन में कुल 86.65 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक खरीद चुके हैं, जो कुल अनुमानित आवश्यकता का लगभग 22.57 प्रतिशत है।

जैविक खाद की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि

पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद किसानों ने 11.17 लाख मीट्रिक टन जैविक खाद की खरीद की है — जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह मात्रा केवल 3.20 लाख मीट्रिक टन थी। यह वृद्धि तीन गुने से भी अधिक है और रासायनिक उर्वरकों से जैविक विकल्पों की ओर किसानों के क्रमिक बदलाव को दर्शाती है।

राज्यवार जैविक खाद खरीद इस प्रकार रही: पंजाब में 2.83 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में 2.71 लाख मीट्रिक टन, हरियाणा में 1.33 लाख मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश में 1.25 लाख मीट्रिक टन, गुजरात में 0.96 लाख मीट्रिक टन और महाराष्ट्र में 0.84 लाख मीट्रिक टन

आयात और घरेलू उत्पादन से आपूर्ति

28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से आयात और घरेलू उत्पादन के माध्यम से कुल मिलाकर लगभग 147.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई गई है। जून 2026 में 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक आयातित यूरिया, डीएपी और एनपीके के भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त, भारत ने 17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खरीद के लिए एक और वैश्विक निविदा जारी की है, जिस पर प्रक्रिया जारी है।

सब्सिडी भुगतान और आपूर्ति निगरानी

उर्वरक विभाग उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता की नियमित समीक्षा कर रहा है। कंपनियों के सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जा रहा है और वर्तमान में उर्वरक सब्सिडी के लिए बजट में पर्याप्त राशि उपलब्ध है। यह सरकार की ओर से किसानों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की उर्वरक सप्लाई चेन को चुनौती दी हो — 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी पोटाश और यूरिया की कीमतों में भारी उछाल आया था। इस बार सरकार का अग्रिम भंडारण रणनीति पर जोर उसी अनुभव से सीखे गए सबक का प्रतिफल प्रतीत होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा वितरण की अंतिम कड़ी में होगी — खासकर उन राज्यों में जहाँ पिछले सीजन में उर्वरक की कालाबाजारी और कृत्रिम किल्लत की शिकायतें आई थीं। जैविक खाद की खरीद में तीन गुना उछाल उत्साहजनक है, पर यह स्पष्ट नहीं है कि यह वृद्धि किसानों की स्वैच्छिक प्राथमिकता से आई है या रासायनिक उर्वरक की स्थानीय अनुपलब्धता की मजबूरी से। साप्ताहिक सब्सिडी भुगतान का वादा पुराना है — इसकी वास्तविक क्रियान्वयन दर और बकाया राशि का खुलासा होना चाहिए।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खरीफ 2026 के लिए भारत में उर्वरक भंडार की स्थिति क्या है?
उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, 8 जून 2026 तक देश में 197.56 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो खरीफ 2026 की कुल अनुमानित जरूरत 383.9 LMT का 51% से अधिक है। सामान्यतः इस समय तक केवल 33% भंडार होता था, इसलिए इस वर्ष स्थिति बेहतर मानी जा रही है।
पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत की उर्वरक आपूर्ति पर क्या असर पड़ा?
28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान आया। हालाँकि, सरकार ने आयात और घरेलू उत्पादन के जरिए 147.40 LMT उर्वरक की अतिरिक्त उपलब्धता सुनिश्चित की और 17 LMT यूरिया के लिए नई वैश्विक निविदा भी जारी की है।
इस वर्ष जैविक खाद की खरीद में इतनी वृद्धि क्यों हुई?
किसानों ने इस सीजन में 11.17 LMT जैविक खाद खरीदी, जबकि पिछले वर्ष यह केवल 3.20 LMT थी। मंत्रालय का कहना है कि यह रासायनिक उर्वरकों से जैविक विकल्पों की ओर सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है, हालाँकि विशेषज्ञ इसे आंशिक रूप से वैश्विक संघर्ष के कारण रासायनिक उर्वरक की बढ़ी कीमतों से भी जोड़ते हैं।
उर्वरक सब्सिडी का भुगतान कैसे हो रहा है?
उर्वरक विभाग के अनुसार, कंपनियों के सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जा रहा है और वर्तमान बजट में इसके लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध है। इससे उर्वरक कंपनियों की नकदी प्रवाह समस्या कम होने और उत्पादन निर्बाध रहने की उम्मीद है।
जून 2026 में कितना उर्वरक आयात होने की उम्मीद है?
जून 2026 में 25 LMT से अधिक आयातित यूरिया, डीएपी और एनपीके के भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने की उम्मीद है। इसके अलावा, 17 LMT यूरिया की खरीद के लिए एक नई वैश्विक निविदा जारी की गई है जिस पर प्रक्रिया जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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