भारत में उर्वरक भंडार मजबूत: 199.65 लाख मीट्रिक टन स्टॉक, मौसमी मांग से 51% अधिक

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भारत में उर्वरक भंडार मजबूत: 199.65 लाख मीट्रिक टन स्टॉक, मौसमी मांग से 51% अधिक

सारांश

मध्य पूर्व संकट के बावजूद भारत का उर्वरक भंडार 199.65 लाख मीट्रिक टन पर मजबूत है — सामान्य बफर से कहीं अधिक। घरेलू उत्पादन, आयात और वैश्विक निविदाओं के जरिए सरकार ने खरीफ सीजन से पहले किसानों को किफायती दरों पर उर्वरक उपलब्धता की गारंटी दी है।

मुख्य बातें

भारत में वर्तमान उर्वरक भंडार 199.65 लाख मीट्रिक टन , जो मौसमी माँग के 51% से अधिक है।
सामान्य बफर स्तर 33% के मुकाबले यह भंडार काफी अधिक है।
घरेलू उत्पादन का योगदान 76.78 एलएमटी और आयात का हिस्सा 19.94 एलएमटी रहा।
कंपनियों ने 12 एलएमटी डीएपी , 4 एलएमटी टीएसपी और 3 एलएमटी अमोनियम सल्फेट के लिए वैश्विक निविदाएँ जारी की हैं।
प्रमुख उर्वरकों का एमआरपी अपरिवर्तित ; सब्सिडी बिलों का साप्ताहिक भुगतान जारी।
सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह की अब तक आठ बैठकें हो चुकी हैं।

उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने 11 मई को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मध्य पूर्व संकट के बावजूद भारत की उर्वरक सुरक्षा पूरी तरह स्थिर और मजबूत बनी हुई है। सरकार ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों में वृद्धि कर यह सुनिश्चित किया है कि सभी प्रमुख श्रेणियों में किसानों की जरूरतों से अधिक उर्वरक उपलब्ध रहे।

मौजूदा उर्वरक भंडार की स्थिति

देश में वर्तमान में 199.65 लाख मीट्रिक टन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जो मौसमी मांग के 51 प्रतिशत से अधिक को पूरा करता है। यह इस समय के सामान्य बफर स्तर — लगभग 33 प्रतिशत — से काफी अधिक है। शर्मा ने इसे बेहतर अग्रिम भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का परिणाम बताया।

घरेलू उत्पादन और आयात में वृद्धि

हाल के संकट के बाद घरेलू उत्पादन और आयात में तेज़ी से बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल उपलब्धता में लगभग 97 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) की वृद्धि हुई है। इसमें अकेले घरेलू उत्पादन का योगदान 76.78 एलएमटी रहा, जबकि भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने वाले आयात का हिस्सा 19.94 एलएमटी था।

वैश्विक निविदाएँ और कच्चे माल की आपूर्ति

माँग चरम पर पहुँचने के दौरान किसी भी प्रकार की कमी न हो, इसके लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों ने संयुक्त वैश्विक निविदाएँ शुरू की हैं — 12 एलएमटी डीएपी, 4 एलएमटी टीएसपी और 3 एलएमटी अमोनियम सल्फेट के लिए। इसके अतिरिक्त, 5.36 एलएमटी अमोनिया और 5.94 एलएमटी सल्फर सहित कच्चे माल की निविदाएँ प्रक्रियाधीन हैं। सरकार ने यह भी पुष्टि की कि एसओएच के बाहर से प्राप्त लगभग 7 एलएमटी एनपीके के मई और जून के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने की उम्मीद है।

किसानों के लिए एमआरपी में कोई बदलाव नहीं

किसानों के लिए बड़ी राहत की बात यह है कि सरकार ने प्रमुख उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया है। उर्वरक विभाग यूरिया और फास्फोरस एवं पोटेशियम उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्री की नियमित समीक्षा कर रहा है और आपूर्ति श्रृंखला में तरलता बनाए रखने के लिए साप्ताहिक आधार पर सब्सिडी बिलों का भुगतान कर रहा है।

सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह की भूमिका

उपलब्धता संबंधी चुनौतियों से निपटने और किसानों को बिना किसी रुकावट के किफायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं। गौरतलब है कि यह सक्रिय नीतिगत हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ भू-राजनीतिक तनावों के कारण दबाव में हैं। आने वाले खरीफ सीजन में उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अंतिम छोर तक वितरण की होगी — विशेषकर दूरदराज के किसानों तक समय पर पहुँच। मध्य पूर्व संकट ने एक बार फिर भारत की आयात-निर्भरता की कमज़ोरी उजागर की है; 97 एलएमटी की वृद्धि राहत देती है, पर दीर्घकालिक समाधान घरेलू उत्पादन क्षमता विस्तार में है। सचिवों के समूह की आठ बैठकें सरकार की सतर्कता दर्शाती हैं, लेकिन यह भी संकेत देती हैं कि संकट प्रबंधन अभी भी प्रतिक्रियात्मक है, न कि पूर्वानुमानित।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में अभी कितना उर्वरक भंडार उपलब्ध है?
भारत में वर्तमान में 199.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरक भंडार उपलब्ध है, जो मौसमी माँग के 51 प्रतिशत से अधिक को पूरा करता है। यह सामान्य बफर स्तर 33 प्रतिशत से काफी अधिक है।
मध्य पूर्व संकट का भारत की उर्वरक आपूर्ति पर क्या असर पड़ा?
मध्य पूर्व संकट के बावजूद भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत बनी हुई है। सरकार ने घरेलू उत्पादन और आयात में तेज़ी से वृद्धि कर कुल उपलब्धता में लगभग 97 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की है।
क्या किसानों के लिए उर्वरक की कीमतें बढ़ेंगी?
नहीं, सरकार ने प्रमुख उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया है। साप्ताहिक आधार पर सब्सिडी बिलों का भुगतान भी जारी है ताकि आपूर्ति श्रृंखला में तरलता बनी रहे।
भारतीय उर्वरक कंपनियों ने किन उत्पादों के लिए वैश्विक निविदाएँ जारी की हैं?
भारतीय उर्वरक कंपनियों ने 12 एलएमटी डीएपी, 4 एलएमटी टीएसपी और 3 एलएमटी अमोनियम सल्फेट के लिए संयुक्त वैश्विक निविदाएँ जारी की हैं। इसके अलावा 5.36 एलएमटी अमोनिया और 5.94 एलएमटी सल्फर के लिए कच्चे माल की निविदाएँ भी प्रक्रियाधीन हैं।
खरीफ सीजन में उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार ने सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह की आठ बैठकें आयोजित की हैं और साप्ताहिक आधार पर सब्सिडी बिलों का भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा मई-जून में 7 एलएमटी एनपीके के भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस