पश्चिम एशिया संकट से उर्वरक सब्सिडी बिल में ₹15,000 करोड़ की संभावित वृद्धि, खरीफ आपूर्ति 'संतोषजनक'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात लागत में तेज़ उछाल से चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में केंद्र सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च करीब ₹15,000 करोड़ तक बढ़ सकता है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने 18 मई को इस वृद्धि की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने प्रतिशत वृद्धि का खुलासा करने से परहेज़ किया।
सरकार की स्थिति और अधिकारी का बयान
शर्मा ने स्पष्ट किया, 'सब्सिडी बिल ज़रूर बढ़ेगा, लेकिन यह कितने प्रतिशत बढ़ेगा, फिलहाल मैं नहीं कह सकती।' इसके साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि 2026 खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता 'संतोषजनक' बनी हुई है। कुल 390 लाख टन की अनुमानित माँग के मुकाबले 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक पहले से उपलब्ध है — जो सामान्य बफर स्तर 33 प्रतिशत से काफी अधिक है।
उर्वरक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्तमान में देश के पास 199.65 लाख मीट्रिक टन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। यह बेहतर अग्रिम भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का परिणाम बताया जा रहा है।
घरेलू उत्पादन पर असर
पश्चिम एशिया संकट का असर घरेलू उत्पादन पर भी पड़ा है। संकट शुरू होने के बाद से अब तक 86.2 लाख टन उर्वरक उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आँकड़ा 93 लाख टन था। फिलहाल देश में घरेलू उत्पादन करीब 80,000 टन प्रतिदिन की दर से जारी है और यूरिया संयंत्रों के लिए पर्याप्त गैस आपूर्ति उपलब्ध होने की पुष्टि की गई है।
आयात विविधीकरण और वैश्विक निविदाएँ
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता घटाने के लिए भारत ने उससे बाहर के क्षेत्रों से उर्वरक आयात बढ़ाया है और अब तक करीब 22 लाख टन उर्वरक आयात किए जा चुके हैं। सरकार ने पुष्टि की है कि होर्मुज के बाहर से खरीदे गए लगभग 7 लाख मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक मई और जून के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने की उम्मीद है।
पीक डिमांड के दौरान किसी भी कमी से बचने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर संयुक्त निविदाएँ जारी की हैं — 12 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4 लाख मीट्रिक टन टीएसपी और 3 लाख मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट के लिए। इसके अतिरिक्त, 5.36 लाख मीट्रिक टन अमोनिया और 5.94 लाख मीट्रिक टन सल्फर की खरीद के लिए भी निविदाएँ प्रक्रियाधीन हैं।
किसानों पर असर और एमआरपी में कोई बदलाव नहीं
किसानों के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब खरीफ बुवाई का मौसम नज़दीक है और किसान यूरिया, डीएपी तथा अन्य उर्वरकों की खरीद के लिए बाज़ार में उतर रहे हैं।
गौरतलब है कि उर्वरक उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह अब तक आठ बैठकें कर चुका है। इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम के ज़रिए हर सप्ताह सब्सिडी भुगतान जारी है।
आगे क्या होगा
उर्वरक विभाग यूरिया और फॉस्फेट एवं पोटाश आधारित उर्वरकों के उत्पादन के लिए ज़रूरी कच्चे माल की उपलब्धता की नियमित समीक्षा कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम न हुआ तो आने वाली तिमाहियों में सब्सिडी बोझ और बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता — यह सरकार के राजकोषीय प्रबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।