पश्चिम एशिया संकट से उर्वरक सब्सिडी बिल में ₹15,000 करोड़ की संभावित वृद्धि, खरीफ आपूर्ति 'संतोषजनक'

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पश्चिम एशिया संकट से उर्वरक सब्सिडी बिल में ₹15,000 करोड़ की संभावित वृद्धि, खरीफ आपूर्ति 'संतोषजनक'

सारांश

पश्चिम एशिया संकट ने भारत की उर्वरक सब्सिडी पर सीधा असर डाला है — अप्रैल-जून तिमाही में ₹15,000 करोड़ की अतिरिक्त देनदारी संभव है। फिर भी सरकार ने होर्मुज के बाहर से आयात बढ़ाकर और वैश्विक निविदाएँ जारी कर खरीफ सीजन के लिए किसानों को राहत देने की कोशिश की है — एमआरपी में कोई बदलाव नहीं।

मुख्य बातें

पश्चिम एशिया संकट से अप्रैल-जून 2026 तिमाही में उर्वरक सब्सिडी खर्च ₹15,000 करोड़ तक बढ़ने का अनुमान।
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस.
शर्मा ने वृद्धि की पुष्टि की; प्रतिशत बताने से परहेज़।
2026 खरीफ सीजन के लिए 390 लाख टन माँग के मुकाबले 51% स्टॉक उपलब्ध; सामान्य बफर 33% है।
देश में कुल उर्वरक भंडार 199.65 लाख मीट्रिक टन ; घरेलू उत्पादन 80,000 टन प्रतिदिन ।
होर्मुज के बाहर से 22 लाख टन आयात; 7 लाख मीट्रिक टन एनपीके मई-जून में बंदरगाहों पर आने की उम्मीद।
प्रमुख उर्वरकों की एमआरपी में कोई बदलाव नहीं; सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह की अब तक 8 बैठकें ।

पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात लागत में तेज़ उछाल से चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में केंद्र सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च करीब ₹15,000 करोड़ तक बढ़ सकता है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने 18 मई को इस वृद्धि की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने प्रतिशत वृद्धि का खुलासा करने से परहेज़ किया।

सरकार की स्थिति और अधिकारी का बयान

शर्मा ने स्पष्ट किया, 'सब्सिडी बिल ज़रूर बढ़ेगा, लेकिन यह कितने प्रतिशत बढ़ेगा, फिलहाल मैं नहीं कह सकती।' इसके साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि 2026 खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता 'संतोषजनक' बनी हुई है। कुल 390 लाख टन की अनुमानित माँग के मुकाबले 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक पहले से उपलब्ध है — जो सामान्य बफर स्तर 33 प्रतिशत से काफी अधिक है।

उर्वरक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्तमान में देश के पास 199.65 लाख मीट्रिक टन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। यह बेहतर अग्रिम भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का परिणाम बताया जा रहा है।

घरेलू उत्पादन पर असर

पश्चिम एशिया संकट का असर घरेलू उत्पादन पर भी पड़ा है। संकट शुरू होने के बाद से अब तक 86.2 लाख टन उर्वरक उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आँकड़ा 93 लाख टन था। फिलहाल देश में घरेलू उत्पादन करीब 80,000 टन प्रतिदिन की दर से जारी है और यूरिया संयंत्रों के लिए पर्याप्त गैस आपूर्ति उपलब्ध होने की पुष्टि की गई है।

आयात विविधीकरण और वैश्विक निविदाएँ

होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता घटाने के लिए भारत ने उससे बाहर के क्षेत्रों से उर्वरक आयात बढ़ाया है और अब तक करीब 22 लाख टन उर्वरक आयात किए जा चुके हैं। सरकार ने पुष्टि की है कि होर्मुज के बाहर से खरीदे गए लगभग 7 लाख मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक मई और जून के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने की उम्मीद है।

पीक डिमांड के दौरान किसी भी कमी से बचने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर संयुक्त निविदाएँ जारी की हैं — 12 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4 लाख मीट्रिक टन टीएसपी और 3 लाख मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट के लिए। इसके अतिरिक्त, 5.36 लाख मीट्रिक टन अमोनिया और 5.94 लाख मीट्रिक टन सल्फर की खरीद के लिए भी निविदाएँ प्रक्रियाधीन हैं।

किसानों पर असर और एमआरपी में कोई बदलाव नहीं

किसानों के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब खरीफ बुवाई का मौसम नज़दीक है और किसान यूरिया, डीएपी तथा अन्य उर्वरकों की खरीद के लिए बाज़ार में उतर रहे हैं।

गौरतलब है कि उर्वरक उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह अब तक आठ बैठकें कर चुका है। इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम के ज़रिए हर सप्ताह सब्सिडी भुगतान जारी है।

आगे क्या होगा

उर्वरक विभाग यूरिया और फॉस्फेट एवं पोटाश आधारित उर्वरकों के उत्पादन के लिए ज़रूरी कच्चे माल की उपलब्धता की नियमित समीक्षा कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम न हुआ तो आने वाली तिमाहियों में सब्सिडी बोझ और बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता — यह सरकार के राजकोषीय प्रबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की यह अनुमानित वृद्धि महज़ एक तिमाही का आँकड़ा है — यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचा तो पूरे वित्त वर्ष का सब्सिडी बोझ बजट अनुमानों को पार कर सकता है, जो पहले से ही राजकोषीय समेकन की दिशा में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। सरकार का होर्मुज के बाहर से आयात विविधीकरण सही दिशा में कदम है, लेकिन यह रणनीति तब तक अधूरी है जब तक घरेलू उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में आई 6.8 लाख टन की कमी की भरपाई नहीं होती। किसानों के लिए एमआरपी स्थिर रखना राजनीतिक रूप से अनिवार्य था, लेकिन इसका मतलब है कि आयात लागत का पूरा बोझ सरकारी खज़ाने पर पड़ेगा — और अंततः करदाताओं पर।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम एशिया संकट से भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल कितना बढ़ेगा?
सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च करीब ₹15,000 करोड़ तक बढ़ सकता है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने वृद्धि की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने प्रतिशत वृद्धि का खुलासा नहीं किया।
2026 खरीफ सीजन के लिए उर्वरक की उपलब्धता कैसी है?
सरकार के अनुसार खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता 'संतोषजनक' है। कुल 390 लाख टन की अनुमानित माँग के मुकाबले 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक पहले से उपलब्ध है, जो सामान्य बफर स्तर 33 प्रतिशत से काफी अधिक है।
क्या किसानों को उर्वरकों के लिए ज़्यादा कीमत चुकानी होगी?
नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयात लागत में वृद्धि का बोझ सरकारी सब्सिडी के माध्यम से वहन किया जा रहा है।
भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर से उर्वरक आयात कैसे कर रहा है?
भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से परे के क्षेत्रों से उर्वरक आयात बढ़ाया है और अब तक करीब 22 लाख टन उर्वरक आयात किए जा चुके हैं। इसके अलावा, लगभग 7 लाख मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक मई और जून के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने की उम्मीद है।
भारतीय उर्वरक कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर कौन-सी निविदाएँ जारी की हैं?
पीक डिमांड के दौरान कमी से बचने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों ने 12 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4 लाख मीट्रिक टन टीएसपी और 3 लाख मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट के लिए संयुक्त वैश्विक निविदाएँ जारी की हैं। इसके अतिरिक्त 5.36 लाख मीट्रिक टन अमोनिया और 5.94 लाख मीट्रिक टन सल्फर की खरीद के लिए भी निविदाएँ प्रक्रियाधीन हैं।
राष्ट्र प्रेस
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