अबू आजमी का BJP पर हमला: 'विश्वगुरु बनने का मौका गँवाया, विदेश नीति फेल'

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अबू आजमी का BJP पर हमला: 'विश्वगुरु बनने का मौका गँवाया, विदेश नीति फेल'

सारांश

सपा विधायक अबू आजमी ने एक साथ कई मोर्चों पर BJP को घेरा — विदेश नीति की विफलता से महंगाई, मुस्लिमों पर कथित अत्याचार, वंदे मातरम पर सफाई और बांग्लादेशी घुसपैठ पर सरकार से सवाल। उनका केंद्रीय आरोप: भारत ने विश्वगुरु बनने का मौका गँवा दिया।

मुख्य बातें

सपा विधायक अबू आजमी ने 18 मई को मुंबई में BJP सरकार की विदेश नीति को 'फेल' करार दिया।
आजमी ने कहा कि भारत के पास विश्वगुरु बनने का अवसर था, जिसे खो दिया गया।
उन्होंने कोलकाता और उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज़ रोकने को मुस्लिमों को 'टारगेट' करना बताया।
वंदे मातरम पर कहा — विरोधी नहीं हैं, लेकिन धार्मिक कारणों से कुछ मुसलमान इसे नहीं गाते।
बांग्लादेशी घुसपैठ पर बोले — सरकार जवाब दे कि सीमा पार कैसे हो रही है, यह मुद्दा सिर्फ राजनीति के लिए उठाया जा रहा है।

समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने 18 मई को मुंबई में मध्य पूर्व संघर्ष, केंद्र सरकार की विदेश नीति, बढ़ती महंगाई, सड़क पर नमाज़, वंदे मातरम और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे कई ज्वलंत मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्यों में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और केंद्र की विदेश नीति की विफलता का सीधा असर आम जनता पर महंगाई के रूप में पड़ रहा है।

विश्वगुरु और विदेश नीति पर आरोप

आजमी ने कहा कि भारत के सामने विश्वगुरु बनने का सुनहरा अवसर था, जिसे गँवा दिया गया। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री को आगे आकर मध्य पूर्व में जारी युद्ध रोकने की पहल करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'केंद्र सरकार की विदेश नीति फेल हो चुकी है, जिसके कारण देश को भीषण महंगाई का सामना करना पड़ रहा है।'

आजमी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री एक ओर जनता से ईंधन बचाने और विदेश यात्रा न करने की अपील करते हैं, वहीं दूसरी ओर स्वयं कथित तौर पर पाँच-पाँच देशों की यात्राएँ करते हैं। उनके अनुसार, महंगाई रोकने या देश में ईंधन लाने का कोई ठोस प्रयास नज़र नहीं आता और नेता केवल दिखावे के लिए अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर रहे हैं।

सड़क पर नमाज़ और मुस्लिम समुदाय का मुद्दा

कोलकाता और उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के मामले पर आजमी ने कहा कि मुस्लिमों को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब मस्जिद में जगह कम पड़ती है तो कुछ लोग बाहर नमाज़ अदा करते हैं, यह कोई नई बात नहीं है। उनके अनुसार, BJP शासित राज्यों में इसे रोका जा रहा है, जबकि अन्य धर्मों के बड़े आयोजन सड़कों पर होते रहते हैं और इस पर किसी मुसलमान ने आपत्ति नहीं जताई।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के संदर्भ में आजमी ने आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है और एक समुदाय पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'कभी न कभी इसका फल मिलेगा।'

वंदे मातरम पर स्पष्टीकरण

वंदे मातरम के मुद्दे पर आजमी ने कहा कि वे इसके विरोधी नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक दृष्टिकोण से एक मुसलमान अल्लाह के अलावा किसी के सामने सिर नहीं झुकाता, इसलिए कुछ लोग इसे गाते नहीं — लेकिन सम्मान में खड़े ज़रूर होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो मुसलमान वंदे मातरम गाते हैं, उनसे उन्हें कोई आपत्ति नहीं।

बांग्लादेशी घुसपैठ पर दोटूक

बांग्लादेशी घुसपैठ के मसले पर आजमी ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी बांग्लादेशी का नाम शामिल नहीं होना चाहिए — यह सभी की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बांग्लादेशी सीमा पार करके आ कैसे रहे हैं, और कहा कि सिर्फ इस मुद्दे को उछालकर राजनीति की जा रही है, ज़मीनी समाधान नहीं निकाला जा रहा।

आगे की राजनीतिक प्रासंगिकता

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान तनाव और मध्य पूर्व संघर्ष की पृष्ठभूमि में भारत की विदेश नीति पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है। आजमी के बयान विपक्ष की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं जिसमें महंगाई, अल्पसंख्यक अधिकार और विदेश नीति को एक साथ जोड़कर BJP सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें तथ्यात्मक गहराई कम और राजनीतिक आरोप अधिक हैं। विदेश नीति की विफलता को महंगाई से जोड़ना एक सरलीकृत तर्क है — वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान और घरेलू कर नीति जैसे कारक भी उतने ही ज़िम्मेदार हैं। सड़क पर नमाज़ के मुद्दे पर उनकी बात में एक वैध सार्वजनिक स्थान की बहस छिपी है, जिसे राजनीतिक ध्रुवीकरण के शोर में अनदेखा किया जा रहा है। बांग्लादेशी घुसपैठ पर उनका रुख दोधारी है — एक ओर वे इसे गंभीर मानते हैं, दूसरी ओर इसे 'सिर्फ राजनीति' कहते हैं; यह विरोधाभास उनकी पार्टी की स्थिति को भी अस्पष्ट बनाता है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबू आजमी ने भारत की विदेश नीति पर क्या कहा?
अबू आजमी ने कहा कि केंद्र सरकार की विदेश नीति फेल हो चुकी है और इसका असर देश में भीषण महंगाई के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास मध्य पूर्व संघर्ष में मध्यस्थता कर विश्वगुरु बनने का मौका था, जो गँवा दिया गया।
सड़क पर नमाज़ रोके जाने पर अबू आजमी का क्या रुख है?
आजमी ने कहा कि BJP शासित राज्यों में मस्जिद के बाहर नमाज़ पढ़ने से रोका जाना मुस्लिम समुदाय को जानबूझकर टारगेट करना है। उन्होंने तर्क दिया कि अन्य धर्मों के बड़े सार्वजनिक आयोजनों पर कोई रोक नहीं है।
अबू आजमी ने वंदे मातरम पर क्या स्पष्ट किया?
आजमी ने कहा कि वे वंदे मातरम के विरोधी नहीं हैं और सम्मान में खड़े होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक कारणों से कुछ मुसलमान इसे नहीं गाते, लेकिन जो गाते हैं उनसे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
बांग्लादेशी घुसपैठ पर आजमी की क्या राय है?
आजमी ने कहा कि मतदाता सूची में किसी बांग्लादेशी का नाम नहीं होना चाहिए और यह सबकी ज़िम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बांग्लादेशी सीमा पार करके आ कैसे रहे हैं, और आरोप लगाया कि इस मुद्दे का इस्तेमाल केवल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
अबू आजमी कौन हैं और किस पार्टी से हैं?
अबू आजमी समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ विधायक हैं और मुंबई की राजनीति में एक प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में जाने जाते हैं। वे अक्सर अल्पसंख्यक अधिकारों और केंद्र सरकार की नीतियों पर मुखर रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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