सिक्किम CM प्रेम सिंह तमांग पैदल पहुंचे मनन केंद्र, मोटरकेड में 50% कटौती का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने 18 मई 2025 को अपने आधिकारिक आवास मिंटोकगांग से मनन केंद्र तक करीब 14 मिनट पैदल चलकर एक सरकारी कार्यक्रम में शिरकत की। ईंधन संरक्षण और जिम्मेदार प्रशासन का यह प्रत्यक्ष संदेश राज्य सरकार के नए 'सेव फ्यूल अभियान' के औपचारिक आगाज़ के साथ आया है।
मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत उदाहरण
तमांग ने आधिकारिक काफिले का उपयोग न करते हुए पैदल जाने का निर्णय इसलिए लिया ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ईंधन बचत की शुरुआत नेतृत्व के आचरण से होती है, न कि केवल प्रशासनिक आदेशों से। यह पहली बार नहीं है — इससे पहले भी वे 'सिक्किम कलाकार भरोसा सम्मेलन' में पैदल पहुंचे थे और रास्ते में नागरिकों से सीधा संवाद किया था। सरकार ने इसे महज प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि जनता के लिए प्रेरणादायक संदेश करार दिया है।
सेव फ्यूल अभियान: मुख्य प्रावधान
राज्य सरकार ने इस अभियान के तहत मुख्यमंत्री के मोटरकेड में 50 प्रतिशत की कटौती का फैसला लिया है। इसके साथ ही सरकारी और निजी वाहनों के लिए ऑड-ईवन व्यवस्था लागू की जाएगी, हालांकि टैक्सी और आपातकालीन सेवाओं को इससे अलग रखा गया है।
गृह विभाग ने 14 मई 2025 को ही इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी थी। सभी सरकारी विभागों, स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य संस्थानों को ईंधन खपत घटाने और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए दिशानिर्देश
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, अनावश्यक वाहन संचालन से बचने और वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। नज़दीकी कार्यक्रमों और बैठकों के लिए पैदल जाने को प्रोत्साहित किया गया है।
व्यापक संदर्भ
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुशासित प्रशासन और सार्वजनिक संसाधनों के कुशल उपयोग की अपील के अनुरूप मानी जा रही है। यह ऐसे समय में आई है जब देशभर में राज्य सरकारों पर राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का दबाव है। गौरतलब है कि सिक्किम जैसे छोटे पहाड़ी राज्यों में ईंधन की लागत और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियाँ अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।
आगे क्या
राज्य सरकार का कहना है कि इन उपायों का दीर्घकालिक उद्देश्य प्रशासन में जवाबदेही, अनुशासन और संसाधन-कुशलता को संस्थागत रूप देना है। ऑड-ईवन व्यवस्था के क्रियान्वयन की समयसीमा और निगरानी तंत्र के विवरण की प्रतीक्षा है।