त्रिपुरा: मोदी की ईंधन बचाओ अपील पर सीएम माणिक साहा ने काफिला 50% घटाया, मंत्रियों ने साइकिल थामी

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त्रिपुरा: मोदी की ईंधन बचाओ अपील पर सीएम माणिक साहा ने काफिला 50% घटाया, मंत्रियों ने साइकिल थामी

सारांश

पीएम मोदी की ईंधन बचाओ अपील के बाद त्रिपुरा में प्रतीकात्मक लेकिन ठोस कदम — सीएम माणिक साहा का काफिला आधा हुआ, एक वरिष्ठ मंत्री साइकिल पर दफ्तर पहुँचे। सवाल यह है कि क्या यह बदलाव सिर्फ सुर्खियों तक सीमित रहेगा या नीतिगत स्तर पर टिकेगा।

मुख्य बातें

सीएम माणिक साहा ने गुरुवार, 15 मई से अपना सुरक्षा काफिला 8 वाहनों से घटाकर 4 कर दिया — 50% की कटौती।
मंत्री रतन लाल नाथ ने बुधवार से एस्कॉर्ट गाड़ी छोड़कर साइकिल और ऑटो-रिक्शा से दफ्तर जाना शुरू किया।
मंत्री सुशांत चौधरी ने एस्कॉर्ट वाहन 4 से घटाकर 2 किए; वैश्विक ऊर्जा संकट कम होने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी।
मंत्री अनिमेष देबबर्मा ने काफिला छोटा किया और अपने सभी विभागों को भी ऐसे निर्देश दिए।
पीएम मोदी ने पिछले सप्ताह हैदराबाद में ईंधन बचाने, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की अपील की थी।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गुरुवार, 15 मई 2025 से अपने सुरक्षा काफिले में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है — यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन खपत घटाने और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील के सीधे जवाब में उठाया गया है। अगरतला में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले काफिले में मुख्यमंत्री की सरकारी गाड़ी सहित कम से कम आठ वाहन शामिल होते थे, जिन्हें अब घटाकर चार कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री का रुख और सुरक्षा की शर्त

मुख्यमंत्री साहा ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया था कि वे व्यक्तिगत रूप से काफिले में वाहनों की संख्या घटाने के पक्ष में हैं, बशर्ते सुरक्षा से कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा, 'अगर सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या नहीं है, तो हमें वाहनों की संख्या कम करने पर कोई आपत्ति नहीं है, और ऐसा किया भी जाना चाहिए। मैं हमेशा कम वाहन और सुरक्षाकर्मी इस्तेमाल करना चाहता था, लेकिन पुलिस अधिकारी इसकी इजाजत नहीं दे रहे थे।' इसके बाद उन्होंने पुलिस महानिदेशक अनुराग के साथ विचार-विमर्श कर गुरुवार से यह फैसला लागू कर दिया।

मंत्री रतन लाल नाथ ने थामी साइकिल

बिजली, कृषि और संसदीय मामलों के मंत्री रतन लाल नाथ — जो राज्य मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ पद पर हैं — ने बुधवार को अगरतला के कैपिटल कॉम्प्लेक्स स्थित सिविल सचिवालय में अपने दफ्तर जाने और आस-पास के कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए साइकिल और ऑटो-रिक्शा का उपयोग किया। एक सोशल मीडिया पोस्ट में नाथ ने कहा कि उन्होंने अपनी एस्कॉर्ट गाड़ी का इस्तेमाल बंद कर दिया है और छोटी दूरी की यात्राओं के लिए जहाँ तक हो सके साइकिल का उपयोग जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि सुबह की ताजी हवा में साइकिल चलाना एक यादगार अनुभव रहा और इससे उन्हें आम नागरिकों से सीधे जुड़ने का अवसर मिला।

अन्य मंत्रियों के कदम

खाद्य, नागरिक आपूर्ति और परिवहन मंत्री सुशांत चौधरी ने गुरुवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घोषणा की कि उन्होंने अपनी सुरक्षा एस्कॉर्ट वाहनों की संख्या चार से घटाकर दो कर दी है — और यह व्यवस्था वैश्विक ऊर्जा संकट कम होने तक जारी रहेगी। इसी दिन चौधरी ने सिविल सचिवालय में एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता भी की, जिसमें मध्य पूर्व में जारी तनाव के मद्देनजर राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विचार किया गया। बैठक में बताया गया कि आवश्यक ईंधन की उपलब्धता में किसी भी रुकावट को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री अनिमेष देबबर्मा ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि उन्होंने अपने आधिकारिक काफिले का आकार छोटा कर दिया है और अपने अधीन सभी विभागों को भी इसी दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

पीएम मोदी की अपील की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह हैदराबाद की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से ईंधन पर निर्भरता घटाने, मेट्रो सेवाओं और कारपूलिंग जैसे सार्वजनिक परिवहन विकल्पों को अपनाने की अपील की थी। उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के संदर्भ में इलेक्ट्रिक वाहनों के अधिक उपयोग, सोने की खरीद में कमी और विदेश यात्राओं के स्थान पर घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया था। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया और आगे की राह

त्रिपुरा से पहले भी अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था और विदेश यात्रा सहित कई मदों में खर्च घटाने की घोषणाएँ की हैं। मंत्री नाथ ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे ईंधन बचाने, प्रकृति की रक्षा करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य बनाने के प्रति जागरूक बनें। यह देखना बाकी है कि प्रतीकात्मक कदमों से आगे बढ़कर ये नीतिगत बदलाव कितने दीर्घकालिक साबित होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये कदम किसी संस्थागत नीति में बदलेंगे या अगले समाचार चक्र के साथ भुला दिए जाएँगे। मध्य पूर्व संकट के बहाने ईंधन बचत की अपील करना एक राजनीतिक संदेश भी है — लेकिन भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता को देखते हुए, इस तरह के व्यक्तिगत संकल्पों का समग्र प्रभाव सीमित होगा जब तक कि नीतिगत ढाँचा — सार्वजनिक परिवहन में निवेश, ईवी अवसंरचना, ईंधन सब्सिडी सुधार — मजबूत न हो। मुख्यमंत्री का यह स्वीकार करना कि वे पहले से कम वाहन चाहते थे लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी, एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक विरोधाभास उजागर करता है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा ने अपना काफिला कितना छोटा किया?
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गुरुवार, 15 मई से अपने सुरक्षा काफिले में 50 प्रतिशत की कटौती की — पहले के 8 वाहनों की जगह अब केवल 4 वाहन काफिले में शामिल हैं। यह कदम पीएम मोदी की ईंधन बचाने की अपील के जवाब में उठाया गया।
पीएम मोदी ने ईंधन बचाने की अपील कब और कहाँ की थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह हैदराबाद की यात्रा के दौरान नागरिकों से ईंधन पर निर्भरता घटाने, मेट्रो और कारपूलिंग जैसे सार्वजनिक परिवहन अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की थी। यह अपील पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में की गई।
मंत्री रतन लाल नाथ ने ईंधन बचाने के लिए क्या किया?
बिजली, कृषि और संसदीय मामलों के मंत्री रतन लाल नाथ ने बुधवार से अपनी सरकारी एस्कॉर्ट गाड़ी का उपयोग बंद कर दिया और अगरतला के सिविल सचिवालय जाने के लिए साइकिल व ऑटो-रिक्शा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि छोटी दूरी की यात्राओं के लिए वे आगे भी साइकिल का उपयोग जारी रखेंगे।
त्रिपुरा में ईंधन आपूर्ति की स्थिति क्या है?
मंत्री सुशांत चौधरी ने गुरुवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की जिसमें मध्य पूर्व की स्थिति के मद्देनजर राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विचार हुआ। बैठक में बताया गया कि आवश्यक ईंधन की उपलब्धता में किसी भी रुकावट को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
क्या अन्य राज्यों ने भी ऐसे कदम उठाए हैं?
हाँ, त्रिपुरा से पहले भी अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था और विदेश यात्रा सहित कई क्षेत्रों में खर्च कटौती की घोषणाएँ की हैं। यह एक व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्ति का हिस्सा है जो पीएम मोदी की अपील के बाद सामने आई है।
राष्ट्र प्रेस
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