त्रिपुरा में 1,08,281 महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी', CM माणिक साहा ने गिनाई SHG की उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने 18 मई 2026 को अगरतला के रवींद्र शताब्दी भवन में स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों की एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के राजनीतिक और आर्थिक सशक्तिकरण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है। यह कार्यक्रम त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन (TRLM) द्वारा आयोजित किया गया था, जो राज्य में SHG गतिविधियों की नोडल एजेंसी है।
त्रिपुरा में SHG का विस्तार
मुख्यमंत्री साहा ने बताया कि राज्य के ग्रामीण और आंतरिक क्षेत्रों में 55,569 स्वयं सहायता समूहों से 49 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र है, जिससे महिला नेतृत्व वाले ये समूह राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते जा रहे हैं। साहा ने यह भी बताया कि जीएसडीपी (GSDP) के मामले में त्रिपुरा पूर्वोत्तर राज्यों में दूसरे स्थान पर है।
लखपति दीदी: आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल
साहा ने बताया कि SHG से जुड़ी 4.95 लाख महिला सदस्यों में से 1,08,281 महिलाएं विभिन्न उद्यमशीलता गतिविधियों में सक्रिय होकर 'लखपति दीदी' के रूप में उभरी हैं। 'लखपति दीदी' वह SHG सदस्य होती है जिसकी वार्षिक पारिवारिक आय ₹1 लाख से अधिक हो जाती है। यह आँकड़ा राज्य में ज़मीनी स्तर पर महिला उद्यमिता के विस्तार को दर्शाता है।
वित्तीय सहायता और सरकारी निवेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न बैंकों ने SHG को आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए ₹2,389 करोड़ के ऋण प्रदान किए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने परिचालित और सामुदायिक निवेश निधि के रूप में ₹837 करोड़ उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 80 अंतर्राष्ट्रीय वित्त परियोजनाओं के तहत ₹32 करोड़ के निवेश से गतिविधियाँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं।
कृषि और आजीविका केंद्र
साहा ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप SHG सदस्यों के लिए एकीकृत कृषि क्लस्टर (IFC) दृष्टिकोण तैयार किया गया है। औसतन 250 से 300 छोटे और सीमांत किसानों को आजीविका सेवा केंद्रों से जोड़ा गया है, जो गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ बेहतर बाज़ार पहुँच भी प्रदान करते हैं।
समृद्धि कार्यक्रम और विकसित त्रिपुरा का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए समृद्धि 1.0 और समृद्धि 2.0 कार्यक्रम सफलतापूर्वक लागू किए जा चुके हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि 2047 तक विकसित भारत और विकसित त्रिपुरा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पुरुषों और महिलाओं दोनों के संयुक्त प्रयास अनिवार्य हैं। यह कार्यक्रम राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।