महिला सशक्तिकरण पर उपराष्ट्रपति का संदेश: स्वयं सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण
सारांश
Key Takeaways
- महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को सराहा गया।
- महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक बदलाव।
- उपरोक्त विकास से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- उपराष्ट्रपति का समर्थन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
- स्थानीय उत्पादों का समर्थन और उनकी गुणवत्ता को सराहा गया।
अगरतला, 8 मार्च (राष्ट्रीय संवाद)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हापानिया में इंटरनेशनल ट्रेन और फेयर सेंटर में महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की सदस्यों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने जमीनी स्तर पर विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण में इन समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले एक दशक में भारत में महिलाओं की भूमिका में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। देश अब केवल महिला विकास की अवधारणा से आगे बढ़कर महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में बढ़ चुका है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है, जो देश की प्रगति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में कई लखपति दीदी आगे बढ़कर करोड़पति दीदी बनेंगी, जिससे न केवल उनके परिवार बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इस कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं मेला केंद्र में स्थापित महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का दौरा किया। यहां, उन्हें त्रिपुरा के विभिन्न जिलों से आए एसएचजी समूहों द्वारा प्रदर्शित स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने इन उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम में इंद्रसेन रेड्डी नल्लू, माणिक साहा और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने महिला स्वयं सहायता समूहों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इससे पहले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "इंटरनेशनल विमेंस डे पर हम उन महिलाओं की ताकत, हिम्मत और कामयाबियों का जश्न मनाते हैं जो हमारे परिवारों, समाज और हमारे देश की किस्मत को आकार देती रहती हैं। भारत के लंबे और शानदार इतिहास में हमारी पुरानी ज्ञान परंपराओं की रखवाली करने वाली से लेकर हमारे आजादी के आंदोलन के बहादुर नेताओं और आधुनिक भारत की तरक्की की अगुआ तक, महिलाएं हिम्मत, समझदारी और दया की मिसाल रही हैं। आज, महिलाएं विज्ञान, शिक्षा, उद्यमिता, शासन, रक्षा, खेल और अंतरिक्ष जैसे हर क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही हैं, और भारत को एक मजबूत, सबको साथ लेकर चलने वाला और विकसित देश बनाने की दिशा में बहुत बड़ा योगदान दे रही हैं। हम एक ऐसा समाज बनाते रहें जहां हर लड़की आज़ादी से सपने देख सके और हर महिला अपनी पूरी काबिलियत को पहचान सके। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं को दिल से बधाई और शुभकामनाएं।"