राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नारी शक्ति की श्रेष्ठता पर की चर्चा

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नारी शक्ति की श्रेष्ठता पर की चर्चा

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'भारती: नारी से नारायणी' सम्मेलन में नारी शक्ति की भूमिका और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं के योगदान और सशक्तीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य बातें

महिलाएं हर क्षेत्र में योगदान दे रही हैं।
समानता के बिना समाज की प्रगति संभव नहीं।
महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए प्रयास करने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में विचार-विमर्श का आयोजन किया गया है।
राष्ट्रपति भवन में विशेष पुस्तकालय की शुरुआत की गई है।

नई दिल्ली, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित 'भारती: नारी से नारायणी' राष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन रविवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में विभिन्न पैनल चर्चाओं के साथ जारी है। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वैदिक काल में ब्रह्मवादिनी महिलाओं की ताकत से लेकर आधुनिक युग की महान महिलाओं जैसे रानी दुर्गावती, वीरमाता जीजाबाई, रानी चेन्नम्मा, लक्ष्मीबाई, झलकारीबाई और देवी अहिल्याबाई होल्कर का साहस और बुद्धिमत्ता समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, विशेषकर महिलाओं के लिए।

उन्होंने कहा कि सेवा, समर्पण, राष्ट्रीयता, वीरता, धैर्य और प्रतिभा के क्षेत्रों में नारी-शक्ति पुरुषों के बराबर या उनसे भी आगे है।

राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं, खेतों से लेकर अंतरिक्ष तक और स्वरोजगार से लेकर सेनाओं तक, हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। खेल के क्षेत्र में हमारी बेटियों ने वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित किए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मानव समाज की प्रगति तभी संभव है जब दोनों पहिए, अर्थात महिलाएं और पुरुष, समान और समन्वित हों।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश की तेजी से प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी बेटियों को ऊंचे सपने देखने के लिए प्रेरित करें और उनके सपनों को साकार करने में हर कदम पर मदद करें। महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद, अभी भी कई बाधाएं मौजूद हैं।

उन्होंने सभी देशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह अवसर नारी शक्ति की उपलब्धियों का सम्मान करने और उनके सशक्तीकरण के लिए संकल्प लेने का है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस बार बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में एक विशेष पुस्तकालय की शुरुआत की गई है। यहां भारत की शास्त्रीय भाषा में पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। राष्ट्रपति भवन के द्वार सभी के लिए खुले हैं। मैं आपसे निवेदन करती हूं कि नारी शक्ति से जुड़े प्रेरणाओं को याद करें।

सम्मेलन में देशभर से आई महिला विद्वानों एवं सामाजिक नेतृत्व से जुड़ी महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण के भारतीय दृष्टिकोण पर अपने विचार साझा किए हैं। दो दिवसीय इस सम्मेलन में विद्या, शक्ति, चेतना और संस्कृति जैसे प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श हो रहा है। यह कार्यक्रम भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और शरण्या द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज की प्रगति के लिए भी आवश्यक है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सम्मेलन में क्या कहा?
राष्ट्रपति ने नारी शक्ति की भूमिका और उनके योगदान पर जोर दिया, साथ ही समानता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य क्या है?
सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तीकरण और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना है।
राष्ट्र प्रेस
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