महिलाएं न केवल परंपरा की, बल्कि परिवर्तन की भी संवाहक: सीएम रेखा गुप्ता
सारांश
Key Takeaways
- महिलाएं न केवल परंपरा की, बल्कि परिवर्तन की भी वाहिकाएं हैं।
- सशक्तिकरण के लिए लक्ष्यों का स्वयं निर्धारण आवश्यक है।
- लखपति बिटिया योजना बेटियों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है।
- महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है।
- महिला विचारकों का सम्मेलन महत्वपूर्ण विमर्श का मंच है।
नई दिल्ली, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत की महिलाएं न केवल परंपरा की वाहिकाएं हैं, बल्कि परिवर्तन की भी हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विज्ञान भवन में महिला विचारकों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन भारती- नारी से नारायणी के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। यह सम्मेलन 8 मार्च तक चलेगा, जिसका समापन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी। सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और स्वयंसेवी संस्था शरण्या ने किया है।
रेखा गुप्ता ने कहा कि निर्णय लेने की क्षमता, साहस और मेहनत का कोई जेंडर नहीं होता। आज हर क्षेत्र में भारतीय महिलाएं पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं ने अपने लक्ष्यों को खुद तय करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और देश की अपेक्षाओं को पूरा करना महत्वपूर्ण है, लेकिन अपने मन की खुशी के लिए भी महिलाओं को कुछ समय निकालना चाहिए। पूरे परिवार की सेहत का ध्यान रखते हुए, महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने माताओं से अपील की कि जो अवसर उन्हें नहीं मिला, वह अपनी बेटियों को दें और उन्हें उड़ने के लिए खुला आकाश प्रदान करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं, यदि वे अपने लक्ष्यों को स्वयं निर्धारित करें। रेखा गुप्ता ने कहा कि इस सभागार में उपस्थित महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान देख रही हैं। उच्च पदों पर आसीन महिलाओं को अन्य महिलाओं को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनकी सरकार ने बेटियों को सशक्त बनाने के लिए लखपति बिटिया योजना लागू की है। पहले केवल 10वीं कक्षा पास करने तक ही दिल्ली की बेटियों को आर्थिक सहायता मिलती थी, लेकिन अब स्नातक करने पर लगभग सवा लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, महिलाओं को रात में भी काम करने की अनुमति दी गई है, जो पहले प्रतिबंधित था। महिलाओं के उत्थान के लिए मुख्यमंत्री ने राष्ट्र सेविका समिति की सराहना की।
समारोह की अध्यक्ष वी. शांता कुमारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत महत्व दिया गया है। नारी समाज को धारण करने वाली सुदृढ़ शक्ति है, इसलिए वह नारायणी बन सकती है। उन्होंने कहा कि मंगलाचरण या वेदों का अध्ययन हो या फिर ऑपरेशन सिंदूर, भारत की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अद्वितीय शौर्य का परिचय दिया है।
शांता कुमारी ने कहा कि इस सम्मेलन में हो रहे विचार-विमर्श से निकलने वाली अमृत धारा को देशभर में प्रसारित करना और सही विमर्श स्थापित करना कार्यक्रम का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टि से होने वाले चिंतन को कृति रूप में स्थापित करना आवश्यक है।
उद्घाटन समारोह में भारतीय विद्वत परिषद की सचिव शिवानी वी. ने कहा कि नारी से नारायणी एक पवित्र यात्रा है। लोग अक्सर नारी के सशक्तीकरण की बात करते हैं, लेकिन नारी स्वयं में ऊर्जा और शक्ति का स्रोत है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में हर नारी सशक्तीकरण की बात करने नहीं, बल्कि अपनी शक्ति को जागृत कर आत्म-बोध के लिए आई है।
शिवानी ने कहा कि भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी हैं। वे समस्या नहीं, बल्कि ‘अल्टीमेट सॉल्वर’ हैं। उन्होंने महिलाओं को उचित सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में मिलने वाले सुझाव भारत सरकार के संबंधित विभागों को भेजे जाएंगे।
समारोह में शरण्या की अध्यक्ष अंजू आहूजा, अदम्य चेतना की मैनेजिंग ट्रस्टी तेजस्विनी अनंत कुमार, राष्ट्र सेविका समिति की विजया शर्मा और चारु कालरा ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। इस दो दिवसीय सम्मेलन में आठ विषयों पर गंभीर चर्चा की जा रही है। इस दौरान महिला सांसदों, वाइस चांसलरों और साध्वियों के विशेष पैनल भी चर्चा करेंगे।