महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में 'नारी से नारायणी' मंच की भूमिका: डॉ. रेणुका बोकारे

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महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में 'नारी से नारायणी' मंच की भूमिका: डॉ. रेणुका बोकारे

सारांश

दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित सम्मेलन में डॉ. रेणुका बोकारे ने महिलाओं की शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने 'नारी से नारायणी' मंच के उद्देश्यों को साझा करते हुए आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की आवश्यकता की बात की।

Key Takeaways

  • महिलाओं की शिक्षा देश के विकास का आधार है।
  • 'नारी से नारायणी' का उद्देश्य हर महिला को आत्मनिर्भर बनाना है।
  • महिलाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए समर्थन की आवश्यकता है।
  • बेटियों के लिए सरकारी पहल महत्वपूर्ण हैं।
  • महिलाओं का विकास देश के विकास से जुड़ा हुआ है।

नई दिल्ली, ७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के विज्ञान भवन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में भारत की कई प्रमुख और उच्च पदों पर आसीन महिलाओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय की डॉ. रेणुका बोकारे ने महिलाओं की शिक्षा को देश के विकास का आधार बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने सपनों को खुलकर देखने और उन्हें पूरा करने के लिए समर्थन दिया जाना चाहिए।

डॉ. बोकारे ने कहा, "नारी से नारायणी का उद्देश्य हर भारतीय महिला को सशक्त बनाना है। हम चाहते हैं कि हर महिला आत्मनिर्भर बने और अपने सपनों को अपने बलबूते पर पूरा कर सके। इस कार्यक्रम का एक और लक्ष्य महिलाओं को भारत से जोड़ना है। इससे न केवल महिलाओं का विकास होगा, बल्कि देश को भी नए आयाम मिलेंगे, और यह संभव नहीं है बिना महिलाओं के।"

उन्होंने आगे कहा कि देश के हर राज्य से महिलाओं का जुड़ना अत्यंत आवश्यक है। सभी महिलाएं अलग-अलग राज्यों से आती हैं, लेकिन उनके गुण, स्वभाव और भावनाएं समान होती हैं। भारतीय महिलाएं पहले अपने परिवार और फिर अपने सपनों के बारे में सोचती हैं। इस संदर्भ में उनके सपनों को उड़ान देने के लिए हमारा मंच कार्य करता है।

सरकार द्वारा बेटियों के लिए शुरू की गई पहलों की सराहना करते हुए डॉ. बोकारे ने कहा, "दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कहा है कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के साथ अब हम 'बेटी बढ़ाओ' के स्तर तक पहुँच गए हैं। हमारा विशेष कदम बेटियों को आगे बढ़ाने का है। मैं सभी से अनुरोध करती हूँ कि बेटियों को केवल शक्ति और लक्ष्मी कहकर सीमित न करें, बल्कि उन्हें शिक्षा और कौशल के माध्यम से सशक्त बनाएं। लड़कियों को सपने देखने दें और उन सपनों को पूरा करने में उनकी सहायता करें। वे आत्मनिर्भर हैं, लेकिन उन्हें परिवार और समाज का समर्थन भी आवश्यक है।"

सावित्री बाई फूले और ज्योतिबा फूले के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "हमारे समाजसेवियों ने हमेशा महिलाओं की शिक्षा के लिए समर्थन किया है, और इतिहास में महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की है।"

Point of View

NationPress
07/03/2026

Frequently Asked Questions

नारी से नारायणी मंच का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस मंच का मुख्य उद्देश्य हर भारतीय महिला को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।
डॉ. रेणुका बोकारे ने महिलाओं की शिक्षा पर क्या कहा?
उन्होंने महिलाओं की शिक्षा को देश के विकास का आधार बताया और सपने देखने के लिए समर्थन देने पर जोर दिया।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
सरकार की विभिन्न पहलों के जरिए बेटियों को शिक्षा और कौशल प्रदान करके सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का क्या महत्व है?
यह पहल बेटियों के संरक्षण और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
महिलाओं की शिक्षा के लिए समाज में क्या बदलाव लाने की आवश्यकता है?
महिलाओं को शिक्षा और कौशल के माध्यम से सशक्त बनाना और उन्हें सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
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