महिलाओं की शक्ति: नारी से नारायणी कार्यक्रम में शिक्षा में भागेदारी बढ़ाने पर जोर

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महिलाओं की शक्ति: नारी से नारायणी कार्यक्रम में शिक्षा में भागेदारी बढ़ाने पर जोर

सारांश

दिल्ली में नारी से नारायणी कार्यक्रम में शिक्षित महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने महिला शक्ति को पहचानने और उनके विकास की संभावनाओं पर जोर दिया।

Key Takeaways

  • महिलाओं का विकास आवश्यक है।
  • शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ानी होगी।
  • आंतरिक शक्ति
  • कौशल विकास पर ध्यान देना चाहिए।
  • सामाजिक उत्थान में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 8 मार्च को देशभर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की तैयारी है, लेकिन इसके पहले दिल्ली के विज्ञान भवन में नारी से नारायणी नामक दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख और अनुभवी महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में आदि फाउंडेशन के सह-संस्थापक अमानत लक्ष्मी नारायण, राष्ट्र सेविका समिति की मुख्य संयोजिका शांता कुमारी और प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार शामिल हुए। इन्होंने सभी वर्गों की महिलाओं की चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर चर्चा की।

राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख शांता कुमारी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "महिलाएं शक्ति का प्रतीक हैं। यह मान्यता वैदिक काल से रही है। महिलाओं के पास आंतरिक शक्ति है, जिससे वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, वैदिक काल से लेकर आज तक, महिलाओं ने ऑपरेशन सिंदूर जैसी गंभीर स्थितियों में नेतृत्व दिखाया है। इसलिए हम इसे महिला शक्ति का स्वरूप मानते हैं। महिलाएं अपनी जड़ों से जुड़े रहकर परिवार और समाज का उत्थान करती हैं।"

प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अभी भी पुरुषों की तुलना में कम है। इस बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि कैसे महिलाओं की शिक्षा में भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। हमारा उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि कौशल विकास भी है।

लक्ष्मी नारायण ने कहा, "मैं इस महिला सम्मेलन का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं। जब विद्या को पंचकोष विकास पर केंद्रित रूप से प्रदान किया जाता है, तो अधिक महिलाएं इसमें भाग ले सकती हैं। शिक्षा में शारीरिक, भावनात्मक, संज्ञानात्मक और सौंदर्य संबंधी पहलुओं को शामिल करना चाहिए। पैनल ने लड़कियों की प्रारंभिक शिक्षा पर ध्यान देने की बात की, ताकि उनका मानसिक विकास तेजी से हो सके।"

कार्यक्रम में शामिल प्रो. शशिकला वंजारी ने कहा कि इस कार्यक्रम की संकल्पना आठ तथ्यों पर आधारित है। महिलाएं घर तक सीमित हैं, और हमारा उद्देश्य विकसित भारत में महिलाओं के विकास के साथ-साथ देश के विकास में भी योगदान देना है।

Point of View

बल्कि उन्हें सशक्त बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर भी चर्चा की। यह वार्ता नारी शक्ति के महत्व को दर्शाती है और समाज में उनकी भूमिका को पुनः परिभाषित करती है।
NationPress
07/03/2026

Frequently Asked Questions

नारी से नारायणी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की शिक्षा और विकास की दिशा में चर्चा करना और उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना है।
कौन-कौन से प्रमुख वक्ता इस कार्यक्रम में शामिल हुए?
कार्यक्रम में अमानत लक्ष्मी नारायण, शांता कुमारी और प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार शामिल हुए।
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