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महिलाओं का महत्त्व: हर नारी है नारायणी, शांताकुमारी का संदेश

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महिलाओं का महत्त्व: हर नारी है नारायणी, शांताकुमारी का संदेश

सारांश

महिलाओं के महत्व को उजागर करने वाले दो दिवसीय राष्ट्रीय विचारक सम्मेलन में शांताकुमारी ने कहा कि विचारों को व्यवहार में लाना आवश्यक है।

मुख्य बातें

महिलाओं का महत्व: भारतीय संस्कृति में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
विचारों का व्यवहार में उतारना: केवल चर्चा करना ही पर्याप्त नहीं है, विचारों को जीवन में लागू करना जरूरी है।
नेतृत्व क्षमता: महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानकर समाज में नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
सकारात्मक व्यवहार: महिलाओं का व्यवहार समाज को प्रेरित करने वाला होना चाहिए।
सुरक्षित भारत: महिलाओं की जिम्मेदारी से एक सुरक्षित और विकसित भारत का सपना पूरा किया जा सकता है।

नई दिल्ली, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में 'भारती: नारी से नारायणी' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला विचारक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से महिला विचारक, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

सम्मेलन के दूसरे दिन, राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांताकुमारी ने अपने संबोधन में कहा, "इस प्रकार के विचारक सम्मेलनों में जो चर्चा होती है, उसका असली महत्व तभी प्रकट होता है जब उन विचारों को व्यावहारिक जीवन में उतारा जाए। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण संकल्प लिए गए हैं और समाज के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई है। यदि इन विचारों को केवल मंच तक सीमित रखा जाए, तो समाज को उनका पूरा लाभ नहीं मिल सकेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि इन अमूल्य विचारों को हर व्यक्ति अपने व्यवहार और जीवन में लागू करे।"

उन्होंने भारतीय संस्कृति में महिलाओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "भारतीय समाज में महिलाओं का बहुत बड़ा महत्व है। हम सभी मानते हैं और कहते हैं कि हर नारी नारायणी है। हम उन्हें नारायणी क्यों कहते हैं?... जब एक महिला शुद्ध चेतना और सकारात्मक सोच के साथ समाज की जिम्मेदारी निभाती है, तो वह केवल नारी नहीं रहती, बल्कि नारायणी बन जाती है। जब एक साधारण माता अपने कर्तव्यों और संस्कारों के माध्यम से समाज को दिशा देती है, तो वह श्री माता के रूप में सम्मानित होती है। जब महिलाएं अपने गुणों और नेतृत्व क्षमता के साथ समाज में उपस्थित होती हैं, तो उन्हें अपने आप सम्मान मिलता है।"

आगे उन्होंने कहा, "समाज से सम्मान मांगने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि व्यक्ति का आचरण और उसका कार्य ही उसे सम्मान दिलाता है। यदि महिलाएं अपनी क्षमता को समझें और अपने व्यक्तित्व को सशक्त बनाएं, तो समाज स्वतः उन्हें नेतृत्व की भूमिका सौंपने लगता है। महिलाओं का व्यवहार ऐसा होना चाहिए जो समाज को प्रेरित करे और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित करे। जब महिलाएं अपनी शक्ति और योग्यता को पहचानकर आगे बढ़ती हैं, तो वे पूरे समाज को भी प्रेरित करती हैं।"

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में, लीना रहाणे ने कहा कि 'नारी से नारायणी' का विचार महिलाओं की गरिमा और गर्व को जागृत करता है। उन्होंने कहा कि आज जितनी भी नीतियां और प्रयास महिला शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किए जा रहे हैं, उन्हें इस प्रकार से लागू किया जाना चाहिए कि समाज की सभी महिलाएं इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।"

उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित सभी सत्रों का उद्देश्य यह है कि भारत का विकास महिलाओं के नेतृत्व में हो और पीएम मोदी के विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। महिलाएं अपनी शक्ति को पहचानें और केवल अपने परिवार की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी लें। इससे समाज में एक सकारात्मक वातावरण बनेगा और एक सुरक्षित तथा विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो समाज के विकास में सहायक साबित हो सकते हैं। महिलाओं को सशक्त करने के लिए उनके व्यवहार और नेतृत्व क्षमता पर जोर दिया गया।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व क्या है?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों को मान्यता देने और लैंगिक समानता के लिए जागरूकता बढ़ाने का अवसर है।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
महिला शिक्षा, स्वास्थ्य, और नेतृत्व में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए कई नीतियाँ और कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
शांताकुमारी ने क्या कहा?
उन्होंने महिलाओं के महत्व और उनके विचारों को व्यवहार में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
'नारी से नारायणी' का क्या अर्थ है?
'नारी से नारायणी' का अर्थ है कि जब महिलाएं अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं, तो वे नारायणी बन जाती हैं।
इस प्रकार के सम्मेलन का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य महिलाओं के विचारों को साझा करना और समाज में उनके योगदान को बढ़ावा देना है।
राष्ट्र प्रेस
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