महिलाएं: समाज की नींव और राष्ट्र की भविष्य निर्माता - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

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महिलाएं: समाज की नींव और राष्ट्र की भविष्य निर्माता - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

सारांश

महिलाओं की भूमिका भारतीय समाज और राष्ट्र की प्रगति में अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षित और आत्मनिर्भर महिलाएं देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत हैं।

Key Takeaways

  • महिलाओं की सशक्तिकरण समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है।
  • शिक्षा और स्वतंत्रता महिलाओं के विकास में महत्वपूर्ण हैं।
  • महिलाएं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
  • भारतीय परंपरा में नारी को शक्ति और ज्ञान का प्रतीक माना गया है।
  • सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं को एक मंच पर लाना है।

नई दिल्ली, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बताया कि भारतीय समाज और राष्ट्र की उन्नति में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त महिलाएं किसी भी देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि एक राष्ट्र पिता और राष्ट्र माता है।

राष्ट्रपति ने अपने विचार नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित महिला विचारकों के राष्ट्रीय सम्मेलन 'भारती-नारी से नारायणी' के समापन सत्र में व्यक्त किए। इस सम्मेलन का आयोजन सात और आठ मार्च को किया गया था, जिसमें देशभर से विभिन्न क्षेत्रों की महिला विचारक शामिल हुईं।

राष्ट्रपति ने बताया कि भारतीय परंपरा में नारी को केवल परिवार की संरक्षक नहीं, बल्कि ज्ञान, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। आज की महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल, उद्यमिता और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त कर रही हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि कोई भी समाज तब ही विकास कर सकता है जब महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा प्राप्त हो। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को निर्णय लेने की स्वतंत्रता, आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर और शिक्षा और रोजगार के समान अवसर प्राप्त करना आवश्यक है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्तमान में भारत में महिला नेतृत्व वाले विकास की अवधारणा तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने युवतियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को साकार करने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार, समाज और राष्ट्र सभी मजबूत बनते हैं। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की महिलाएं अपने ज्ञान, नेतृत्व और संवेदनशीलता के माध्यम से देश को प्रगति और समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

समापन समारोह में राष्ट्र सेविका समिति की मुख्य संचालिका वी. शांता कुमारी ने कहा कि महिलाओं को समाज का प्रोत्साहन स्वीकार करना चाहिए। क्षमता बढ़ाने से सम्मान हमें स्वयं ही प्राप्त हो जाता है। हमें ऐसा व्यवहार करना चाहिए कि समाज हमें प्रोत्साहन दे। उन्होंने कहा कि हमें भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़कर काम करना है।

इस मौके पर भारतीय विद्वत परिषद की सचिव शिवानी वी. ने सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की 'मौन शक्ति से निर्णायक शक्ति' तक की यात्रा को सशक्त बनाना है। इस सम्मेलन में लगभग 1500 महिला विचारकों ने भाग लिया और महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और समाज में महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और शरण्या संगठन ने किया। इसका मुख्य उद्देश्य देश की महिलाओं को एक मंच पर जोड़ना और महिला नेतृत्व वाले राष्ट्र निर्माण की दिशा में ठोस पहल करना है।

Point of View

बल्कि यह समाज में महिलाओं की भूमिका को भी उजागर करता है। यह विचारशीलता नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
10/03/2026

Frequently Asked Questions

महिलाओं की भूमिका पर राष्ट्रपति का क्या कहना है?
राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं समाज और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण हैं और सशक्त महिलाएं किसी भी देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत हैं।
यह सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित किया गया?
यह सम्मेलन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 7 और 8 मार्च को आयोजित किया गया।
महिलाओं को समान अवसर क्यों महत्वपूर्ण हैं?
समान अवसर से महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं और समाज में सकारात्मक योगदान दे सकती हैं।
महिलाओं के विकास के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?
महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, और निर्णय लेने की स्वतंत्रता जैसे अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।
सम्मेलन में कितनी महिला विचारकों ने भाग लिया?
इस सम्मेलन में लगभग 1500 महिला विचारकों ने भाग लिया।
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