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ओडिशा में उर्वरक कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई: 11,684 दुकानों पर छापे, 96 लाइसेंस रद्द

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ओडिशा में उर्वरक कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई: 11,684 दुकानों पर छापे, 96 लाइसेंस रद्द

सारांश

ओडिशा सरकार ने खरीफ 2026-27 में उर्वरक कालाबाजारी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान छेड़ा है — 11,684 दुकानों पर छापे, 96 लाइसेंस रद्द और 7 आपराधिक मामले। पिछले वर्ष की तुलना में कार्रवाई का दायरा करीब 30% बड़ा है।

मुख्य बातें

ओडिशा में खरीफ 2026-27 सीजन में 11,684 उर्वरक दुकानों पर छापेमारी की गई।
2,774 व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस, 321 डीलरों की बिक्री अस्थायी रूप से निलंबित।
170 डीलरों के लाइसेंस निलंबित, 96 डीलरों के लाइसेंस पूरी तरह रद्द।
12 दोषी डीलरों का उर्वरक भंडार जब्त; 7 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज।
पिछले वर्ष 2025-26 में 9,017 दुकानों पर छापे पड़े थे — इस वर्ष कार्रवाई का दायरा बड़ा।
किसानों को केवल अधिकृत दुकानों से नियंत्रित कीमतों पर उर्वरक खरीदने की सलाह।

ओडिशा सरकार ने खरीफ 2026-27 सीजन के दौरान राज्यभर में उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। चालू वित्तीय वर्ष में 11,684 उर्वरक दुकानों पर छापेमारी की जा चुकी है और सैकड़ों डीलरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। भुवनेश्वर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह अभियान 3 सितंबर 2026 तक जारी है।

अभियान की रूपरेखा और नेतृत्व

राज्य के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, जिनके पास कृषि और किसान सशक्तिकरण मंत्रालय का भी प्रभार है, ने उर्वरकों की कालाबाजारी और हेराफेरी से निपटने के लिए शून्य सहिष्णुता की रणनीति तैयार की है। इसके तहत जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष प्रवर्तन दस्ते गठित किए गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त निरीक्षण टीमें और हवाई दस्ते क्षेत्र में तैनात हैं। आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव के निर्देश पर थोक और खुदरा उर्वरक दुकानों पर नियमित छापे मारे जा रहे हैं।

मुख्य कार्रवाई के आँकड़े

चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 2,774 व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। 321 डीलरों की उर्वरक बिक्री अस्थायी रूप से निलंबित की गई है, जबकि 170 डीलरों के लाइसेंस निलंबित और 96 डीलरों के लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, 12 दोषी डीलरों के पास से उर्वरक का भंडार जब्त किया गया है और उनमें से 7 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। जहाँ भी अनियमितता पाई जाती है, वहाँ उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

पिछले वर्ष से तुलना

गौरतलब है कि पिछले वर्ष 2025-26 में 9,017 उर्वरक दुकानों पर छापे मारे गए थे। उस दौरान 2,373 व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस भेजे गए, 48 डीलरों की बिक्री रोकी गई और 53 डीलरों के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए। 15 डीलरों से उर्वरक भंडार जब्त हुआ और 9 लोगों के खिलाफ कानूनी मामले दर्ज हुए। इस वर्ष की कार्रवाई का दायरा पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बड़ा है।

किसानों के लिए सरकार का संदेश

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक बिक्री केंद्र पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत दुकानों से ही नियंत्रित कीमतों पर उर्वरक खरीदें।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि खरीफ सीजन के शेष महीनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा। प्रवर्तन दस्तों की निगरानी जारी रहेगी और दोषी पाए जाने वाले डीलरों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

684 छापों का यह आँकड़ा प्रभावशाली दिखता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई किसान तक पहुँचने वाली कीमतों को वास्तव में नियंत्रित कर पा रही है। पिछले वर्ष के 9,017 छापों के बावजूद इस वर्ष फिर बड़े अभियान की जरूरत पड़ी — यह संकेत देता है कि प्रणालीगत खामियाँ बरकरार हैं। जब तक आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और डिजिटल ट्रैकिंग नहीं आती, छापेमारी एक मौसमी अभ्यास बनकर रह जाएगी। दंडात्मक कार्रवाई ज़रूरी है, लेकिन पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा में उर्वरक कालाबाजारी पर क्या कार्रवाई हुई है?
ओडिशा सरकार ने खरीफ 2026-27 सीजन में 11,684 उर्वरक दुकानों पर छापे मारे हैं। 96 डीलरों के लाइसेंस रद्द, 170 के निलंबित और 7 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
ओडिशा में उर्वरक छापेमारी का नेतृत्व कौन कर रहा है?
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, जिनके पास कृषि और किसान सशक्तिकरण मंत्रालय का प्रभार है, इस शून्य सहिष्णुता अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव के निर्देश पर राजस्व, कृषि और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें छापेमारी कर रही हैं।
इस वर्ष की कार्रवाई पिछले वर्ष से कितनी अलग है?
2025-26 में 9,017 दुकानों पर छापे पड़े थे, जबकि इस वर्ष 2026-27 में यह संख्या 11,684 तक पहुँच गई है। लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक मामले दर्ज करने की दर भी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
किसानों को उर्वरक खरीदने के बारे में क्या सलाह दी गई है?
सरकार ने किसानों को केवल अधिकृत दुकानों से नियंत्रित कीमतों पर उर्वरक खरीदने की सलाह दी है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि प्रत्येक बिक्री केंद्र पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और अफवाहों पर ध्यान न दें।
उर्वरक कालाबाजारी पर कौन-से कानून लागू हो रहे हैं?
अनियमितता पाए जाने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत तत्काल कार्रवाई की जा रही है। इन कानूनों के तहत लाइसेंस निलंबन, रद्दीकरण और आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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