ओडिशा में उर्वरक कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई: 11,684 दुकानों पर छापे, 96 लाइसेंस रद्द
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा सरकार ने खरीफ 2026-27 सीजन के दौरान राज्यभर में उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। चालू वित्तीय वर्ष में 11,684 उर्वरक दुकानों पर छापेमारी की जा चुकी है और सैकड़ों डीलरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। भुवनेश्वर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह अभियान 3 सितंबर 2026 तक जारी है।
अभियान की रूपरेखा और नेतृत्व
राज्य के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, जिनके पास कृषि और किसान सशक्तिकरण मंत्रालय का भी प्रभार है, ने उर्वरकों की कालाबाजारी और हेराफेरी से निपटने के लिए शून्य सहिष्णुता की रणनीति तैयार की है। इसके तहत जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष प्रवर्तन दस्ते गठित किए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त निरीक्षण टीमें और हवाई दस्ते क्षेत्र में तैनात हैं। आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव के निर्देश पर थोक और खुदरा उर्वरक दुकानों पर नियमित छापे मारे जा रहे हैं।
मुख्य कार्रवाई के आँकड़े
चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 2,774 व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। 321 डीलरों की उर्वरक बिक्री अस्थायी रूप से निलंबित की गई है, जबकि 170 डीलरों के लाइसेंस निलंबित और 96 डीलरों के लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, 12 दोषी डीलरों के पास से उर्वरक का भंडार जब्त किया गया है और उनमें से 7 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। जहाँ भी अनियमितता पाई जाती है, वहाँ उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
पिछले वर्ष से तुलना
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 2025-26 में 9,017 उर्वरक दुकानों पर छापे मारे गए थे। उस दौरान 2,373 व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस भेजे गए, 48 डीलरों की बिक्री रोकी गई और 53 डीलरों के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए। 15 डीलरों से उर्वरक भंडार जब्त हुआ और 9 लोगों के खिलाफ कानूनी मामले दर्ज हुए। इस वर्ष की कार्रवाई का दायरा पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बड़ा है।
किसानों के लिए सरकार का संदेश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक बिक्री केंद्र पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत दुकानों से ही नियंत्रित कीमतों पर उर्वरक खरीदें।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि खरीफ सीजन के शेष महीनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा। प्रवर्तन दस्तों की निगरानी जारी रहेगी और दोषी पाए जाने वाले डीलरों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।