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अनुष्का रंजन ने खोला IVF जर्नी का दर्द: 'लगा मेरी ही बॉडी में कमी है'

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अनुष्का रंजन ने खोला IVF जर्नी का दर्द: 'लगा मेरी ही बॉडी में कमी है'

सारांश

अनुष्का रंजन ने 'डबल डेट' में वो बात कही जो बहुत कम अभिनेत्रियाँ कहती हैं — IVF के दौरान खुद पर शक, शर्म और शारीरिक दर्द। पति आदित्य सील ने भी माना कि एक असफलता पर वे रुक जाते। यह जोड़े की कहानी नहीं, लाखों दंपतियों की आवाज़ है।

मुख्य बातें

अनुष्का रंजन और आदित्य सील ने नेहा धूपिया व अंगद बेदी के शो 'डबल डेट' में IVF जर्नी साझा की।
कपल ने पहले नेचुरल कंसेप्शन और फिर IUI की कोशिश की, उसके बाद IVF का रास्ता चुना।
अनुष्का ने बताया कि IVF के दौरान उन्हें लगा — 'मेरी ही बॉडी में कमी है' — और शर्म व अकेलेपन का सामना करना पड़ा।
आदित्य सील ने कहा कि यदि IVF सफल नहीं होता, तो वे दोबारा यह प्रक्रिया नहीं दोहराते ।
कपल ने गोद लेने का विकल्प भी खुला रखा था।

अभिनेत्री अनुष्का रंजन और उनके पति-अभिनेता आदित्य सील ने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो 'डबल डेट' में अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी के सबसे निजी और कठिन पलों को साझा किया। यह एपिसोड कपल के बच्चों के जन्म से पहले रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें अनुष्का ने IVF के दौरान झेले शारीरिक दर्द और भावनात्मक टूटन को बेबाकी से बयान किया।

नेचुरल कंसेप्शन से IVF तक का सफर

अनुष्का रंजन ने बताया कि शुरुआत में वे और आदित्य सील प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की कोशिश कर रहे थे। डॉक्टरों ने भी उन्हें छह महीने से एक साल तक प्रयास करने की सलाह दी थी। जब यह सफल नहीं हुआ, तो चिकित्सकों ने IUI (इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन) का सुझाव दिया, जिसे वे IVF का 'हल्का वर्जन' बताती हैं।

अनुष्का ने कहा, 'शुरुआत में हम नेचुरली बच्चे करने की कोशिश कर रहे थे और डॉक्टर्स ने भी हमें छह महीने या एक साल तक कोशिश करने की सलाह दी थी। फिर एक प्रोसेस होता है जिसे IUI कहते हैं, जो IVF का हल्का वर्जन है। इसमें भी काफी दवाइयां लेनी पड़ती हैं लेकिन इंजेक्शन कम लेने पड़ते थे — 3 या 4 इंजेक्शन पर दवाइयां बहुत खानी पड़ती थीं। वो दवाइयां भी मुझे अजीब सा महसूस कराती थीं।'

IVF का फैसला और भावनात्मक असर

अभिनेत्री ने बताया कि IUI की तुलना में IVF में सफलता की संभावना अधिक होती है, इसीलिए उन्होंने यह कदम उठाया। लेकिन इस प्रक्रिया ने उन पर गहरा भावनात्मक असर डाला। उन्होंने कहा, 'आपको लगने लगता है कि मेरी बॉडी में ही कुछ कमी है, कुछ तो गलत है। एक लड़की होने के नाते मुझे शराब नहीं पीनी चाहिए थी या नॉनवेज नहीं खाना चाहिए था। फिर शर्म भी आने लगी कि कैसे किसी को बताएं कि हम बच्चा प्लान कर रहे हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब बांझपन और सहायक प्रजनन तकनीकों को लेकर सामाजिक कलंक अभी भी भारत में व्यापक है। अनुष्का का यह खुलासा उन हज़ारों महिलाओं की आवाज़ बनता है जो इस प्रक्रिया के दौरान अकेलापन और आत्म-संदेह महसूस करती हैं।

आदित्य सील की भूमिका और साझा निर्णय

अभिनेता आदित्य सील ने बताया कि वे अनुष्का को शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव से गुज़रते देख रहे थे। उन्होंने तय कर लिया था कि अगर यह प्रयास सफल नहीं हुआ, तो वे दोबारा IVF नहीं करवाएंगे।

कपल ने यह भी बताया कि उन्होंने गोद लेने का विकल्प भी खुला रखा था। उनका मानना था कि अगर वे जैविक रूप से माता-पिता नहीं बन पाए, तो भी वे किसी बच्चे को प्यार भरी और बेहतर ज़िंदगी देना चाहते हैं।

समाज को क्या संदेश

गौरतलब है कि IVF जैसी प्रक्रियाओं पर खुलकर बात करना अभी भी भारतीय मनोरंजन जगत में दुर्लभ है। अनुष्का और आदित्य का यह साझा अनुभव न केवल व्यक्तिगत साहस की मिसाल है, बल्कि यह सामाजिक बातचीत को भी एक नई दिशा देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, IVF के दौरान मानसिक स्वास्थ्य सहायता उतनी ही ज़रूरी है जितनी चिकित्सा प्रक्रिया। आने वाले समय में इस कपल की यह बेबाक बातचीत और भी दंपतियों को अपनी जर्नी साझा करने का हौसला दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो वह लाखों महिलाओं के अनुभव को वैधता देता है जो इसे अकेले झेलती हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर IVF को एक 'चमत्कारी समाधान' की तरह पेश करती है — लेकिन इस जोड़े ने जो बताया वह उस कथा को पलटता है: दर्द, संदेह, और 'रुक जाने' की तैयारी भी इस यात्रा का हिस्सा है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुष्का रंजन ने 'डबल डेट' शो में क्या साझा किया?
अनुष्का रंजन ने बताया कि उन्होंने और पति आदित्य सील ने IVF के ज़रिए माता-पिता बनने का सफर तय किया। उन्होंने IUI से IVF तक की भावनात्मक और शारीरिक चुनौतियों को खुलकर बयान किया।
IUI और IVF में क्या फर्क है जो अनुष्का ने बताया?
अनुष्का के अनुसार IUI, IVF का 'हल्का वर्जन' है जिसमें कम इंजेक्शन (3 या 4) लेने पड़ते हैं लेकिन दवाइयाँ अधिक होती हैं। IVF में सफलता की संभावना अधिक होती है, इसीलिए उन्होंने अंततः IVF चुना।
आदित्य सील ने IVF प्रक्रिया के बारे में क्या कहा?
आदित्य सील ने बताया कि अनुष्का को शारीरिक दर्द और भावनात्मक तनाव से गुज़रते देखकर उन्होंने तय कर लिया था कि यदि यह प्रयास सफल नहीं हुआ, तो वे दोबारा IVF नहीं करवाएंगे।
क्या अनुष्का रंजन और आदित्य सील ने गोद लेने पर विचार किया था?
हाँ, कपल ने बताया कि उन्होंने गोद लेने का विकल्प भी खुला रखा था। उनका मानना था कि जैविक रूप से माता-पिता न बन पाने पर भी वे किसी बच्चे को प्यार और बेहतर जीवन देना चाहते हैं।
IVF के दौरान अनुष्का रंजन ने किस भावनात्मक संघर्ष का सामना किया?
अनुष्का ने बताया कि उन्हें लगने लगा जैसे उनकी खुद की बॉडी में कमी है। उन्हें शर्म भी महसूस हुई कि किसी को कैसे बताएं कि वे बच्चा प्लान कर रहे हैं — यह भावनात्मक अकेलापन IVF प्रक्रिया का सबसे कठिन हिस्सा था।
राष्ट्र प्रेस
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