अनुष्का रंजन ने खोला IVF जर्नी का दर्द: 'लगा मेरी ही बॉडी में कमी है'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री अनुष्का रंजन और उनके पति-अभिनेता आदित्य सील ने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो 'डबल डेट' में अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी के सबसे निजी और कठिन पलों को साझा किया। यह एपिसोड कपल के बच्चों के जन्म से पहले रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें अनुष्का ने IVF के दौरान झेले शारीरिक दर्द और भावनात्मक टूटन को बेबाकी से बयान किया।
नेचुरल कंसेप्शन से IVF तक का सफर
अनुष्का रंजन ने बताया कि शुरुआत में वे और आदित्य सील प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की कोशिश कर रहे थे। डॉक्टरों ने भी उन्हें छह महीने से एक साल तक प्रयास करने की सलाह दी थी। जब यह सफल नहीं हुआ, तो चिकित्सकों ने IUI (इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन) का सुझाव दिया, जिसे वे IVF का 'हल्का वर्जन' बताती हैं।
अनुष्का ने कहा, 'शुरुआत में हम नेचुरली बच्चे करने की कोशिश कर रहे थे और डॉक्टर्स ने भी हमें छह महीने या एक साल तक कोशिश करने की सलाह दी थी। फिर एक प्रोसेस होता है जिसे IUI कहते हैं, जो IVF का हल्का वर्जन है। इसमें भी काफी दवाइयां लेनी पड़ती हैं लेकिन इंजेक्शन कम लेने पड़ते थे — 3 या 4 इंजेक्शन पर दवाइयां बहुत खानी पड़ती थीं। वो दवाइयां भी मुझे अजीब सा महसूस कराती थीं।'
IVF का फैसला और भावनात्मक असर
अभिनेत्री ने बताया कि IUI की तुलना में IVF में सफलता की संभावना अधिक होती है, इसीलिए उन्होंने यह कदम उठाया। लेकिन इस प्रक्रिया ने उन पर गहरा भावनात्मक असर डाला। उन्होंने कहा, 'आपको लगने लगता है कि मेरी बॉडी में ही कुछ कमी है, कुछ तो गलत है। एक लड़की होने के नाते मुझे शराब नहीं पीनी चाहिए थी या नॉनवेज नहीं खाना चाहिए था। फिर शर्म भी आने लगी कि कैसे किसी को बताएं कि हम बच्चा प्लान कर रहे हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब बांझपन और सहायक प्रजनन तकनीकों को लेकर सामाजिक कलंक अभी भी भारत में व्यापक है। अनुष्का का यह खुलासा उन हज़ारों महिलाओं की आवाज़ बनता है जो इस प्रक्रिया के दौरान अकेलापन और आत्म-संदेह महसूस करती हैं।
आदित्य सील की भूमिका और साझा निर्णय
अभिनेता आदित्य सील ने बताया कि वे अनुष्का को शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव से गुज़रते देख रहे थे। उन्होंने तय कर लिया था कि अगर यह प्रयास सफल नहीं हुआ, तो वे दोबारा IVF नहीं करवाएंगे।
कपल ने यह भी बताया कि उन्होंने गोद लेने का विकल्प भी खुला रखा था। उनका मानना था कि अगर वे जैविक रूप से माता-पिता नहीं बन पाए, तो भी वे किसी बच्चे को प्यार भरी और बेहतर ज़िंदगी देना चाहते हैं।
समाज को क्या संदेश
गौरतलब है कि IVF जैसी प्रक्रियाओं पर खुलकर बात करना अभी भी भारतीय मनोरंजन जगत में दुर्लभ है। अनुष्का और आदित्य का यह साझा अनुभव न केवल व्यक्तिगत साहस की मिसाल है, बल्कि यह सामाजिक बातचीत को भी एक नई दिशा देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, IVF के दौरान मानसिक स्वास्थ्य सहायता उतनी ही ज़रूरी है जितनी चिकित्सा प्रक्रिया। आने वाले समय में इस कपल की यह बेबाक बातचीत और भी दंपतियों को अपनी जर्नी साझा करने का हौसला दे सकती है।