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गुरुग्राम IVF एम्ब्रियो अदला-बदली: DNA रिपोर्ट के बाद दंपति का परिवार सदमे में, FIR दर्ज

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गुरुग्राम IVF एम्ब्रियो अदला-बदली: DNA रिपोर्ट के बाद दंपति का परिवार सदमे में, FIR दर्ज

सारांश

गुरुग्राम के राहुल और मीनू राठौर ने जनवरी में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया, लेकिन DNA रिपोर्ट ने उन्हें तोड़ दिया — मातृत्व और पितृत्व दोनों परीक्षण नकारात्मक। तीन महीने तक अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज हुई। 80 वर्षीय माँ सदमे में, पत्नी की याददाश्त प्रभावित।

मुख्य बातें

गुरुग्राम के दंपति राहुल और मीनू राठौर ने एक आईवीएफ क्लिनिक पर कथित एम्ब्रियो अदला-बदली का आरोप लगाया है।
14 मई 2025 को एम्ब्रियो इम्प्लांट हुए; जनवरी 2026 में जुड़वां बेटियों का जन्म हुआ।
DNA प्रोफाइलिंग में मातृत्व और पितृत्व दोनों परीक्षण कथित तौर पर नकारात्मक आए।
दंपति तीन महीने से अधिकारियों के पास गुहार लगा रहे थे; कोर्ट के आदेश के बाद ही FIR दर्ज हुई।
दंपति ने एम्ब्रियो-लैब रिकॉर्ड और CCTV फुटेज की जाँच की माँग की है।
परिवार में 80 वर्षीय माँ सहित कई सदस्य मानसिक सदमे में हैं; पत्नी की याददाश्त प्रभावित बताई जा रही है।

गुरुग्राम के दंपति राहुल राठौर और मीनू राठौर ने एक नामी आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) क्लिनिक पर कथित एम्ब्रियो अदला-बदली का गंभीर आरोप लगाया है। डीएनए प्रोफाइलिंग के नतीजों में मातृत्व और पितृत्व दोनों परीक्षण नकारात्मक आने के बाद यह मामला सामने आया, जिससे यह आशंका पुख्ता हुई कि दंपति को सौंपी गई जुड़वां बेटियाँ उनकी जैविक संतान नहीं हैं। कोर्ट के आदेश के बाद ही इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज की जा सकी।

मामले का घटनाक्रम

राठौर दंपति ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष एक प्रतिष्ठित आईवीएफ अस्पताल में इलाज शुरू किया था। सीमेन कलेक्शन, एग रिट्रीवल और एम्ब्रियो डेवलपमेंट की पूरी प्रक्रिया क्लिनिक के प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी की गई। 14 मई 2025 को मीनू राठौर के गर्भ में एम्ब्रियो इम्प्लांट किए गए।

इस वर्ष जनवरी में उन्होंने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। परंतु बच्चियों के शारीरिक लक्षणों में स्पष्ट अंतर देखकर दंपति को संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने डीएनए प्रोफाइलिंग करवाई। कथित तौर पर दोनों परीक्षणों — मातृत्व और पितृत्व — के परिणाम नकारात्मक रहे।

परिवार पर भावनात्मक असर

राहुल राठौर ने बताया, 'हमारे बुजुर्ग माता-पिता बहुत तकलीफ में हैं। मेरे पिता इतने सदमे में हैं कि वे बिल्कुल चुप हो गए हैं, और मेरी 80 वर्षीय माँ मानसिक सदमे में हैं। मेरी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य इस सदमे से उबरने के लिए बहुत संघर्ष कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद उनकी पत्नी की याददाश्त प्रभावित होने लगी है।

दंपति का कहना है कि वे भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं। राहुल ने स्पष्ट किया, 'हमें अभी तक यह नहीं पता चला है कि एम्ब्रियो किस स्टेज पर बदले गए थे।'

अधिकारियों का रवैया और FIR

दंपति पिछले तीन महीनों से संबंधित अधिकारियों और पुलिस से संपर्क कर रहे थे, लेकिन उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। राहुल राठौर के अनुसार, मेडिकल बोर्ड इस मामले की जाँच कर सकता था और कोई समाधान निकाल सकता था, लेकिन उसने इस ओर कोई कदम नहीं उठाया। अंततः कोर्ट के आदेश के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आईवीएफ क्लिनिकों की निगरानी और विनियमन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि भारत में आईवीएफ उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी जवाबदेही का ढाँचा अभी भी अपर्याप्त माना जाता है।

दंपति की माँगें

राठौर दंपति ने माँग की है कि इस मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच हो। वे चाहते हैं कि एम्ब्रियो और लैब रिकॉर्ड की जाँच की जाए, साथ ही आईवीएफ क्लिनिक के सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गड़बड़ी किस चरण में हुई।

दंपति ने कहा कि अगर उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला, तो उनकी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी। यह मामला अब आईवीएफ क्लिनिकों में मानक प्रक्रियाओं और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एम्ब्रियो हैंडलिंग के लिए अनिवार्य ऑडिट और रियल-टाइम निगरानी का कोई मज़बूत ढाँचा नहीं है। जब तक जवाबदेही का यह शून्य नहीं भरा जाता, ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुग्राम IVF एम्ब्रियो अदला-बदली मामला क्या है?
गुरुग्राम के राहुल राठौर और मीनू राठौर ने एक आईवीएफ क्लिनिक पर आरोप लगाया है कि उनके एम्ब्रियो बदल दिए गए, जिसके चलते जन्मी जुड़वां बेटियाँ कथित तौर पर उनकी जैविक संतान नहीं हैं। DNA प्रोफाइलिंग में मातृत्व और पितृत्व दोनों परीक्षण नकारात्मक आए।
इस मामले में FIR कैसे दर्ज हुई?
दंपति तीन महीने तक पुलिस और संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत लेकर गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः कोर्ट के आदेश के बाद ही इस मामले में FIR दर्ज की जा सकी।
दंपति ने DNA परीक्षण क्यों करवाया?
जनवरी में जुड़वां बेटियों के जन्म के बाद दंपति को बच्चियों के शारीरिक लक्षणों में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया, जिससे उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने DNA प्रोफाइलिंग करवाई, जिसके नतीजे कथित तौर पर नकारात्मक रहे।
दंपति क्या जाँच चाहते हैं?
राठौर दंपति ने माँग की है कि एम्ब्रियो और लैब रिकॉर्ड की जाँच हो और आईवीएफ क्लिनिक के CCTV फुटेज खंगाले जाएँ ताकि यह पता चल सके कि एम्ब्रियो किस चरण में बदले गए।
इस मामले का परिवार पर क्या असर पड़ा है?
राहुल राठौर के अनुसार उनके पिता सदमे में चुप हो गए हैं और 80 वर्षीय माँ मानसिक सदमे में हैं। मीनू राठौर की याददाश्त प्रभावित होने लगी है और परिवार के अन्य सदस्य भी भावनात्मक और मानसिक रूप से टूटे हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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