गुरुग्राम IVF एम्ब्रियो अदला-बदली: DNA रिपोर्ट के बाद दंपति का परिवार सदमे में, FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
गुरुग्राम के दंपति राहुल राठौर और मीनू राठौर ने एक नामी आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) क्लिनिक पर कथित एम्ब्रियो अदला-बदली का गंभीर आरोप लगाया है। डीएनए प्रोफाइलिंग के नतीजों में मातृत्व और पितृत्व दोनों परीक्षण नकारात्मक आने के बाद यह मामला सामने आया, जिससे यह आशंका पुख्ता हुई कि दंपति को सौंपी गई जुड़वां बेटियाँ उनकी जैविक संतान नहीं हैं। कोर्ट के आदेश के बाद ही इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज की जा सकी।
मामले का घटनाक्रम
राठौर दंपति ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष एक प्रतिष्ठित आईवीएफ अस्पताल में इलाज शुरू किया था। सीमेन कलेक्शन, एग रिट्रीवल और एम्ब्रियो डेवलपमेंट की पूरी प्रक्रिया क्लिनिक के प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी की गई। 14 मई 2025 को मीनू राठौर के गर्भ में एम्ब्रियो इम्प्लांट किए गए।
इस वर्ष जनवरी में उन्होंने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। परंतु बच्चियों के शारीरिक लक्षणों में स्पष्ट अंतर देखकर दंपति को संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने डीएनए प्रोफाइलिंग करवाई। कथित तौर पर दोनों परीक्षणों — मातृत्व और पितृत्व — के परिणाम नकारात्मक रहे।
परिवार पर भावनात्मक असर
राहुल राठौर ने बताया, 'हमारे बुजुर्ग माता-पिता बहुत तकलीफ में हैं। मेरे पिता इतने सदमे में हैं कि वे बिल्कुल चुप हो गए हैं, और मेरी 80 वर्षीय माँ मानसिक सदमे में हैं। मेरी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य इस सदमे से उबरने के लिए बहुत संघर्ष कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद उनकी पत्नी की याददाश्त प्रभावित होने लगी है।
दंपति का कहना है कि वे भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं। राहुल ने स्पष्ट किया, 'हमें अभी तक यह नहीं पता चला है कि एम्ब्रियो किस स्टेज पर बदले गए थे।'
अधिकारियों का रवैया और FIR
दंपति पिछले तीन महीनों से संबंधित अधिकारियों और पुलिस से संपर्क कर रहे थे, लेकिन उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। राहुल राठौर के अनुसार, मेडिकल बोर्ड इस मामले की जाँच कर सकता था और कोई समाधान निकाल सकता था, लेकिन उसने इस ओर कोई कदम नहीं उठाया। अंततः कोर्ट के आदेश के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आईवीएफ क्लिनिकों की निगरानी और विनियमन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि भारत में आईवीएफ उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी जवाबदेही का ढाँचा अभी भी अपर्याप्त माना जाता है।
दंपति की माँगें
राठौर दंपति ने माँग की है कि इस मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच हो। वे चाहते हैं कि एम्ब्रियो और लैब रिकॉर्ड की जाँच की जाए, साथ ही आईवीएफ क्लिनिक के सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गड़बड़ी किस चरण में हुई।
दंपति ने कहा कि अगर उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला, तो उनकी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी। यह मामला अब आईवीएफ क्लिनिकों में मानक प्रक्रियाओं और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।