22 अगस्त 2026
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छिंदवाड़ा एनआईसीयू में वार्मर मशीन से आग, तीन नवजात गंभीर रूप से झुलसे; जबलपुर रेफर

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छिंदवाड़ा एनआईसीयू में वार्मर मशीन से आग, तीन नवजात गंभीर रूप से झुलसे; जबलपुर रेफर

सारांश

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल की एनआईसीयू में रेडिएंट वार्मर के फिलामेंट में स्पार्किंग से लगी आग ने तीन नवजातों को गंभीर रूप से झुलसा दिया। एक शिशु की हालत अत्यंत नाज़ुक है और सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है। यह हादसा सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा उपकरण रखरखाव पर बड़े सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल की एनआईसीयू में 22 अगस्त 2026 की रात 1:50 बजे रेडिएंट वार्मर में आग लगी।
वार्मर के हीटिंग फिलामेंट में स्पार्किंग को आग की वजह बताया गया है; ऑक्सीजन की मौजूदगी से आग तेज़ी से फैली।
तीनों नवजात शिशु गंभीर रूप से झुलसे; तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद भी हालत नाज़ुक रही।
छिंदवाड़ा में पीडियाट्रिक सर्जन की कमी के कारण तीनों को जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर, सर्जरी की आवश्यकता संभावित।
अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जाँच शुरू की; तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट संभावित कारण।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में 22 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि करीब 1:50 बजे एक रेडिएंट वार्मर मशीन में आग लग जाने से तीन नवजात शिशु गंभीर रूप से झुलस गए। अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल लांबा ने पुष्टि की कि हीटिंग फिलामेंट में अचानक स्पार्किंग होने से यह हादसा हुआ। तीनों शिशुओं को बेहतर उपचार के लिए जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

हादसे का घटनाक्रम

अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, जन्म के बाद शरीर का तापमान स्थिर रखने के लिए तीनों नवजातों को एनआईसीयू में रेडिएंट वार्मर में रखा गया था। 22 अगस्त की रात करीब 1:50 बजे वार्मर की हीटिंग यूनिट के फिलामेंट में अचानक स्पार्किंग हुई, जिससे आग भड़क उठी। एनआईसीयू में ऑक्सीजन की उपस्थिति के कारण आग बंद यूनिट के भीतर तेज़ी से फैल गई और तीनों शिशु उसकी चपेट में आ गए।

डॉ. लांबा ने कहा, 'जन्म के बाद नवजातों के शरीर का तापमान स्थिर रखने के लिए उन्हें वार्मर में रखा जाता है। फिलामेंट में अचानक स्पार्किंग हुई और आग लग गई — तीनों बच्चे बुरी तरह झुलस गए।'

बचाव और प्राथमिक उपचार

आग लगते ही अस्पताल में अफरातफरी मच गई। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जलते वार्मर से तीनों नवजातों को बाहर निकाला और अग्निशामक यंत्रों से आग पर काबू पाया। तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया गया, लेकिन जलने की गंभीरता के कारण तीनों शिशुओं की हालत नाज़ुक बनी रही।

जबलपुर रेफर, एक की हालत अत्यंत गंभीर

घावों की गंभीरता और छिंदवाड़ा अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जन की अनुपलब्धता को देखते हुए तीनों नवजातों को दो डॉक्टरों की देखरेख में जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। बताया जा रहा है कि एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर है और उसे सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

जाँच और सुरक्षा सवाल

अस्पताल प्रशासन ने घटना की आंतरिक जाँच शुरू कर दी है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, वार्मर मशीन में तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट इस हादसे की संभावित वजह हो सकती है। अधिकारी एनआईसीयू के सभी उपकरणों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा कर रहे हैं ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।

यह हादसा ऐसे समय में आया है जब सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और इंटेंसिव केयर यूनिटों में नवजात सुरक्षा को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि एनआईसीयू जैसी संवेदनशील इकाइयों में ऑक्सीजन-समृद्ध वातावरण आग के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे उपकरण रखरखाव की नियमित जाँच अनिवार्य हो जाती है।

आगे की कार्रवाई और तीनों नवजातों की स्वास्थ्य स्थिति पर जबलपुर मेडिकल कॉलेज से अपडेट की प्रतीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आखिरी बार भी नहीं होगा। छिंदवाड़ा जैसे ज़िला अस्पतालों में पीडियाट्रिक सर्जन की अनुपलब्धता एक और संरचनात्मक विफलता को उजागर करती है जिस पर नीति-निर्माताओं को तत्काल ध्यान देना चाहिए।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छिंदवाड़ा एनआईसीयू में आग कैसे लगी?
अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल लांबा के अनुसार, रेडिएंट वार्मर मशीन की हीटिंग यूनिट के फिलामेंट में अचानक स्पार्किंग होने से आग लगी। एनआईसीयू में ऑक्सीजन की उपस्थिति के कारण आग तेज़ी से फैल गई और तीनों नवजात उसकी चपेट में आ गए।
झुलसे नवजातों को कहाँ रेफर किया गया है?
तीनों नवजात शिशुओं को जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। छिंदवाड़ा अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जन की अनुपलब्धता के कारण यह निर्णय लिया गया और उन्हें दो डॉक्टरों की देखरेख में ले जाया गया।
नवजातों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति क्या है?
तीनों नवजातों की हालत गंभीर बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से एक शिशु की स्थिति अत्यंत नाज़ुक है और उसे सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
क्या इस घटना की जाँच हो रही है?
हाँ, अस्पताल प्रशासन ने घटना की आंतरिक जाँच शुरू कर दी है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार वार्मर मशीन में तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट संभावित कारण हो सकते हैं। अधिकारी एनआईसीयू के सभी उपकरणों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी समीक्षा कर रहे हैं।
एनआईसीयू में वार्मर मशीन से आग का खतरा क्यों अधिक होता है?
एनआईसीयू में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से अधिक रहता है, जो किसी भी चिंगारी या स्पार्किंग को तेज़ आग में बदल सकता है। रेडिएंट वार्मर जैसे उपकरणों में हीटिंग फिलामेंट की नियमित जाँच न होने पर शॉर्ट सर्किट का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे ऑक्सीजन-समृद्ध वातावरण में आग तेज़ी से फैलती है।
राष्ट्र प्रेस
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