6 अक्टूबर 2026
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मुंबई में साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़: ₹19.66 लाख के 25 मोबाइल बरामद, 2 गिरफ्तार

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मुंबई में साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़: ₹19.66 लाख के 25 मोबाइल बरामद, 2 गिरफ्तार

सारांश

साइबर ठगी की रकम से महंगे स्मार्टफोन खरीदकर पैसे छुपाने का खेल — मुंबई पुलिस ने इस नई चाल को पकड़ा। ₹19.66 लाख के 25 मोबाइल जब्त, 2 आरोपी गिरफ्तार। यह मामला बताता है कि साइबर क्राइम अब सिर्फ डिजिटल नहीं, बल्कि संगठित 'मनी लॉन्ड्रिंग' का नया रूप ले चुका है।

मुख्य बातें

एलटी मार्ग पुलिस, मुंबई ने 6 अक्टूबर 2026 को साइबर ठगी गैंग का पर्दाफाश किया।
₹19,66,075 कीमत के 25 मोबाइल फोन जब्त, जिनमें 2 आईफोन भी शामिल हैं।
आरोपी अनिसबेग समिरबेग मिर्जा (23) और मोईन रहीम शेख (34) को अहमदाबाद व कुर्ला से गिरफ्तार किया गया।
पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से Swiggy प्लेटफॉर्म पर 3 ट्रांजेक्शन में ₹4,48,721 की ठगी की गई।
दिल्ली में भी मिलते-जुलते नेटवर्क का भंडाफोड़, उत्तराखंड से 3 अलग आरोपी गिरफ्तार — कुल नुकसान ₹7,86,300 ।

मुंबई में एलटी मार्ग पुलिस ने 6 अक्टूबर 2026 को एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया, जो क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी से मिले पैसों से महंगे मोबाइल फोन खरीदता था। पुलिस ने गुजरात के अहमदाबाद और मुंबई के कुर्ला से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर ₹19,66,075 कीमत के 25 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मामले की शुरुआत तब हुई जब एलटी मार्ग पुलिस स्टेशन में एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के अनुसार, एक अनजान नंबर से कॉल आई और कॉलर ने खुद को RBL क्रेडिट कार्ड का प्रतिनिधि बताया। उसने कहा कि कार्ड पर चालू 'मेल ऑर्डर सर्विस' बंद करनी है और इसके लिए व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजी।

जैसे ही पीड़ित ने उस लिंक पर क्लिक किया, आरोपियों ने पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से 3 ट्रांजेक्शन में Swiggy प्लेटफॉर्म पर ₹4,48,721 की खरीदारी कर ली। यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में हो गई और पीड़ित को तब तक पता नहीं चला जब तक बैंक का अलर्ट नहीं आया।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर पुलिस ने अनिसबेग समिरबेग मिर्जा (23 वर्ष) और मोईन रहीम शेख (34 वर्ष) को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 2 आईफोन समेत अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों में खरीदे गए कुल 25 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

जांच में सामने आया कि यह गिरोह ठगी से प्राप्त रकम को तुरंत महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बदल देता था, ताकि नकद या डिजिटल ट्रेल को मिटाया जा सके — एक ऐसी कार्यप्रणाली जो साइबर अपराधियों में तेज़ी से प्रचलित हो रही है।

दिल्ली में भी मिलता-जुलता नेटवर्क उजागर

यह घटना अकेली नहीं है। हाल ही में दिल्ली के साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने टेलीग्राम-आधारित टास्क और क्रिप्टोकरेंसी निवेश धोखाधड़ी में संलिप्त एक अंतरराज्यीय साइबर-फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

उस मामले में शिकायतकर्ता कथित तौर पर एक टेलीग्राम ग्रुप के ज़रिए ठगों के संपर्क में आया था, जहाँ उसे अच्छे रिटर्न का वादा करके ऑनलाइन टास्क और क्रिप्टोकरेंसी में पैसे लगाने के लिए उकसाया गया। पीड़ित ने दो किश्तों में — ₹4,66,300 और ₹3,20,000 — कुल ₹7,86,300 ट्रांसफर किए। आरोपियों ने न वादा किया गया रिटर्न दिया, न निवेश की रकम लौटाई और बाद में संपर्क ही काट लिया।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि साइबर ठगी के ये मामले केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं — छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों के लोग भी इनका शिकार हो रहे हैं। 'बैंक प्रतिनिधि' बनकर कॉल करना, फर्जी लिंक भेजना और 'निवेश पर मोटे रिटर्न' का लालच देना — ये तीन तरीके अब सबसे आम साइबर जाल बन चुके हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ठगी की रकम को तुरंत महंगे मोबाइल, गैजेट या क्रिप्टो में बदलना पैसे को 'लॉन्डर' करने का नया तरीका है, जो जांच एजेंसियों के लिए पैसे की ट्रेसिंग और रिकवरी कठिन बना देता है।

क्या होगा आगे

फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह गिरोह और किन-किन राज्यों में सक्रिय था तथा और कितने पीड़ित हैं। बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच से आगे और नामों का खुलासा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित मनी ट्रेल मिटाने की रणनीति है — और यह तरीका तेज़ी से साइबर अपराधियों का पसंदीदा हथियार बनता जा रहा है। मुंबई और दिल्ली के ये दो मामले एक ही सप्ताह में सामने आना संयोग नहीं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय पैटर्न का हिस्सा है। चिंताजनक यह है कि 'बैंक प्रतिनिधि' के नाम पर फर्जी कॉल और लिंक-क्लिक ट्रैप जैसी पुरानी तकनीकें आज भी कारगर हैं — जो साइबर जागरूकता अभियानों की सीमाओं को उजागर करती हैं। जब तक बैंक और टेलीकॉम कंपनियाँ रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन में एकजुट नहीं होतीं, तब तक गिरफ्तारियाँ सिर्फ लक्षण का उपचार हैं, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई साइबर ठगी गैंग ने क्या तरीका अपनाया था?
गिरोह ने पीड़ित को RBL क्रेडिट कार्ड का प्रतिनिधि बनकर कॉल किया और व्हाट्सएप पर एक फर्जी लिंक भेजकर कार्ड की जानकारी हासिल की। इसके बाद Swiggy प्लेटफॉर्म पर 3 ट्रांजेक्शन में ₹4,48,721 की खरीदारी कर ली गई।
कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और कहाँ से?
पुलिस ने दो आरोपियों — अनिसबेग समिरबेग मिर्जा (23) और मोईन रहीम शेख (34) — को गिरफ्तार किया। मिर्जा को गुजरात के अहमदाबाद से और शेख को मुंबई के कुर्ला से पकड़ा गया।
बरामद मोबाइल फोन की कुल कीमत कितनी है?
पुलिस ने कुल 25 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत ₹19,66,075 बताई गई है। इनमें 2 आईफोन भी शामिल हैं, जो अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों में खरीदे गए थे।
दिल्ली के साइबर फ्रॉड मामले में कितना नुकसान हुआ?
दिल्ली के साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने टेलीग्राम और क्रिप्टोकरेंसी आधारित धोखाधड़ी का खुलासा किया, जिसमें पीड़ित ने दो किश्तों में कुल ₹7,86,300 ट्रांसफर किए। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर से तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
साइबर ठगी से खुद को कैसे बचाएँ?
बैंक या कार्ड कंपनी का कोई भी असली प्रतिनिधि फोन पर लिंक नहीं भेजता और OTP या CVV नहीं माँगता। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत अपने बैंक के आधिकारिक नंबर पर सूचित करें।
राष्ट्र प्रेस
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