सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या पूरा देश बनेगा जंतर-मंतर: अभिजीत दिपके की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 6 अक्टूबर 2026 को छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया, तो पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा। उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में यह बयान दिया और कहा कि उन्हें गिरफ्तारी की आशंका है, लेकिन आंदोलन नहीं रुकेगा।
आंदोलन की तीन प्रमुख माँगें
दिपके ने स्पष्ट किया कि इस आंदोलन की तीन केंद्रीय माँगें हैं। पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उनके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। दूसरी, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को तत्काल फ्रीज किया जाए। तीसरी, चुनाव आयोग में सुधार लाया जाए और नियुक्तियों की प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं तटस्थ बनाया जाए।
युवाओं से अपील और गांधीवादी आह्वान
दिपके ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगर दिल्ली पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करे, तो महात्मा गांधी को याद करें और जहाँ भी पुलिस रोके, उसी जगह को जंतर-मंतर बना दें। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से 'रघुपति राघव राजा राम' के जाप के साथ शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने की अपील की।
गिरफ्तारी की आशंका, लेकिन इरादा बुलंद
दिपके ने दावा किया कि 10 अक्टूबर के प्रस्तावित मार्च से सरकार भयभीत है। उन्होंने कहा, 'मुझे गिरफ्तार कर लो, एनएसए लगा दो, लेकिन हम लड़ते रहेंगे।' उन्होंने दिल्ली पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए, हालाँकि उन्होंने मुंबई में विरोध प्रदर्शन के दौरान महाराष्ट्र पुलिस के सहयोगात्मक रवैये की तुलनात्मक रूप से सराहना की।
नोटिस और सोशल मीडिया पर कथित प्रतिबंध
दिपके ने दावा किया कि महाराष्ट्र से अब तक दो लोगों को नोटिस मिल चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान में उनके एक स्वयंसेवक मुकेश को भी नोटिस दिया गया है और आने वाले दिनों में अन्य लोगों को भी नोटिस मिल सकते हैं। इसके अलावा, दिपके ने दावा किया कि भारत में इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीजेपी से जुड़े कंटेंट पर कथित तौर पर रोक लगाई गई है — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दिल्ली पुलिस पर सवाल
दिपके ने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस यह जानकारी क्यों माँग रही है कि चंद्रपुर से लोग दिल्ली कैसे जा रहे हैं और उनके सफर का खर्च कहाँ से आ रहा है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि क्या ₹1,000 से ₹1,500 के ट्रेन टिकट का भी हिसाब देना जरूरी है। यह आंदोलन 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन के साथ अगले चरण में प्रवेश करेगा।