12 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दो

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दो

सारांश

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया — या तो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तारीख दो, या अगले कदम के लिए तैयार रहो। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब सरकार बनाम विपक्ष की बड़ी लड़ाई बनता दिख रहा है।

मुख्य बातें

सीजेपी ने 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया।
पार्टी का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है।
प्रवक्ता आशुतोष रांका पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुँचकर प्रदर्शन की तारीख माँगी।
रांका के अनुसार, पिछले 72 घंटों में देशभर से हज़ारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
सीजेपी का आरोप — सरकार ने चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन को 'अपने खिलाफ लड़ाई' में बदल दिया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि वह जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति के संबंध में अपना जवाब दे। यह कदम तब उठाया गया जब पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखे हुए है।

क्या है पूरा मामला

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का एक संवैधानिक अधिकार है और पार्टी इस अधिकार का उपयोग करती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस पर छोड़ी है, लेकिन यह भी साफ कहा कि इस अनुरोध को अनिश्चित काल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।

दास ने कहा, 'पुलिस हमेशा यह शिकायत करती है कि हमें 10 दिन पहले संपर्क करना चाहिए। इस बार हमने फैसला उन पर छोड़ दिया है और उनसे तारीख और समय बताने को कहा है। हम उन्हें 24 घंटे का अल्टीमेटम देंगे — देखते हैं उनसे बात करने के बाद क्या होता है।'

पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर पहुँचे प्रवक्ता

दूसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुँचकर औपचारिक रूप से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख माँगने गए। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि पुलिस हमें तारीख देगी। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो हम 24 घंटे के भीतर अगला कदम उठाएंगे।'

गौरतलब है कि रांका को रविवार को दिल्ली की एक अदालत से रिहाई मिली थी। रिहाई के कुछ घंटों बाद उन्होंने दावा किया कि 'पिछले 72 घंटों में देश ने तानाशाही का चरम देखा है' और देश भर से हज़ारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

सरकार पर गंभीर आरोप

सीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को अपने खिलाफ एक आंदोलन में बदल रही है। रांका ने दावा किया, 'जो लड़ाई शुरू में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ थी, उसे सरकार ने अपने खिलाफ लड़ाई में तब्दील कर दिया है।' यह बयान रविवार को सीजेपी द्वारा लगाए गए उस आरोप के एक दिन बाद आया जिसमें कहा गया था कि सरकार इस आंदोलन से 'डरी हुई' है।

आम जनता और संवैधानिक प्रश्न

यह विवाद उस वक्त और अहम हो जाता है जब देश में विरोध प्रदर्शन के अधिकार और उस पर प्रशासनिक नियंत्रण के बीच टकराव की एक बड़ी बहस चल रही है। जंतर-मंतर परंपरागत रूप से देश में लोकतांत्रिक विरोध का प्रमुख स्थल रहा है, और इस पर प्रतिबंध या देरी को आलोचकों द्वारा नागरिक स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा जाता है।

आगे क्या होगा

अब नज़रें दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं — अगर अगले 24 घंटों में पुलिस की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला, तो सीजेपी के अगले कदम की घोषणा होने की संभावना है। पार्टी का कहना है कि वह किसी भी स्थिति में अपना आंदोलन जारी रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दशकों से लोकतांत्रिक विरोध का प्रतीक रहा है, पर पहुँच को लेकर यह टकराव नया नहीं है। असली प्रश्न यह है कि क्या पुलिस की 'अनुमति प्रक्रिया' संवैधानिक अधिकार की रक्षा करती है या उसे प्रभावी रूप से कुंठित करती है। सीजेपी के आरोप — कि चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन को सरकार ने अपने खिलाफ लड़ाई में बदल दिया — अगर सिद्ध हुए, तो यह संस्थागत स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े करेंगे।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम क्यों दिया?
सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तारीख और समय देने का अल्टीमेटम दिया, क्योंकि पार्टी का मानना है कि शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है और इसे अनिश्चित काल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
सीजेपी का आंदोलन किसके खिलाफ है?
सीजेपी का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। हालाँकि पार्टी का आरोप है कि सरकार ने इस आंदोलन को चुनाव आयोग के बजाय खुद सरकार के खिलाफ लड़ाई में तब्दील कर दिया है।
आशुतोष रांका कौन हैं और उनकी गिरफ्तारी से क्या संबंध है?
आशुतोष रांका सीजेपी के प्रवक्ता हैं, जिन्हें रविवार को दिल्ली की एक अदालत ने रिहा किया। रिहाई के बाद उन्होंने दावा किया कि पिछले 72 घंटों में देशभर से हज़ारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
अगर दिल्ली पुलिस 24 घंटे में जवाब नहीं देती तो क्या होगा?
सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि अगर दिल्ली पुलिस 24 घंटे के भीतर जवाब नहीं देती, तो पार्टी अगला कदम उठाएगी। हालाँकि पार्टी ने अगले कदम का विशिष्ट विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया है।
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति क्यों ज़रूरी है?
दिल्ली पुलिस के नियमों के अनुसार, जंतर-मंतर जैसे निर्धारित विरोध स्थल पर प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। सीजेपी ने इस बार तारीख और समय तय करने का अधिकार पुलिस पर छोड़ा है, ताकि प्रक्रिया का पालन करते हुए आंदोलन की वैधता बनाए रखी जा सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले