सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दो
सारांश
मुख्य बातें
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि वह जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति के संबंध में अपना जवाब दे। यह कदम तब उठाया गया जब पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखे हुए है।
क्या है पूरा मामला
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का एक संवैधानिक अधिकार है और पार्टी इस अधिकार का उपयोग करती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस पर छोड़ी है, लेकिन यह भी साफ कहा कि इस अनुरोध को अनिश्चित काल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
दास ने कहा, 'पुलिस हमेशा यह शिकायत करती है कि हमें 10 दिन पहले संपर्क करना चाहिए। इस बार हमने फैसला उन पर छोड़ दिया है और उनसे तारीख और समय बताने को कहा है। हम उन्हें 24 घंटे का अल्टीमेटम देंगे — देखते हैं उनसे बात करने के बाद क्या होता है।'
पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर पहुँचे प्रवक्ता
दूसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुँचकर औपचारिक रूप से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख माँगने गए। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि पुलिस हमें तारीख देगी। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो हम 24 घंटे के भीतर अगला कदम उठाएंगे।'
गौरतलब है कि रांका को रविवार को दिल्ली की एक अदालत से रिहाई मिली थी। रिहाई के कुछ घंटों बाद उन्होंने दावा किया कि 'पिछले 72 घंटों में देश ने तानाशाही का चरम देखा है' और देश भर से हज़ारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
सरकार पर गंभीर आरोप
सीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को अपने खिलाफ एक आंदोलन में बदल रही है। रांका ने दावा किया, 'जो लड़ाई शुरू में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ थी, उसे सरकार ने अपने खिलाफ लड़ाई में तब्दील कर दिया है।' यह बयान रविवार को सीजेपी द्वारा लगाए गए उस आरोप के एक दिन बाद आया जिसमें कहा गया था कि सरकार इस आंदोलन से 'डरी हुई' है।
आम जनता और संवैधानिक प्रश्न
यह विवाद उस वक्त और अहम हो जाता है जब देश में विरोध प्रदर्शन के अधिकार और उस पर प्रशासनिक नियंत्रण के बीच टकराव की एक बड़ी बहस चल रही है। जंतर-मंतर परंपरागत रूप से देश में लोकतांत्रिक विरोध का प्रमुख स्थल रहा है, और इस पर प्रतिबंध या देरी को आलोचकों द्वारा नागरिक स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा जाता है।
आगे क्या होगा
अब नज़रें दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं — अगर अगले 24 घंटों में पुलिस की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला, तो सीजेपी के अगले कदम की घोषणा होने की संभावना है। पार्टी का कहना है कि वह किसी भी स्थिति में अपना आंदोलन जारी रखेगी।