15 अक्टूबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार ने पूरा तंत्र झोंका: सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके

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सीईसी ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार ने पूरा तंत्र झोंका: सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके

सारांश

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके का दावा है कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की पूरी मशीनरी सिर्फ सीईसी ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए उतारी गई — रेलवे बंद, मेट्रो ठप, जम्मू-कश्मीर के सुरक्षाबल बुलाए गए। 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में तिरंगा सभा का आह्वान।

मुख्य बातें

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर की पुलिस कार्रवाई सिर्फ सीईसी ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए हुई।
दिपके के अनुसार कार्रवाई में राहुल गांधी , ममता बनर्जी , अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन तक को हिरासत में लिया गया।
कथित तौर पर 10 अक्टूबर को दिल्ली में रेलवे, मेट्रो बंद की गई और जम्मू-कश्मीर से सुरक्षाबल बुलाए गए।
सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अभी न्यायिक हिरासत में हैं; उन पर तिरंगा फहराने को कानून-उल्लंघन बताया गया।
16 अक्टूबर शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'तिरंगा सभा' का आयोजन; वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण , अभिनेता प्रकाश राज और आइशी घोष सहित कई नेता उपस्थित।

सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों पर की गई पुलिस कार्रवाई का एकमात्र उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को सुरक्षित रखना था। दिपके के अनुसार, इस मकसद के लिए सरकार ने अपना पूरा प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र लगा दिया।

मुख्य आरोप: एक व्यक्ति के लिए पूरा तंत्र

दिपके ने कहा, 'जब से चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर मीडिया रिपोर्ट छपी है, तब से सरकार अपने पूरे तंत्र और मशीनरी का इस्तेमाल ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए कर रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में छात्र संगठनों और युवाओं को 'सिर्फ एक व्यक्ति को बचाने के लिए सड़कों पर घसीटा जा रहा है।'

दिपके के अनुसार, इस कार्रवाई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन तक को हिरासत में लिया गया। यह आरोप राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत गंभीर है, क्योंकि इनमें कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हैं।

10 अक्टूबर की कार्रवाई का ब्यौरा

दिपके ने दावा किया कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों के दौरान रेलवे सेवाएँ बंद कर दी गईं, दिल्ली मेट्रो और मेट्रो स्टेशन बंद किए गए, और कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बल बुलाए गए। उन्होंने कहा, 'शायद देश में यह पहली बार था जब रेलवे को बंद कर दिया गया और यह भी सिर्फ ज्ञानेश कुमार के लिए।'

गौरतलब है कि सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में रखा गया है। दिपके ने आरोप लगाया कि 'तिरंगा फहराने को भी कानून का उल्लंघन बता दिया गया।'

लोकतंत्र पर तीखा सवाल

दिपके ने कहा, 'एक देश, एक चुनाव तो बस एक नारा है, असल मकसद एक देश, एक पार्टी है।' उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर छात्र नेताओं, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को इस तरह हिरासत में रखना है, तो आधिकारिक रूप से आपातकाल घोषित कर दिया जाए।

उन्होंने सीईसी की भूमिका पर प्रश्न उठाते हुए कहा, 'सरकार के लिए ज्ञानेश कुमार इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? अगर वह भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) को चुनाव जीतने में मदद नहीं कर रहे हैं, तो उन्हें इतनी सुरक्षा क्यों दे रहे हैं?'

तिरंगा सभा की अपील

दिपके ने 16 अक्टूबर को नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे 'तिरंगा सभा' आयोजित करने की घोषणा की। यह सभा सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा लहराने के लिए रखी गई है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, नागरिक समाज, मजदूर और किसान यूनियनों से राजनीतिक मतभेद भुलाकर इस सभा में शामिल होने का आग्रह किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित प्रमुख चेहरे

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और अभिनेता प्रकाश राज भी उपस्थित थे। इन सभी ने सभा को संबोधित किया, जो इस आंदोलन को व्यापक राजनीतिक और नागरिक समाज का समर्थन मिलने का संकेत देता है।

आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव और तेज होने की आशंका है, विशेष रूप से 16 अक्टूबर की तिरंगा सभा से पहले।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण, आइशी घोष और प्रकाश राज जैसे चेहरों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता का सवाल अब एक व्यापक नागरिक चिंता बन चुका है। रेलवे और मेट्रो बंद करने के आरोप — अगर सत्यापित होते हैं — तो यह नीतिगत असहमति को दबाने का एक असाधारण उदाहरण होगा। मुख्यधारा की कवरेज इस घटनाक्रम को महज विपक्षी राजनीति के रूप में प्रस्तुत कर रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेद की खबर इतने बड़े राजनीतिक तूफान की वजह क्यों बनी — और सरकार उस सवाल का जवाब देने की बजाय प्रदर्शनकारियों को रोकने में क्यों लगी है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत दिपके ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों पर की गई पुलिस कार्रवाई सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए थी। उनके अनुसार सरकार ने इस उद्देश्य के लिए रेलवे, मेट्रो बंद की और जम्मू-कश्मीर से सुरक्षाबल बुलाए।
10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों में क्या हुआ था?
दिपके के अनुसार 10 अक्टूबर को सीजेपी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें छात्र संगठनों और युवाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान कथित तौर पर दिल्ली में रेलवे और मेट्रो सेवाएँ बंद की गईं, और सीजेपी नेता सौरव दास व आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया।
सौरव दास और आशुतोष रांका को क्यों गिरफ्तार किया गया?
दिपके के अनुसार सीजेपी के दोनों सह-संयोजकों — सौरव दास और आशुतोष रांका — को कथित तौर पर तिरंगा फहराने के आरोप में हिरासत में लिया गया और वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं। दिपके ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं हो सकता।
तिरंगा सभा क्या है और कब होगी?
तिरंगा सभा 16 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित होगी। यह सभा सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा लहराने के लिए है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को आमंत्रित किया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवाद में क्यों हैं?
दिपके के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों को लेकर मीडिया रिपोर्ट आने के बाद से सरकार ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा के लिए असाधारण कदम उठा रही है। हालाँकि, इन आरोपों की सरकार या चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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