PM रोजगार योजना के नाम पर करोड़ों की ठगी, ग्रेटर नोएडा में 6 साइबर ठग गिरफ्तार

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PM रोजगार योजना के नाम पर करोड़ों की ठगी, ग्रेटर नोएडा में 6 साइबर ठग गिरफ्तार

सारांश

सरकारी योजना की आड़ में करोड़ों की ठगी — ग्रेटर नोएडा में पकड़े गए 6 साइबर ठग PMEGP के नाम पर फर्जी लोन अधिकारी बनकर लोगों से ₹2-4 लाख वसूल रहे थे। की-पैड फोन, बदलते सिम और एक अदृश्य 'बॉस' — यह गिरोह देशभर में फैला था।

मुख्य बातें

बिसरख पुलिस और साइबर सेल ने 13 मई 2026 को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-1 से 6 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया।
गिरोह PMEGP के नाम पर सब्सिडी लोन का झाँसा देकर प्रति पीड़ित ₹2 लाख से ₹4 लाख तक वसूलता था।
बरामदगी में 18 की-पैड मोबाइल फोन , 6 स्मार्टफोन और 15 कॉलिंग डेटा रजिस्टर शामिल।
सभी आरोपी कर्नाटक के बीजापुर और विजयपुर के निवासी बताए जा रहे हैं।
गिरोह का एक कथित 'बॉस' अभी भी फरार; पुलिस मास्टरमाइंड और अन्य राज्यों से संभावित संबंधों की जाँच कर रही है।

गौतमबुद्धनगर की बिसरख पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में 14 मई 2026 को एक बड़े साइबर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ, जो प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के नाम पर सब्सिडी लोन दिलाने का झाँसा देकर देशभर के लोगों से करोड़ों रुपये ठग रहा था। पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 18 की-पैड मोबाइल फोन, 6 स्मार्टफोन और 15 रजिस्टर बरामद किए हैं।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, 13 मई को मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर बिसरख थाना पुलिस एवं साइबर सेल ने संयुक्त अभियान चलाया। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-1 स्थित कृष्णा काउंटी टॉवर-ए की छत से छह आरोपियों को दबोचा गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धर्मराज राठौर, रवि कुमार, किशन राठौर, अक्षय, किरण नायर और किरण बाबू राठौर के रूप में हुई है। सभी आरोपी कथित तौर पर कर्नाटक के बीजापुर और विजयपुर क्षेत्र के निवासी हैं।

ठगी का तरीका

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आधार कार्ड और पैन कार्ड से जुड़े आकर्षक विज्ञापन चलाते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति विज्ञापन पर क्लिक करता, उसे आरोपियों का मोबाइल नंबर दिखता था।

इसके बाद आरोपी खुद को फर्जी लोन अधिकारी बताकर पीड़ितों को PMEGP के तहत सब्सिडी आधारित होम लोन दिलाने का भरोसा देते थे। फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर पीड़ितों से ₹2 लाख से ₹4 लाख तक अलग-अलग बैंक खातों में जमा करा लिए जाते थे।

गिरोह का नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह देशभर में फैला हुआ था और इसने अब तक करोड़ों रुपये की ठगी की है। आरोपी पहचान छिपाने के लिए की-पैड मोबाइल फोन का उपयोग करते थे और लगातार सिम कार्ड बदलते रहते थे। गिरोह का संचालन एक कथित 'बॉस' के निर्देश पर हो रहा था, जिससे आरोपी मोबाइल फोन के जरिये संपर्क में रहते थे।

ठगी से मिली रकम को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी योजनाओं के नाम पर साइबर ठगी के मामले पूरे देश में तेजी से बढ़ रहे हैं।

आगे की जाँच

पुलिस ने थाना बिसरख में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल जाँच एजेंसियाँ गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी हैं। साथ ही यह भी जाँचा जा रहा है कि इस नेटवर्क के तार देश के अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रहे इन फर्जी विज्ञापनों को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है — और वह जिम्मेदारी अभी तक क्यों नहीं निभाई जा रही।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PMEGP के नाम पर हुई ठगी में आरोपियों ने क्या तरीका अपनाया?
आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन चलाकर खुद को सरकारी लोन अधिकारी बताते थे और PMEGP के तहत सब्सिडी लोन दिलाने का झाँसा देते थे। इसके बाद फाइल चार्ज और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पीड़ितों से ₹2 लाख से ₹4 लाख तक वसूले जाते थे।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और कहाँ के रहने वाले हैं?
गिरफ्तार छह आरोपियों के नाम धर्मराज राठौर, रवि कुमार, किशन राठौर, अक्षय, किरण नायर और किरण बाबू राठौर हैं। ये सभी कथित तौर पर कर्नाटक के बीजापुर और विजयपुर क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या बरामद किया?
आरोपियों के कब्जे से 18 की-पैड मोबाइल फोन, 6 स्मार्टफोन और कॉलिंग डेटा से जुड़े 15 रजिस्टर बरामद किए गए। ये उपकरण पहचान छिपाने और पीड़ितों से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।
क्या इस गिरोह का मास्टरमाइंड पकड़ा गया है?
अभी तक नहीं। पुलिस के अनुसार गिरोह का संचालन एक कथित 'बॉस' के निर्देश पर होता था, जो अभी भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और यह भी जाँच रही है कि नेटवर्क के तार अन्य राज्यों से जुड़े हैं या नहीं।
PMEGP क्या है और इसके नाम पर ठगी से कैसे बचें?
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) केंद्र सरकार की एक वैध योजना है जो स्वरोजगार के लिए सब्सिडी आधारित लोन प्रदान करती है। इसके लिए आवेदन केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल के माध्यम से होता है — सोशल मीडिया विज्ञापनों पर भरोसा न करें और किसी भी अनजान व्यक्ति को फीस न दें।
राष्ट्र प्रेस
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