दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर 'नो-हॉकिंग, नो-वेंडिंग जोन' घोषित, 12 अक्टूबर से हटेंगे अनधिकृत वेंडर
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश में नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर के एक विशेष चिह्नित हिस्से को छोड़कर शेष संपूर्ण इलाके को 'नो-हॉकिंग जोन' और 'नो-वेंडिंग जोन' घोषित कर दिया है। कोर्ट ने 90 पहचाने गए वेंडर्स को टाउन वेंडिंग कमेटी-II के अंतिम निर्णय तक किसी वैकल्पिक स्थान से कारोबार जारी रखने की अनुमति दी है।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की डिवीजन बेंच ने नेहरू प्लेस इलाके में हॉकिंग और वेंडिंग गतिविधियों से संबंधित कई याचिकाओं एवं अवमानना मामलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। बेंच ने कहा कि 26 सितंबर को याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों द्वारा रिकॉर्ड पर रखी गई तस्वीरें इस बात की पुष्टि करती हैं कि नेहरू प्लेस को 'नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन' घोषित करने के फैसले की पुनः पुष्टि होनी चाहिए।
बेंच ने पाया कि फिलहाल नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में 400 से अधिक वेंडर सक्रिय हैं, जिनमें से अधिकांश स्पष्ट रूप से अनधिकृत हैं। इनमें से केवल 90 वेंडरों की पहचान ऐसे लोगों के रूप में की गई है जिन्हें आवश्यक संरक्षण या मान्यता प्राप्त है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के 9 अप्रैल 2026 के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि वेंडरों को हटाने की प्रक्रिया सावधानी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ संपन्न की जानी चाहिए। उस फैसले के अनुसार, संबंधित अधिकारियों का दायित्व है कि वे वेंडरों को निर्धारित 'वेंडिंग जोन' में स्थानांतरित होने में सक्रिय रूप से सहायता करें।
इस आदेश में 'स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम 2014' के तहत संरक्षण प्राप्त वेंडरों के अधिकारों का भी ध्यान रखा गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई स्ट्रीट वेंडर 'नो-वेंडिंग जोन' में काम कर रहा है, तो दिल्ली नगर निगम (MCD) या संबंधित प्राधिकरण का यह कर्तव्य है कि वह उन्हें 'वेंडिंग जोन' में जाने में मदद करे ताकि वे अपनी आजीविका बनाए रख सकें।
12 अक्टूबर के बाद क्या होगा
कोर्ट ने आदेश दिया कि 12 अक्टूबर 2026 के बाद दिल्ली नगर निगम नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर से सभी अनधिकृत वेंडरों को हटाने के लिए स्वतंत्र होगा। दिल्ली फायर सर्विस को निर्देश दिया गया है कि अनधिकृत वेंडरों के हटाए जाने के बाद वह इलाके का निरीक्षण करे और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।
दिल्ली पुलिस को भी आदेश दिया गया है कि वह इस निर्णय का पालन सुनिश्चित कराने के लिए MCD और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) का सहयोग करे। दिल्ली फायर सर्विस की अनुपालन रिपोर्ट पर विचार के लिए यह मामला 30 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया जाएगा।
आम वेंडरों पर असर
यह फैसला उन सैकड़ों छोटे विक्रेताओं के जीवन को सीधे प्रभावित करता है जो वर्षों से नेहरू प्लेस में अपनी आजीविका चला रहे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में अनधिकृत वेंडिंग बनाम व्यावसायिक क्षेत्रों की सुरक्षा और व्यवस्था का मुद्दा लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन रहा है। 90 मान्यता प्राप्त वेंडरों को वैकल्पिक स्थान की अनुमति देकर कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि उनकी रोज़ी-रोटी पर तत्काल संकट न आए।
इस निर्णय के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि MCD और DDA मिलकर इन वेंडरों के लिए उचित और व्यावहारिक वैकल्पिक स्थान कितनी जल्दी उपलब्ध करा पाते हैं। 30 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होगी।