दिल्ली हाई कोर्ट में MCD का खुलासा: 2,453 में से सिर्फ 512 PG ही नियमानुसार, 543 प्रॉपर्टी ध्वस्त
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने 25 सितंबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया कि राजधानी में संचालित 2,453 पेइंग गेस्ट (PG) सुविधाओं में से मात्र 512 ही मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुरूप हैं। यह खुलासा सत्य निकेतन में 6 सितंबर को पाँच मंजिला PG इमारत 'हॉस्टल डेज' के ढहने से हुई मौतों के बाद दाखिल की गई कार्रवाई रिपोर्ट में सामने आया।
हलफनामे में MCD की स्वीकारोक्ति
MCD के हलफनामे के अनुसार, दिल्ली में अभी 2,453 PG चल रहे हैं, जिनमें 32,247 कमरे हैं और करीब 50,529 लोग रहते हैं। इनमें से 1,941 PG मास्टर प्लान की शर्तें पूरी किए बिना संचालित हो रहे हैं। अदालत ने नरेला जोन का उदाहरण सामने रखा, जहाँ 82 PG हैं, लेकिन उनमें से एक भी मास्टर प्लान के अनुकूल नहीं है।
अवैध निर्माण पर MCD की कार्रवाई
निगम ने अदालत को बताया कि हादसे के बाद से अब तक 543 प्रॉपर्टी ध्वस्त की जा चुकी हैं, 178 प्रॉपर्टी सील की गई हैं और 354 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा, जवाबदेही तय करते हुए संबंधित जोन के पाँच अधिकारियों को निलंबित किया गया है — जिनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं।
हाई कोर्ट के सवाल और टिप्पणियाँ
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने PG की वैधता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि जो PG मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं हैं, उनकी कानूनी स्थिति क्या है और क्या उन्हें बंद किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में अनाधिकृत निर्माण और कमज़ोर नियामक निगरानी को लेकर आम नागरिकों में गहरी चिंता बनी हुई है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी का जवाब अपर्याप्त
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अदालत को बताया कि उसके पास करीब 5,600 छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा है, जबकि याचिकाकर्ता के अनुसार विश्वविद्यालय में करीब 1.3 लाख छात्र पढ़ते हैं। हाई कोर्ट ने इस जवाब को अस्पष्ट करार देते हुए विश्वविद्यालय को नया और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि हॉस्टल क्षमता और छात्र संख्या के बीच यह भारी अंतर ही निजी PG व्यवसाय की जड़ में है।
आगे क्या होगा
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की है और दिल्ली यूनिवर्सिटी से नया हलफनामा माँगा है। मास्टर प्लान के दायरे से बाहर चल रहे 1,941 PG की कानूनी स्थिति पर निर्णय अगली सुनवाई में स्पष्ट होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक PG के लिए अलग विनियामक ढाँचा नहीं बनाया जाता, तब तक ऐसे हादसों का खतरा बना रहेगा।