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सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के PG छात्रों का दर्द: दरारें, रिसाव और ज़्यादा किराया

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सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के PG छात्रों का दर्द: दरारें, रिसाव और ज़्यादा किराया

सारांश

सत्य निकेतन की 50 साल पुरानी PG इमारत के ढहने से 7 की मौत के बाद दिल्ली के छात्रों ने दरारों और रिसाव वाले कमरों में रहने की मजबूरी बयान की। दिल्ली हाईकोर्ट ने नागरिक अधिकारियों से दो हफ्तों में रिपोर्ट माँगी है, और मालिक हरिराम गुप्ता परिवार सहित गिरफ्तार हैं।

मुख्य बातें

सत्य निकेतन में 'हॉस्टल डेज़' PG इमारत के ढहने से 7 लोगों की मौत और 5 घायल हुए; इमारत कथित तौर पर 50 साल पुरानी थी।
दिल्ली के PG छात्रों ने दरारें, पानी का रिसाव और अत्यधिक किराये जैसी खतरनाक परिस्थितियाँ उजागर कीं।
प्रभावित छात्रों को अस्थायी रूप से शहीद भगत सिंह कॉलेज के सेमिनार हॉल में शिफ्ट किया गया।
दिल्ली पुलिस ने मालिक 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता (सेवानिवृत्त वायु सेना सार्जेंट) को उनकी पत्नी और बेटे सहित गिरफ्तार किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने नागरिक अधिकारियों को PG इमारतों का निरीक्षण कर दो हफ्तों में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
एफआईआर के अनुसार, मालिकों को कथित तौर पर पुरानी नींव की कमज़ोरी की जानकारी थी, फिर भी अतिरिक्त निर्माण कराया गया।

नई दिल्ली में सत्य निकेतन की 'हॉस्टल डेज़' पीजी इमारत के रविवार को ढहने से 7 लोगों की मौत और 5 के घायल होने के बाद, राजधानी के पेइंग गेस्ट (PG) और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों ने बुधवार, 9 सितंबर को अपनी खतरनाक रहने की परिस्थितियों को उजागर किया। छात्रों ने दरारों वाले कमरों, मॉनसून में पानी के रिसाव और अत्यधिक किराये की समस्याएँ गिनाईं। यह हादसा उस बड़े संकट की ओर इशारा करता है, जिसमें शिक्षा की तलाश में दिल्ली आने वाले लाखों छात्र असुरक्षित इमारतों में रहने को मजबूर हैं।

छात्रों की आपबीती

एक छात्र ने बताया, 'पीजी में कई दरारें थीं और बिल्डिंग की हालत बहुत खराब थी। हम जिस कमरे में रह रहे थे, वह बहुत छोटा था और कभी-कभी कमरे में पानी आ जाता था। किराया भी बहुत ज़्यादा था। बारिश के दौरान कमरे में पानी रिसता था।' यह शिकायत अकेली नहीं है — दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के आसपास ऐसे दर्जनों पीजी हैं जहाँ छात्र इसी तरह की परिस्थितियों में रहते हैं।

सत्य निकेतन हादसे के बाद कुछ प्रभावित छात्रों को अस्थायी रूप से शहीद भगत सिंह कॉलेज के सेमिनार हॉल में शिफ्ट किया गया है। एक अन्य छात्र ने कहा, 'हम अभी शहीद भगत सिंह कॉलेज के सेमिनार हॉल में रह रहे हैं। फिलहाल हमें रहने और खाने की सुविधा दी गई है। यह जानकर अच्छा लग रहा है कि कॉलेज इस मुश्किल समय में हमारे साथ खड़ा है।'

हादसे का पूरा घटनाक्रम

ढही हुई इमारत को 'हॉस्टल डेज़' पीजी के नाम से जाना जाता था। यह ग्राउंड फ्लोर सहित कुल पाँच मंजिला इमारत थी और कथित तौर पर लगभग 50 साल पुरानी थी। इमारत मालिक गुप्ता परिवार ने हाल ही में इसमें मरम्मत करवाई थी और इसे पीजी में बदल दिया था। आरोप है कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निकटता और इलाके में छात्रावास की भारी माँग का फायदा उठाया।

एफआईआर के अनुसार, मालिकों को कथित तौर पर पता था कि इमारत की पुरानी नींव अतिरिक्त वजन उठाने में सक्षम नहीं थी, फिर भी अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण जारी रखा गया। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि इस अतिरिक्त निर्माण ने इमारत की संरचनात्मक मजबूती और भार-वहन क्षमता पर अत्यधिक दबाव डाला।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता — जो भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट हैं — को उनकी पत्नी और बेटे सहित गिरफ्तार किया है। तीनों पर लापरवाही और अवैध निर्माण से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के संज्ञान में भी आया है। न्यायालय ने नागरिक अधिकारियों को राजधानी के पीजी और किराये की इमारतों का निरीक्षण कर उनकी संरचनात्मक और कानूनी स्थिति की जाँच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस संबंध में दो हफ्तों के भीतर रिपोर्ट तलब की है।

आम छात्रों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में छात्रों के लिए किफायती और सुरक्षित आवास की कमी पहले से ही एक गंभीर समस्या है। गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले हज़ारों छात्र अनियमित पीजी में रहते हैं, जहाँ न तो नियमित सुरक्षा जाँच होती है और न ही किराये पर कोई नियंत्रण।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना लाइसेंस के चल रहे पीजी और हॉस्टलों की संख्या दिल्ली में हज़ारों में है और अधिकांश नगर निगम के दायरे से बाहर हैं। अदालत के निर्देश के बाद होने वाला निरीक्षण इस दिशा में पहला ठोस कदम हो सकता है।

आगे क्या होगा

दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, नागरिक अधिकारियों की निरीक्षण रिपोर्ट दो हफ्तों में आने की उम्मीद है। इसके साथ ही, हरिराम गुप्ता और उनके परिवार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी जारी है। छात्र संगठनों ने माँग की है कि सरकार सभी पीजी के लिए अनिवार्य संरचनात्मक ऑडिट और किराया नियमन लागू करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लापरवाह निरीक्षण और छात्रों की आवास-माँग का व्यावसायिक शोषण एक साथ चलता रहा। दिल्ली उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप स्वागतयोग्य है, लेकिन सवाल यह है कि दो हफ्तों की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई कितनी टिकाऊ होगी — क्योंकि इससे पहले भी ऐसे निर्देश आए और धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चले गए। असली ज़िम्मेदारी उन नागरिक निकायों की है जिन्होंने वर्षों तक अवैध निर्माण को नज़रअंदाज़ किया; गिरफ्तारी ज़रूरी है, पर पर्याप्त नहीं — बिना संरचनात्मक सुधार के यह त्रासदी दोहराई जाएगी।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्य निकेतन इमारत हादसा क्या है?
नई दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 'हॉस्टल डेज़' नामक PG इमारत रविवार को ढह गई, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई और 5 घायल हुए। यह इमारत कथित तौर पर लगभग 50 साल पुरानी थी और हाल ही में मरम्मत के बाद पीजी में बदली गई थी।
सत्य निकेतन हादसे में किसे गिरफ्तार किया गया?
दिल्ली पुलिस ने इमारत मालिक 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता — जो भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट हैं — को उनकी पत्नी और बेटे सहित गिरफ्तार किया है। एफआईआर के अनुसार, मालिकों को कथित तौर पर इमारत की कमज़ोर नींव की जानकारी थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिए?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने नागरिक अधिकारियों को राजधानी के PG और किराये की इमारतों की संरचनात्मक व कानूनी स्थिति की जाँच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने दो हफ्तों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
हादसे के बाद प्रभावित छात्रों को कहाँ रखा गया?
सत्य निकेतन हादसे के बाद कुछ प्रभावित छात्रों को अस्थायी रूप से शहीद भगत सिंह कॉलेज के सेमिनार हॉल में शिफ्ट किया गया है, जहाँ उन्हें रहने और खाने की सुविधा दी गई है।
दिल्ली के PG छात्रों की मुख्य समस्याएँ क्या हैं?
छात्रों ने दरारों वाली इमारतों, मॉनसून में पानी के रिसाव, बेहद छोटे कमरों और अत्यधिक किराये की शिकायतें की हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में हज़ारों PG बिना लाइसेंस और नियमित सुरक्षा जाँच के संचालित हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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