सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीजी ऑपरेटर सुधांशु समेत 5 गिरफ्तार, बेसमेंट मरम्मत के दौरान गिरी थी इमारत
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार, 7 सितंबर 2025 को दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर एक पाँच मंजिला इमारत के ढहने से 7 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बुधवार, 9 सितंबर को पीजी ऑपरेटर सुधांशु की गिरफ्तारी की पुष्टि की और बताया कि अब तक कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच में सामने आया है कि इमारत के बेसमेंट में उसी दिन मरम्मत का काम चल रहा था।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, 'हॉस्टल डेज' नाम से चलाई जा रही यह पाँच मंजिला इमारत लड़कों के पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास के रूप में संचालित थी। घटना के समय वहाँ कई छात्र मौजूद थे। इमारत के बेसमेंट में उस दिन फर्श की मरम्मत की जा रही थी, क्योंकि पिछले 8 से 10 दिनों से बारिश के कारण वहाँ कचरा जमा हो रहा था। इसके साथ ही, व्यावसायिक उपयोग के लिए जगह बढ़ाने के उद्देश्य से ग्राउंड फ्लोर की भी मरम्मत की जा रही थी।
गिरफ्तारियाँ और पुलिस रिमांड
पुलिस ने इस मामले में अब तक जिन पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें भवन मालिक हरिराम बंसल का बेटा महेश बंसल, उसकी माँ उर्मिला, पीजी ऑपरेटर सुधांशु, उसका कारोबारी साझेदार शुभम त्यागी, और उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा गया लेबर कॉन्ट्रैक्टर शामिल हैं। उर्मिला और हरिराम बंसल को मंगलवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। महेश बंसल को सोमवार को 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया था और उसे बुधवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाना था।
पूछताछ में क्या सामने आया
पुलिस रिमांड के दौरान महेश बंसल ने बताया कि वह अपने माता-पिता की ओर से इमारत के रखरखाव का काम देखता था। उसने स्वीकार किया कि अगस्त 2025 से यह इमारत शुभम त्यागी और सुधांशु को लीज पर दी गई थी, जो इसे 'हॉस्टल डेज' के नाम से पीजी के रूप में संचालित कर रहे थे। इसी खुलासे के बाद पुलिस ने सुधांशु की तलाश शुरू की और उसे गिरफ्तार किया।
लेबर कॉन्ट्रैक्टर की गिरफ्तारी
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कासगंज से उस लेबर कॉन्ट्रैक्टर को गिरफ्तार किया, जो इमारत के बेसमेंट में मरम्मत कार्य की निगरानी कर रहा था। प्रारंभिक पूछताछ में उसने बताया कि हादसे वाले दिन बेसमेंट के फर्श की मरम्मत चल रही थी। गौरतलब है कि इमारत में एक साथ बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर दोनों पर निर्माण कार्य किया जा रहा था, जो संरचनात्मक दृष्टि से अत्यंत जोखिमभरा होता है।
आगे की जाँच
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जाँच जारी है। यह हादसा ऐसे समय में सामने आया है जब राजधानी में अवैध निर्माण और अनधिकृत पीजी संचालन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इमारत में कोई अनधिकृत निर्माण हुआ था और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।