जोधपुर हाईकोर्ट भवन निर्माण घोटाला: SIT जांच के बाद 7 गिरफ्तार, RSRDC अधिकारी भी दायरे में
सारांश
मुख्य बातें
जोधपुर पुलिस ने 9 सितंबर 2026 को राजस्थान उच्च न्यायालय के नए भवन में गंभीर निर्माण दोषों और अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में सात लोगों को गिरफ्तार किया और एक आठवें संदिग्ध को हिरासत में लिया। पुलिस आयुक्त अंशुमन भोमिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एक विशेष जांच दल (SIT) ने निर्माण कंपनी, अग्नि सुरक्षा प्रणाली से जुड़ी फर्मों और परियोजना की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिकाओं को संदिग्ध पाया है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, राजस्थान उच्च न्यायालय के नए भवन का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था और 2019 में इसे सौंपा गया। हस्तांतरण के बाद से ही कई गंभीर खामियाँ सामने आईं — फॉल्स सीलिंग का गिरना, कोर्टरूम नंबर 2 में आग लगना, केंद्रीय गुंबद में दरारें और स्तंभों को क्षति। यह ऐसे समय में सामने आया जब न्यायपालिका की अधोसंरचना की गुणवत्ता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
इन खामियों की पहचान के बाद IIT जोधपुर, IIT बॉम्बे और PTMES सहित कई संस्थानों ने भवन का तकनीकी ऑडिट और सर्वेक्षण किया। इन आकलनों के आधार पर पुलिस ने SIT गठित की और फोरेंसिक जांच के लिए भवन से नमूने एकत्र किए।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं
गिरफ्तार किए गए लोगों में राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) के कई अधिकारी शामिल हैं। इनमें जितेंद्र शर्मा (तत्कालीन सहायक अभियंता, RSRDC), नवीन राय (तत्कालीन परियोजना प्रबंधक, RSRDC), दीपक मित्तल (पूर्व RSRDC कर्मी, वर्तमान में जयपुर में कार्यकारी अभियंता) और अजय किशन मुथा (तत्कालीन सहायक अभियंता, RSRDC) शामिल हैं।
अग्नि सुरक्षा प्रणाली की स्थापना से जुड़े रामेश्वर दयाल और गोपाल लाल को भी गिरफ्तार किया गया है। परियोजना से जुड़ी प्रमुख निर्माण कंपनी VCL ग्रुप / वरेंद्र कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक वरेंद्र गर्ग को सोमवार देर रात हरिद्वार से हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, गर्ग गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था।
बहु-राज्यीय छापेमारी और जांच का दायरा
संदिग्धों का पता लगाने के लिए पुलिस ने 12 विशेष टीमें और 4 साइबर टीमें गठित कीं। राजस्थान के जोधपुर, जयपुर, कोटा, बूंदी और अजमेर के अलावा दिल्ली-NCR, गुरुग्राम, नोएडा, पटियाला, कपूरथला (पंजाब) और हरिद्वार (उत्तराखंड) में छापेमारी की गई। गर्ग की गिरफ्तारी में सहायक सूचना देने वाले के लिए ₹50,000 के इनाम की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी।
गौरतलब है कि SIT जांच में निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ता कंपनियों, कार्य एजेंसियों और अग्नि सुरक्षा प्रणाली स्थापित करने वाले व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। पुलिस आयुक्त के अनुसार, जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो कथित आपराधिक विश्वासघात की ओर इशारा करते हैं।
RSRDC की भूमिका जांच के दायरे में
परियोजना की देखरेख और पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार RSRDC के अधिकारियों की भूमिका जांच के केंद्र में है। यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी निर्माण परियोजना में निगरानी एजेंसी के अधिकारियों पर आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगे हों — आलोचकों का कहना है कि बड़े सरकारी अनुबंधों में तृतीय-पक्ष ऑडिट की व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
आगे क्या होगा
पुलिस ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। आठवें संदिग्ध की गिरफ्तारी की प्रक्रिया अभी चल रही है। जांचकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में अतिरिक्त व्यक्तियों, अधिकारियों या कंपनियों की संलिप्तता सामने आती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राजस्थान में सरकारी निर्माण परियोजनाओं की जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल छोड़ता है।