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जोधपुर हाई कोर्ट भवन की मरम्मत: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की तीसरी समीक्षा, IIT बॉम्बे रिपोर्ट पर जोर

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जोधपुर हाई कोर्ट भवन की मरम्मत: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की तीसरी समीक्षा, IIT बॉम्बे रिपोर्ट पर जोर

सारांश

राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जोधपुर हाई कोर्ट भवन की मरम्मत की तीसरी समीक्षा बैठक की। ₹27.41 करोड़ के पहले चरण में 24 में से 17 कोर्टरूम का काम पूरा; ₹30.24 करोड़ के दूसरे चरण की शुरुआत 20 सितंबर से। IIT बॉम्बे रिपोर्ट का इंतजार।

मुख्य बातें

श्रीनिवास ने 31 अगस्त 2026 को जोधपुर हाई कोर्ट भवन की मरम्मत पर तीसरी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
पहले चरण में ₹27.41 करोड़ की लागत से चल रहे कार्य में पहली मंजिल के 24 में से 17 कोर्टरूम की मरम्मत पूरी हो चुकी है।
दूसरे चरण के लिए ₹30.24 करोड़ की स्वीकृति जारी; कार्य 20 सितंबर से शुरू होगा।
प्रारंभिक परीक्षण में सेंट्रल डोम के गिरने का तत्काल खतरा नहीं; आईआईटी बॉम्बे की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 10 अगस्त 2026 को संरचनात्मक कमियों पर स्वतः संज्ञान लिया था।
मुख्य सचिव ने PWD को जवाबदेही और आवश्यकता पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को जयपुर स्थित सरकारी सचिवालय में जोधपुर के राजस्थान उच्च न्यायालय भवन के संरचनात्मक पुनर्वास (स्ट्रक्चरल रिहैबिलिटेशन) और सुरक्षा कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। यह उनकी अध्यक्षता में इस विषय पर आयोजित तीसरी समीक्षा बैठक थी, जो राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा 10 अगस्त 2026 को स्वतः संज्ञान लेने के बाद की जा रही नियमित निगरानी का हिस्सा है।

मुख्य निर्देश और प्राथमिकताएँ

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समय-सीमा के भीतर प्राथमिकता के आधार पर पूरे किए जाएँ और उच्च न्यायालय के निर्देशों का हर बिंदु पर पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आगामी सुनवाई को ध्यान में रखते हुए तथ्य-आधारित, अद्यतन प्रगति रिपोर्ट तैयार रखने पर भी बल दिया।

वी. श्रीनिवास ने इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार के समझौते की संभावना को सिरे से नकारते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि आईआईटी बॉम्बे से विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट शीघ्रातिशीघ्र प्राप्त की जाए और उसकी सिफारिशों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

जवाबदेही और अनुशासनात्मक कार्रवाई

निर्माण कार्य पर हुए व्यय और पाई गई कमियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने जिम्मेदारी तय करने और आवश्यकता पड़ने पर तय समय-सीमा के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिया कि जवाबदेही को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में 17 अगस्त को जारी निर्देशों के पालन और 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) की स्थिति की भी समीक्षा की गई। श्रीनिवास ने तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा किए गए परीक्षणों और उनके परिणामों की जानकारी माँगी तथा सभी लंबित रिपोर्ट तुरंत प्राप्त करने के निर्देश दिए।

मरम्मत कार्य की वर्तमान स्थिति

PWD के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने बैठक में बताया कि आईआईटी बॉम्बे द्वारा अनुमोदित पद्धति के अनुसार, अधिक और मध्यम संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों में ₹27.41 करोड़ की लागत से पहले चरण का संरचनात्मक पुनर्वास कार्य चल रहा है। पहली मंजिल पर स्थित 24 कोर्टरूम में से 17 का कार्य पूर्ण हो चुका है।

इसके अलावा छत की वॉटरप्रूफिंग और सेंट्रल डोम (मुख्य गुंबद) सहित प्रमुख क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा और पुनर्स्थापना कार्य भी जारी हैं। दूसरे चरण के लिए ₹30.24 करोड़ की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है और यह कार्य 20 सितंबर से प्रारंभ होना निर्धारित है।

सेंट्रल डोम: तत्काल खतरा नहीं, आगे की जाँच जारी

सेंट्रल डोम के संदर्भ में प्रवीण गुप्ता ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग से यह सामने आया है कि इसके गिरने का कोई तत्काल खतरा नहीं है। आगे की कार्रवाई आईआईटी बॉम्बे की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

गौरतलब है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 10 अगस्त 2026 को जोधपुर की मुख्य कोर्ट बिल्डिंग में सेंट्रल डोम और अन्य संरचनात्मक कमियों से जुड़े मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद राज्य सरकार नियमित समीक्षा कर रही है।

बैठक में उपस्थित अधिकारी

बैठक में PWD के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता, PWD के मुख्य अभियंता, वित्त विभाग, विधि विभाग और राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आईआईटी जोधपुर और आईआईटी बॉम्बे के प्रतिनिधियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया। आईआईटी बॉम्बे की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद अगले कदमों की दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे कितने वर्षों से नजरअंदाज होती रहीं और PWD की आंतरिक निगरानी व्यवस्था कहाँ चूकी। IIT बॉम्बे की रिपोर्ट केवल तकनीकी दस्तावेज नहीं होगी — वह जवाबदेही की परीक्षा भी होगी। यदि रिपोर्ट गंभीर संरचनात्मक लापरवाही उजागर करती है, तो केवल प्रगति रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोधपुर हाई कोर्ट भवन में क्या समस्या है?
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 10 अगस्त 2026 को जोधपुर की मुख्य कोर्ट बिल्डिंग में सेंट्रल डोम और अन्य संरचनात्मक कमियों पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद IIT बॉम्बे की देखरेख में संरचनात्मक पुनर्वास कार्य शुरू किया गया।
मरम्मत कार्य पर कुल कितना खर्च होगा?
पहले चरण में ₹27.41 करोड़ की लागत से काम चल रहा है, जबकि दूसरे चरण के लिए ₹30.24 करोड़ की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है। दोनों चरणों को मिलाकर कुल व्यय ₹57.65 करोड़ से अधिक होगा।
सेंट्रल डोम को लेकर क्या स्थिति है?
प्रारंभिक नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग के अनुसार सेंट्रल डोम के गिरने का कोई तत्काल खतरा नहीं है। आगे की कार्रवाई IIT बॉम्बे की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद तय की जाएगी।
दूसरे चरण का काम कब शुरू होगा?
दूसरे चरण का कार्य 20 सितंबर 2026 से शुरू होना निर्धारित है। इसके लिए ₹30.24 करोड़ की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति पहले ही जारी की जा चुकी है।
मुख्य सचिव ने PWD को क्या निर्देश दिए?
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने PWD को जवाबदेही प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने, निर्माण की कमियों के लिए जिम्मेदारी तय करने और जहाँ जरूरी हो तय समय-सीमा में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही IIT बॉम्बे से तकनीकी रिपोर्ट शीघ्र प्राप्त करने पर भी जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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