12 अगस्त 2026
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जगन्नाथपुर मंदिर विवाद: झारखंड हाईकोर्ट में संशोधित स्कीम पेश, 11 सदस्यीय कमेटी 3 सितंबर तक देगी रिपोर्ट

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जगन्नाथपुर मंदिर विवाद: झारखंड हाईकोर्ट में संशोधित स्कीम पेश, 11 सदस्यीय कमेटी 3 सितंबर तक देगी रिपोर्ट

सारांश

रांची के जगन्नाथपुर मंदिर का प्रबंधन विवाद अब झारखंड हाईकोर्ट में निर्णायक मोड़ पर है। न्यास बोर्ड की संशोधित स्कीम पर 11 सदस्यीय कमेटी 3 सितंबर तक रिपोर्ट देगी — 2021 से चले आ रहे इस विवाद में पारदर्शिता, सुरक्षा और वित्तीय जवाबदेही तीनों दाँव पर हैं।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट में 12 अगस्त 2026 को जगन्नाथपुर मंदिर प्रबंधन विवाद की सुनवाई हुई।
झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर संचालन की संशोधित स्कीम अदालत में पेश की।
महाधिवक्ता रोहित राय की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कमेटी गठित; 3 सितंबर तक रिपोर्ट देनी होगी।
अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत में निर्धारित।
अप्रैल 2026 में मंदिर परिसर में सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या के बाद से सुरक्षा व्यवस्था भी विवाद का हिस्सा है।
अंतरिम व्यवस्था के तहत रांची उपायुक्त को प्रतिमाह ₹30,000 मंदिर संचालन हेतु उपलब्ध कराने का आदेश पहले से लागू।

रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के प्रबंधन विवाद में 12 अगस्त 2026 को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसमें झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर के संचालन की संशोधित स्कीम अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। अदालत ने इस स्कीम के गहन अध्ययन के लिए महाधिवक्ता रोहित राय की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जिसे 3 सितंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने गठित कमेटी को निर्देश दिया है कि वह संशोधित स्कीम का विधिसम्मत परीक्षण करे और 3 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। बोर्ड की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने न्यास बोर्ड को झारखंड हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड अधिनियम की धारा 32 के तहत विधिसम्मत स्कीम तैयार कर प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। उसी निर्देश के अनुपालन में बोर्ड ने यह संशोधित स्कीम अदालत में दाखिल की।

विवाद की पृष्ठभूमि

जगन्नाथपुर मंदिर प्रबंधन का यह विवाद वर्ष 2021 में उस समय सतह पर आया, जब झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर की पुरानी प्रबंधन समिति को हटाकर 8 जुलाई 2021 को नई समिति का गठन किया था। पुरानी व्यवस्था में रांची के उपायुक्त और अनुमंडल पदाधिकारी पदेन सदस्य के रूप में समिति में शामिल रहते थे।

नई समिति के गठन में प्रशासनिक अधिकारियों, मुख्य पुजारी और स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों को जगह न दिए जाने पर भी आपत्तियाँ उठाई गई थीं। इसके अतिरिक्त, मंदिर की आय-व्यय और खातों में पारदर्शिता को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं तथा विशेष ऑडिट की माँग अदालत के समक्ष रखी गई है।

सुरक्षा का संकट और अदालत के निर्देश

मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था इस पूरे मामले का एक संवेदनशील पहलू रही है। अप्रैल 2026 में मंदिर परिसर में चोरी के इरादे से घुसे अपराधियों ने सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या कर दी थी, जिसके बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।

हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर में 24 घंटे पर्याप्त पुलिस बल तैनात रखने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि रांची एसएसपी के निर्देश पर मंदिर में चौबीसों घंटे पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

वित्तीय व्यवस्था

मंदिर के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने अंतरिम वित्तीय व्यवस्था के तहत रांची के उपायुक्त को प्रतिमाह ₹30,000 उपलब्ध कराने का निर्देश पहले ही दे रखा है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक प्रबंधन का स्थायी ढाँचा तय नहीं हो जाता।

आगे क्या होगा

11 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद 7 सितंबर को होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट मंदिर प्रबंधन के भविष्य की रूपरेखा पर निर्णायक दिशा दे सकता है। यह मामला न केवल जगन्नाथपुर मंदिर, बल्कि झारखंड के अन्य धार्मिक स्थलों के प्रबंधन के लिए भी एक मिसाल स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो मूल रूप से इस विवाद की जड़ है। सुरक्षा गार्ड की हत्या ने यह उजागर किया कि प्रबंधन की अनिश्चितता का सीधा असर ज़मीनी सुरक्षा पर पड़ता है। अब 11 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट तय करेगी कि झारखंड में धार्मिक स्थलों का प्रशासन न्यायिक निगरानी में पारदर्शी ढाँचे की ओर बढ़ेगा या नहीं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथपुर मंदिर प्रबंधन विवाद क्या है?
यह विवाद 2021 में तब शुरू हुआ जब झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर की पुरानी प्रबंधन समिति को हटाकर 8 जुलाई 2021 को नई समिति बनाई। नई समिति में प्रशासनिक अधिकारियों, मुख्य पुजारी और स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों को शामिल न करने पर आपत्तियाँ उठीं और मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुँचा।
झारखंड हाईकोर्ट ने 11 सदस्यीय कमेटी क्यों बनाई?
हाईकोर्ट ने पहले न्यास बोर्ड को झारखंड हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड अधिनियम की धारा 32 के तहत विधिसम्मत स्कीम प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। बोर्ड द्वारा संशोधित स्कीम पेश करने के बाद अदालत ने उसके गहन अध्ययन और रिपोर्ट के लिए महाधिवक्ता रोहित राय की अध्यक्षता में यह कमेटी गठित की।
इस मामले में सुरक्षा गार्ड की हत्या कब और कैसे हुई?
अप्रैल 2026 में मंदिर परिसर में चोरी के इरादे से घुसे अपराधियों ने सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या कर दी। इस घटना के बाद हाईकोर्ट ने मंदिर में 24 घंटे पर्याप्त पुलिस बल तैनात रखने का निर्देश दिया और रांची एसएसपी के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की गई।
मंदिर के वित्तीय प्रबंधन को लेकर क्या आरोप हैं?
मंदिर की आय-व्यय और खातों में पारदर्शिता को लेकर आरोप लगाए गए हैं। अदालत के समक्ष विशेष ऑडिट की माँग भी रखी गई है। अंतरिम व्यवस्था के तहत हाईकोर्ट ने रांची उपायुक्त को मंदिर संचालन हेतु प्रतिमाह ₹30,000 उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
11 सदस्यीय कमेटी को 3 सितंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करनी है। इसके बाद 7 सितंबर को न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत में अगली सुनवाई होगी, जिसमें मंदिर प्रबंधन के स्थायी ढाँचे पर निर्णायक दिशा मिल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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