जगन्नाथपुर मंदिर विवाद: झारखंड हाईकोर्ट में संशोधित स्कीम पेश, 11 सदस्यीय कमेटी 3 सितंबर तक देगी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के प्रबंधन विवाद में 12 अगस्त 2026 को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसमें झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर के संचालन की संशोधित स्कीम अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। अदालत ने इस स्कीम के गहन अध्ययन के लिए महाधिवक्ता रोहित राय की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जिसे 3 सितंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने गठित कमेटी को निर्देश दिया है कि वह संशोधित स्कीम का विधिसम्मत परीक्षण करे और 3 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। बोर्ड की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने न्यास बोर्ड को झारखंड हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड अधिनियम की धारा 32 के तहत विधिसम्मत स्कीम तैयार कर प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। उसी निर्देश के अनुपालन में बोर्ड ने यह संशोधित स्कीम अदालत में दाखिल की।
विवाद की पृष्ठभूमि
जगन्नाथपुर मंदिर प्रबंधन का यह विवाद वर्ष 2021 में उस समय सतह पर आया, जब झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर की पुरानी प्रबंधन समिति को हटाकर 8 जुलाई 2021 को नई समिति का गठन किया था। पुरानी व्यवस्था में रांची के उपायुक्त और अनुमंडल पदाधिकारी पदेन सदस्य के रूप में समिति में शामिल रहते थे।
नई समिति के गठन में प्रशासनिक अधिकारियों, मुख्य पुजारी और स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों को जगह न दिए जाने पर भी आपत्तियाँ उठाई गई थीं। इसके अतिरिक्त, मंदिर की आय-व्यय और खातों में पारदर्शिता को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं तथा विशेष ऑडिट की माँग अदालत के समक्ष रखी गई है।
सुरक्षा का संकट और अदालत के निर्देश
मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था इस पूरे मामले का एक संवेदनशील पहलू रही है। अप्रैल 2026 में मंदिर परिसर में चोरी के इरादे से घुसे अपराधियों ने सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या कर दी थी, जिसके बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।
हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर में 24 घंटे पर्याप्त पुलिस बल तैनात रखने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि रांची एसएसपी के निर्देश पर मंदिर में चौबीसों घंटे पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
वित्तीय व्यवस्था
मंदिर के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने अंतरिम वित्तीय व्यवस्था के तहत रांची के उपायुक्त को प्रतिमाह ₹30,000 उपलब्ध कराने का निर्देश पहले ही दे रखा है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक प्रबंधन का स्थायी ढाँचा तय नहीं हो जाता।
आगे क्या होगा
11 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद 7 सितंबर को होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट मंदिर प्रबंधन के भविष्य की रूपरेखा पर निर्णायक दिशा दे सकता है। यह मामला न केवल जगन्नाथपुर मंदिर, बल्कि झारखंड के अन्य धार्मिक स्थलों के प्रबंधन के लिए भी एक मिसाल स्थापित कर सकता है।