17 जुलाई 2026
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'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म की रिलीज पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बरकरार, 27 जुलाई के बाद मिल सकती है अनुमति

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'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म की रिलीज पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बरकरार, 27 जुलाई के बाद मिल सकती है अनुमति

सारांश

भगवान जगन्नाथ पर बनी एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। CBFC प्रमाणपत्र और करोड़ों की बुकिंग के बावजूद अदालत ने रथ यात्रा समाप्त होने तक — यानी 27 जुलाई तक — रिलीज पर रोक बरकरार रखी। धार्मिक आपत्तियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच यह टकराव अब अदालत के अगले आदेश पर टिका है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जुलाई 2026 को एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की तत्काल रिलीज की माँग अस्वीकार की।
फिल्म की रिलीज पुरी रथ यात्रा की समाप्ति यानी 27 जुलाई के बाद ही संभव होगी।
फिल्म को CBFC से प्रमाणपत्र मिल चुका है और देशभर में सिनेमाघरों की बुकिंग भी हो चुकी थी।
विवाद की शुरुआत जून 2026 में टीजर 'जय जगन्नाथ' जारी होने के बाद धार्मिक संगठनों की आपत्तियों से हुई।
ओडिशा उच्च न्यायालय ने पहले ही फिल्म की देशव्यापी रिलीज पर अंतरिम रोक लगाई थी, जिसे निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
फिल्म की स्क्रीनिंग पुरी के गजपति महाराजा और SJTA के सामने हो चुकी है, जिसमें बदलावों के सुझाव दिए गए थे।

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ के जीवन पर आधारित एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' के निर्माताओं को तत्काल रिलीज की अनुमति देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुरी में चल रही भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जुलाई को समाप्त होगी और उसके बाद ही फिल्म की रिलीज पर विचार किया जा सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद की शुरुआत जून 2026 में हुई, जब फिल्म निर्माताओं ने इस एनिमेटेड फिल्म का टीजर 'जय जगन्नाथ' नाम से जारी किया। टीजर सामने आते ही कुछ धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के स्वरूप और उनसे जुड़ी परंपराओं को उचित रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है।

इसके बाद ओडिशा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक की माँग की गई। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि फिल्म के कुछ दृश्य और संवाद धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं और इससे भक्तों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद फिल्म की देशभर में रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट में निर्माताओं की दलीलें

ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए फिल्म निर्माता सर्वोच्च न्यायालय पहुँचे। निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने दलील दी कि फिल्म की रिलीज की पूरी तैयारी हो चुकी है — देशभर के सिनेमाघरों में बुकिंग हो चुकी है और फिल्म पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से आवश्यक प्रमाणपत्र मिल चुका है। निर्माता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि यह बच्चों के लिए बनाई गई एनिमेटेड फिल्म है, जिसका उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है — ठीक वैसे ही जैसे भगवान गणेश सहित अन्य धार्मिक विषयों पर एनिमेशन फिल्में बनाई जाती रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

सर्वोच्च न्यायालय ने निर्माताओं की तत्काल रिलीज की माँग को अस्वीकार करते हुए कहा कि रथ यात्रा के दौरान उठी धार्मिक आपत्तियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने संकेत दिया कि 27 जुलाई को रथ यात्रा की समाप्ति के बाद फिल्म की रिलीज पर पुनर्विचार हो सकता है।

स्क्रीनिंग और सुझाव

विवाद के बीच फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग पुरी के गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के सामने कराई गई थी। बताया जाता है कि स्क्रीनिंग के दौरान कुछ बदलावों के सुझाव दिए गए। हालाँकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि आवश्यक बदलाव किए बिना ही फिल्म को रिलीज करने की तैयारी की जा रही थी।

यह मामला धार्मिक संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की उस बारीक रेखा को रेखांकित करता है, जिसे भारतीय अदालतें बार-बार परिभाषित करती आई हैं। 27 जुलाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय का अगला निर्णय तय करेगा कि 'महाप्रभु जगन्नाथ' सिनेमाघरों तक पहुँच पाएगी या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो न्यायिक रोक किस आधार पर टिकी है। गजपति महाराजा और SJTA के सामने स्क्रीनिंग और सुझाव-प्रक्रिया यह भी बताती है कि निर्माता समझौते के लिए तैयार थे — फिर भी रोक जारी है। 27 जुलाई के बाद अदालत का फैसला केवल इस फिल्म के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक विषयों पर बनने वाली भावी फिल्मों के लिए एक मिसाल बनेगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म का विवाद क्या है?
भगवान जगन्नाथ के जीवन पर आधारित इस एनिमेटेड फिल्म के टीजर पर जून 2026 में धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि भगवान के स्वरूप और परंपराओं को उचित रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद ओडिशा उच्च न्यायालय ने फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज क्यों रोकी?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पुरी में रथ यात्रा चल रही है और इस संवेदनशील धार्मिक अवसर पर उठी आपत्तियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने 27 जुलाई को रथ यात्रा समाप्त होने के बाद रिलीज पर विचार करने का संकेत दिया।
फिल्म कब रिलीज हो सकती है?
सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार पुरी रथ यात्रा 27 जुलाई 2026 को समाप्त होगी, और उसके बाद ही फिल्म की रिलीज की संभावना है। अंतिम निर्णय अदालत के अगले आदेश पर निर्भर करेगा।
क्या 'महाप्रभु जगन्नाथ' को CBFC की मंजूरी मिली है?
हाँ, फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणपत्र मिल चुका है। निर्माताओं ने अदालत को बताया कि फिल्म पर करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं और देशभर के सिनेमाघरों में बुकिंग भी हो चुकी थी।
गजपति महाराजा और SJTA की स्क्रीनिंग का क्या नतीजा रहा?
विवाद के बाद पुरी के गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के सामने फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग कराई गई, जिसमें कुछ बदलावों के सुझाव दिए गए। हालाँकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि आवश्यक बदलाव किए बिना ही रिलीज की तैयारी थी।
राष्ट्र प्रेस
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