'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म की रिलीज पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बरकरार, 27 जुलाई के बाद मिल सकती है अनुमति
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ के जीवन पर आधारित एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' के निर्माताओं को तत्काल रिलीज की अनुमति देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुरी में चल रही भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जुलाई को समाप्त होगी और उसके बाद ही फिल्म की रिलीज पर विचार किया जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद की शुरुआत जून 2026 में हुई, जब फिल्म निर्माताओं ने इस एनिमेटेड फिल्म का टीजर 'जय जगन्नाथ' नाम से जारी किया। टीजर सामने आते ही कुछ धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के स्वरूप और उनसे जुड़ी परंपराओं को उचित रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है।
इसके बाद ओडिशा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक की माँग की गई। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि फिल्म के कुछ दृश्य और संवाद धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं और इससे भक्तों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद फिल्म की देशभर में रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट में निर्माताओं की दलीलें
ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए फिल्म निर्माता सर्वोच्च न्यायालय पहुँचे। निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने दलील दी कि फिल्म की रिलीज की पूरी तैयारी हो चुकी है — देशभर के सिनेमाघरों में बुकिंग हो चुकी है और फिल्म पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से आवश्यक प्रमाणपत्र मिल चुका है। निर्माता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि यह बच्चों के लिए बनाई गई एनिमेटेड फिल्म है, जिसका उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है — ठीक वैसे ही जैसे भगवान गणेश सहित अन्य धार्मिक विषयों पर एनिमेशन फिल्में बनाई जाती रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्माताओं की तत्काल रिलीज की माँग को अस्वीकार करते हुए कहा कि रथ यात्रा के दौरान उठी धार्मिक आपत्तियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने संकेत दिया कि 27 जुलाई को रथ यात्रा की समाप्ति के बाद फिल्म की रिलीज पर पुनर्विचार हो सकता है।
स्क्रीनिंग और सुझाव
विवाद के बीच फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग पुरी के गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के सामने कराई गई थी। बताया जाता है कि स्क्रीनिंग के दौरान कुछ बदलावों के सुझाव दिए गए। हालाँकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि आवश्यक बदलाव किए बिना ही फिल्म को रिलीज करने की तैयारी की जा रही थी।
यह मामला धार्मिक संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की उस बारीक रेखा को रेखांकित करता है, जिसे भारतीय अदालतें बार-बार परिभाषित करती आई हैं। 27 जुलाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय का अगला निर्णय तय करेगा कि 'महाप्रभु जगन्नाथ' सिनेमाघरों तक पहुँच पाएगी या नहीं।