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पुरी रथ यात्रा 2025: 40 कलाकार रथों को सजाने में जुटे, 14 जुलाई को नबजौबन दर्शन

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पुरी रथ यात्रा 2025: 40 कलाकार रथों को सजाने में जुटे, 14 जुलाई को नबजौबन दर्शन

सारांश

पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियाँ अपने चरम पर हैं — 40 कलाकार रथों को झोटी चिता कला से सँवार रहे हैं, थेकेरा बाड़ा का निर्माण जारी है और 14 जुलाई को नबजौबन दर्शन के साथ उत्सव का मुख्य क्रम शुरू होगा। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की पूरी तैयारी कर ली है।

मुख्य बातें

पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच गई हैं।
तीनों रथों पर थेकेरा बाड़ा लगाने का काम जारी; मुख्य आकर्षण रथ पावा को पेंट कर सोमवार को स्थापित किया जाएगा।
करीब 40 कलाकार पारंपरिक झोटी चिता फ्लोर आर्ट से मंदिर, रथ और यात्रा मार्ग को सजा रहे हैं।
14 जुलाई को नबजौबन दर्शन और रथ उत्सव; सभी अनुष्ठान समय पर पूरे करने पर ज़ोर।
श्री गुंडिचा मंदिर में सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढाँचे का कार्य पूर्ण; सुरक्षा व यातायात प्रबंधन तैयार।

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियाँ अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुँच गई हैं। तीनों पवित्र रथों के महत्वपूर्ण लकड़ी के ढाँचे 'थेकेरा बाड़ा' का निर्माण कार्य इस समय तेज़ गति से जारी है, जबकि करीब 40 कलाकार मंदिर परिसर, रथों और यात्रा मार्ग को पारंपरिक झोटी चिता फ्लोर आर्ट से सजाने में दिन-रात लगे हुए हैं। 14 जुलाई को नबजौबन दर्शन और रथ उत्सव से पहले सभी अनुष्ठानों को समय पर पूरा करने की तैयारी है।

रथ निर्माण का अंतिम चरण

तालध्वज रथ के सेवायत बालकृष्ण महाराणा ने बताया, 'रथ पर अब थेकेरा बाड़ा लगाया जा रहा है। मुख्य आकर्षण रथ पावा को पहले ही रंगा जा चुका है और इसे सोमवार को स्थापित किया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा कि सबसे विशेष क्षण वह होगा जब तीनों रथों पर आसन लगाए जाएँगे — उसके बाद 'हरि बोल' का उद्घोष होगा और भगवान से सभी के स्वास्थ्य तथा अगले वर्ष पुनः सेवा का अवसर देने की प्रार्थना की जाएगी।

प्रशासन की तैयारियाँ

श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार ने कहा, 'इस वर्ष की रथ यात्रा की तैयारियाँ अंतिम दौर में हैं। सभी अनुष्ठानों को समय पर पूरा करने पर सर्वाधिक ज़ोर दिया गया है और विस्तृत व्यवस्थाओं के साथ कार्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया गया है।' उन्होंने बताया कि भक्तों के लिए सुविधाएँ, सुरक्षा प्रबंध और यातायात प्रबंधन — तीनों मोर्चों पर तैयारी पूरी हो चुकी है। श्री गुंडिचा मंदिर में भी बड़े पैमाने पर सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढाँचे का कार्य संपन्न हो गया है।

कलाकारों की भक्ति और समर्पण

रथ सजावट में लगे आर्ट कॉलेज के छात्र एवं कलाकार दिप्तरंजन नायक ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'मैं पिछले छह वर्षों से यहाँ आकर सेवा कर रहा हूँ। यह सौभाग्य सबको नहीं मिलता, इसलिए मैं बहुत प्रसन्न हूँ।' उन्होंने बताया कि 1 जुलाई को जब वे यहाँ पहुँचे, तब भारी बारिश हो रही थी और काम शुरू होने की चिंता सताने लगी थी। उनके अनुसार, भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करने के उसी दिन बारिश रुक गई और कार्य प्रारंभ हो सका।

आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर

गौरतलब है कि रथ यात्रा देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से पुरी पहुँचते हैं। इस बार प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया है ताकि भक्तों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

आगे क्या होगा

14 जुलाई को नबजौबन दर्शन और रथ उत्सव के साथ यात्रा का मुख्य क्रम शुरू होगा। तीनों रथों पर आसन स्थापना और 'हरि बोल' के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएँ रथों पर विराजमान होंगी और भव्य यात्रा का शुभारंभ होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक क्षमता की भी परीक्षा है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के उमड़ने के बावजूद, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन एक स्थायी चुनौती बनी रहती है — इस बार प्रशासन के दावों की असली कसौटी 14 जुलाई को होगी। झोटी चिता जैसी लुप्त होती लोककलाओं को इस उत्सव के माध्यम से जीवित रखना एक सकारात्मक पहलू है, जिस पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। कलाकार दिप्तरंजन नायक जैसे युवाओं की भागीदारी इस परंपरा की निरंतरता के लिए शुभ संकेत है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 कब है और मुख्य आयोजन की तारीख क्या है?
इस वर्ष 14 जुलाई को नबजौबन दर्शन और रथ उत्सव का आयोजन होना है। पुरी में तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं और सभी अनुष्ठान समय पर पूरे करने की व्यवस्था की गई है।
थेकेरा बाड़ा क्या होता है और यह रथ यात्रा में क्यों महत्वपूर्ण है?
थेकेरा बाड़ा भगवान जगन्नाथ के रथों का एक अहम लकड़ी का हिस्सा होता है जो रथ की संरचना को पूर्ण करता है। इसे पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है और इसकी स्थापना रथ निर्माण के अंतिम चरण में होती है।
पुरी रथ यात्रा में झोटी चिता फ्लोर आर्ट क्या है?
झोटी चिता ओडिशा की एक पारंपरिक लोककला है जिसमें फर्श पर विशेष डिज़ाइन बनाए जाते हैं। इस वर्ष करीब 40 कलाकार इस कला से मंदिर, रथों और यात्रा मार्ग को सजा रहे हैं।
रथ यात्रा के लिए पुरी में सुरक्षा और यातायात की क्या व्यवस्था है?
श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार के अनुसार, भक्तों के लिए सुविधाएँ, सुरक्षा प्रबंध और यातायात प्रबंधन की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। श्री गुंडिचा मंदिर में भी बुनियादी ढाँचे का कार्य संपन्न हो गया है।
रथ यात्रा में कलाकार और सेवायत क्या भूमिका निभाते हैं?
सेवायत रथ निर्माण और अनुष्ठानों की पारंपरिक ज़िम्मेदारी निभाते हैं, जबकि कलाकार रथों और मंदिर परिसर को सजाने का काम करते हैं। तालध्वज रथ के सेवायत बालकृष्ण महाराणा और कलाकार दिप्तरंजन नायक जैसे लोग पीढ़ियों से इस सेवा में जुटे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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