बद्रीनाथ धाम चढ़ावा चोरी: SIT ने CEO को सौंपी 18 पन्नों की जांच रिपोर्ट, कई बार हेराफेरी की पुष्टि
सारांश
मुख्य बातें
श्री बद्रीनाथ धाम मंदिर में नगद चढ़ावे की गिनती के दौरान हुई कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय विभागीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सीईओ को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार 18 पन्नों की इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने केवल 2 जुलाई 2026 को ही नहीं, बल्कि इससे पहले भी कई बार चढ़ावे में हेरफेर की। यह मामला चमोली जिले के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल की प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांच में क्या सामने आया
जांच समिति ने 18 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में पूरी घटना का ब्योरा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार 2 जुलाई 2026 को दान गिनती कक्ष में आरोपी को पैसों में हेराफेरी करते हुए सीसीटीवी फुटेज में देखा गया। इसके अतिरिक्त, घटना से 14 दिन पूर्व के कुछ फुटेज के कई हिस्से भी जांच टीम को महत्वपूर्ण प्रतीत हुए, जो यह संकेत देते हैं कि यह पहली बार की घटना नहीं थी।
सीसीटीवी फुटेज की सीमाएँ
जांच के दौरान एक तकनीकी बाधा भी सामने आई। मंदिर परिसर में लगे पुराने सीसीटीवी कैमरों की स्टोरेज क्षमता मात्र 15 दिनों की है, जिस कारण जांच टीम को 2 जुलाई से केवल 14 दिन पहले तक के ही फुटेज उपलब्ध हो सके। कैमरों की गुणवत्ता भी अपेक्षाकृत कम होने के कारण कुछ फुटेज स्पष्ट नहीं थे। इसी के मद्देनज़र रिपोर्ट में दान गिनती कक्ष और परिक्रमा पथ के सभी ब्लाइंड स्पॉट पर उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने की सिफारिश की गई है।
BKTC की कार्रवाई और निलंबन
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने 7 जुलाई 2026 को अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से कड़ी कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इससे पहले 3 जुलाई 2026 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण माँगा गया था। समिति द्वारा प्राप्त स्पष्टीकरण और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के परीक्षण में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
सुधार के लिए सुझाव
जांच रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें दान गिनती कक्ष में अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाना, परिक्रमा पथ के ब्लाइंड स्पॉट को निगरानी तंत्र से लैस करना और दान प्रबंधन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाना शामिल है। गौरतलब है कि बद्रीनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है, जिससे इस प्रकार की निगरानी व्यवस्था की अनिवार्यता और बढ़ जाती है।
आगे क्या होगा
अब CEO द्वारा रिपोर्ट का परीक्षण किए जाने के बाद प्रमोद नौटियाल के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के अगले चरण तय किए जाएंगे। यह मामला यह भी रेखांकित करता है कि धार्मिक न्यासों और मंदिर प्रशासन में तकनीकी निगरानी तंत्र को अद्यतन रखना कितना आवश्यक है।