बद्रीनाथ दान घोटाला: BKTC की शिकायत पर निजी सचिव प्रमोद नौटियाल के खिलाफ FIR, उत्तराखंड सरकार ने बनाई उच्च-स्तरीय जांच समिति
सारांश
मुख्य बातें
बद्रीनाथ धाम में दान राशि के कथित गबन के मामले में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की शिकायत के आधार पर बद्रीनाथ पुलिस ने 8 जुलाई को BKTC चेयरमैन के कार्यालय में तैनात निजी सचिव प्रमोद नौटियाल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 306 और 316(5) के तहत दर्ज यह मुकदमा उत्तराखंड के चारधाम प्रशासन में अब तक के सबसे गंभीर वित्तीय विवादों में से एक बन गया है।
मामले का घटनाक्रम
2 जुलाई को सोशल मीडिया पर बद्रीनाथ मंदिर की दान राशि के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए। इन आरोपों के बाद BKTC ने तत्काल तीन सदस्यों की एक आंतरिक जांच समिति गठित की। शुरुआती जांच में कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य सामने आए जिनसे संकेत मिलता है कि प्रमोद नौटियाल ने बिना अनुमति के सुबह 9 बजे से 9:30 बजे के बीच मंदिर की निधि से राशि निकाली थी।
इन खुलासों के बाद समिति ने 7 जुलाई को नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। समिति का तर्क था कि उन्हें पद पर बनाए रखने से जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इसके अगले दिन, 8 जुलाई को, समिति के अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान ने बद्रीनाथ पुलिस थाने में लिखित शिकायत दी, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई।
उत्तराखंड सरकार की प्रतिक्रिया
BKTC की आंतरिक कार्रवाई से संतुष्ट न होते हुए उत्तराखंड सरकार ने मंगलवार शाम को स्वतंत्र जांच के लिए तीन सदस्यों वाली उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया। राज्य सरकार ने भी नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया — यह कदम BKTC की कार्रवाई के समानांतर और स्वतंत्र रूप से उठाया गया, जो दर्शाता है कि राज्य इस मामले को केवल समिति के विवेक पर नहीं छोड़ना चाहता।
कानूनी स्थिति और सावधानी
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोपों की पुष्टि नहीं है। दोष या निर्दोषता का निर्धारण पुलिस जांच और उसके बाद की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा। फिलहाल मामला जांच के प्रारंभिक चरण में है।
गौरतलब है कि बद्रीनाथ धाम देश के सर्वाधिक दर्शनार्थियों वाले तीर्थस्थलों में से एक है और यहाँ प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की दान राशि एकत्र होती है। यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब चारधाम यात्रा अपने चरम पर है।
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
इस विवाद ने श्रद्धालुओं के बीच मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। BKTC के अंतर्गत बद्रीनाथ और केदारनाथ दोनों प्रमुख धामों का प्रबंधन आता है, इसलिए इस प्रकरण का असर व्यापक धार्मिक आस्था और तीर्थ-पर्यटन पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार की उच्च-स्तरीय जांच समिति और पुलिस जांच समानांतर रूप से चलेंगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या जांच में BKTC के भीतर प्रणालीगत खामियाँ उजागर होती हैं या यह एकल व्यक्ति की चूक तक सीमित रहती है।