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स्मृति ईरानी का महिलाओं को संदेश: 'खुद को उसी रूप में स्वीकारो, जैसी हो'

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स्मृति ईरानी का महिलाओं को संदेश: 'खुद को उसी रूप में स्वीकारो, जैसी हो'

सारांश

स्मृति ईरानी ने 'वोइला' गीत की आत्मा को अपने शब्दों में पिरोया — महिलाओं से कहा कि खुद को बदलने की नहीं, खुद को स्वीकारने की ज़रूरत है। यह संदेश उनके 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की वापसी के बीच और भी गहरा अर्थ रखता है।

मुख्य बातें

स्मृति ईरानी ने 8 जुलाई 2026 को महिलाओं के लिए आत्मस्वीकृति पर केंद्रित एक भावपूर्ण संदेश साझा किया।
उन्होंने फ्रेंच गायिका बारबरा प्रावी के गीत 'वोइला' और एमा की प्रस्तुति का उल्लेख किया।
संदेश में महिलाओं से कहा — खुद पर शक न करें, अपनी जगह बनाएँ, सच बोलें और अपनी ताकत का जश्न मनाएँ।
स्मृति ने हाल ही में 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के रीप्राइज्ड संस्करण में तुलसी विरानी की भूमिका दोहराई, जो अगस्त 2025 में प्रसारित हुआ।
शो का पहला संस्करण साल 2000 में आया था और करीब 25 वर्ष बाद इसकी वापसी हुई।

अभिनेत्री और राजनेता स्मृति ईरानी ने 8 जुलाई 2026 को महिलाओं के लिए एक भावपूर्ण और प्रेरणादायक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने नारीत्व, आत्मस्वीकृति और खुद की पहचान बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे दुनिया की उम्मीदों पर खरा उतरने की होड़ में खुद को न खोएँ।

गीत 'वोइला' से जोड़ा संदेश

स्मृति ने अपने संदेश में फ्रेंच गायिका बारबरा प्रावी के प्रसिद्ध गीत 'वोइला' का उल्लेख किया, जिसे बाद में एमा ने करोड़ों लोगों के दिलों तक पहुँचाया। उन्होंने लिखा, "बारबरा प्रावी ने यह गीत गाया था और एमा ने इसे लाखों लोगों के दिलों तक पहुँचाया। दो असाधारण महिलाएँ, दो अलग-अलग सफर और एक ऐसी याद, जो हमेशा ताज़ा रहेगी।" एक देवी की आधुनिक पेंटिंग के पास बैठी अपनी तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने यह विचार प्रकट किए।

आत्मसंदेह से बाहर निकलने की अपील

स्मृति ने कहा कि हम अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा दुनिया की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में बिता देते हैं और इस प्रक्रिया में वह 'शांत हिम्मत' भूल जाते हैं, जो सिर्फ खुद जैसा बने रहने के लिए ज़रूरी होती है। उन्होंने महिलाओं से सीधे मुखातिब होते हुए कहा, "अगर आज आप खुद पर शक कर रहे हैं, यह सोच रहे हैं कि क्या आप पर्याप्त हैं, या किसी और की सोच के अनुसार खुद को बदलने या छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं, तो ऐसा न करें।"

स्वयं की आवाज़ और ताकत का जश्न

स्मृति ने जोर देकर कहा कि हर महिला की आवाज़ सुने जाने लायक है और उसकी कहानी बताई जानी चाहिए। उनके अनुसार, "अपनी जगह बनाओ। सच कहो। अपने ज़ख्मों को अपनाओ। अपनी ताकत का जश्न मनाओ।" उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया को किसी की नकल नहीं चाहिए — उसे हर महिला की अपनी मौलिक पहचान की ज़रूरत है।

'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से वापसी

गौरतलब है कि स्मृति ईरानी ने हाल ही में लोकप्रिय पारिवारिक धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के रीप्राइज्ड संस्करण में तुलसी विरानी की भूमिका दोबारा निभाई है। इस शो का पहला संस्करण साल 2000 में प्रसारित हुआ था और इसमें अमर उपाध्याय, रोनित रॉय, सुधा शिवपुरी, अपरा मेहता, मंदिरा बेदी, हितेन तेजवानी, गौरी प्रधान और मौनी रॉय जैसे कलाकार थे। करीब 25 वर्ष के अंतराल के बाद इसका नया संस्करण अगस्त 2025 में प्रसारित हुआ।

आगे की राह

स्मृति ईरानी का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य और आत्मसम्मान को लेकर सामाजिक चर्चा तेज़ हो रही है। उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना मिली है और यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह प्रेरणा कई महिलाओं तक पहुँचेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं इसका समय 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की वापसी के साथ मेल खाना इसे प्रचार-तटस्थ नहीं रहने देता। मुख्यधारा की कवरेज प्रेरणा के भावनात्मक पहलू पर रुक जाती है, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि क्या यह संदेश एक सुविचारित सांस्कृतिक हस्तक्षेप है या एक सुनियोजित ब्रांड-बिल्डिंग का हिस्सा। फिर भी, आत्मसंदेह और सामाजिक दबाव के खिलाफ स्मृति की यह आवाज़ — चाहे जो भी संदर्भ हो — उन महिलाओं तक पहुँचती है जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्मृति ईरानी ने महिलाओं के लिए क्या संदेश दिया?
स्मृति ईरानी ने महिलाओं से आग्रह किया कि वे खुद को उसी रूप में स्वीकारें जैसी वे हैं — खुद पर शक न करें और दुनिया की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश में अपनी मौलिक पहचान न खोएँ। उन्होंने कहा कि हर महिला की आवाज़ सुने जाने लायक है।
'वोइला' गीत का इस संदेश से क्या संबंध है?
स्मृति ईरानी ने फ्रेंच गायिका बारबरा प्रावी के गीत 'वोइला' का उल्लेख किया, जिसे एमा ने करोड़ों लोगों तक पहुँचाया। उन्होंने इस गीत को दो असाधारण महिलाओं की अलग-अलग यात्राओं का प्रतीक बताया और इसे अपने आत्मस्वीकृति के संदेश से जोड़ा।
क्या स्मृति ईरानी 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में वापस आई हैं?
हाँ, स्मृति ईरानी ने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के रीप्राइज्ड संस्करण में तुलसी विरानी की भूमिका दोबारा निभाई है। यह नया संस्करण अगस्त 2025 में प्रसारित हुआ, जो मूल शो के साल 2000 में प्रसारण के करीब 25 वर्ष बाद आया।
'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के पहले संस्करण में कौन-कौन से कलाकार थे?
पहले संस्करण में स्मृति ईरानी के अलावा अमर उपाध्याय, रोनित रॉय, सुधा शिवपुरी, अपरा मेहता, मंदिरा बेदी, हितेन तेजवानी, गौरी प्रधान और मौनी रॉय जैसे कलाकार शामिल थे। यह शो विरानी परिवार की कहानी पर आधारित था।
स्मृति ईरानी का यह संदेश किन महिलाओं के लिए प्रासंगिक है?
यह संदेश उन महिलाओं के लिए है जो सामाजिक अपेक्षाओं के दबाव में खुद को बदलने या छोटा करने की कोशिश करती हैं। स्मृति ने कहा कि खुद की पहचान बनाए रखना और आत्मसंदेह से बाहर निकलना हर महिला के लिए ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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