कांग्रेस का असली चेहरा महिलाओं के सामने उजागर: स्मृति ईरानी
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में कांग्रेस की विफलता।
- समानता के अधिकार के लिए भाजपा की लड़ाई।
- महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन न करना कांग्रेस का दोगलापन।
- भाजपा ने 'जेंडर बजट फ्रेमवर्क' की शुरुआत की।
- प्रियंका गांधी के विवादास्पद बयान की निंदा।
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। दोनों नेताओं ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का समर्थन न करने के लिए कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर हमला किया।
स्मृति ईरानी ने कहा, "आज देश की महिलाओं के सामने कांग्रेस ने 98 साल का एक एहसान जताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक ऐसा सपना सृजित किया है जो महिलाओं को राजनीतिक अधिकार दिलाने की मंशा रखता है। लेकिन 98 साल में उस मंशा का क्या हश्र हुआ, यह कल संसद में देशभर की महिलाओं ने देखा। कांग्रेस ने इस बात का राजनीतिक जश्न मनाया कि उन्होंने देश की आम महिलाओं की राजनीतिक आकांक्षाओं को कुचला। भाजपा के लिए, यह केवल सत्ता का संघर्ष नहीं है, बल्कि समानता के अधिकार की लड़ाई है।"
स्मृति ईरानी ने आगे कहा, "महिलाएं याद रखेंगी कि कांग्रेस के शासन के दौरान 11 करोड़ महिलाएं शौचालयों की सुविधा से वंचित थीं। 25 करोड़ महिलाओं को बैंक खाते खोलने में आवश्यक सहयोग से वंचित रखा गया। भाजपा-एनडीए के शासनकाल में ही पहली बार 'जेंडर बजट फ्रेमवर्क' की शुरुआत की गई।"
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "कांग्रेस और उसके समर्थक दलों ने इस बात का उत्सव मनाया कि इस देश की वर्षों से संघर्ष कर रही महिलाएं, जो मात्र 33 प्रतिशत अधिकार मांग रही थीं, को कैसे वंचित रखा जाए। भाजपा के लिए ये सत्ता का संघर्ष नहीं, समानता का अधिकार देने का प्रश्न है।"
उन्होंने कांग्रेस की प्रेस वार्ता में कटाक्ष करते हुए कहा, "कांग्रेस ने कहा कि वे 2023 में पारित बिल का समर्थन करते हैं, जिसमें परिसीमन का उल्लेख है। लेकिन उनका दोगलापन देखिए कि वे साथ में ये भी कहते हैं कि उन्हें परिसीमन और व्यवस्था में विश्वास नहीं। यही कांग्रेस ने अपना क्रूर चेहरा देश की महिलाओं के सामने उजागर किया है।"
रविशंकर प्रसाद ने प्रियंका गांधी पर तंज कसा और उनकी बातों की निंदा की। उन्होंने कहा, "क्या भारत की महिलाएं कोई वस्तु हैं, जिसका इस्तेमाल किया जाए? यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक महिला सांसद की भाषा है। हम इस भाषा की निंदा करते हैं।"
उन्होंने संविधान के बारे में बताते हुए कहा, "परिसीमन के बिना लोकसभा या विधानसभा में सीटों में कोई बदलाव संभव नहीं है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार, लोकसभा की सीटें प्रत्येक राज्य को आवंटित की जानी चाहिए। जब जनगणना होती है, तो दक्षिण भारत की जनसंख्या लगातार कम होती जाती है।"
उन्होंने कहा, "कांग्रेस का तर्क है कि मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दक्षिणी राज्य भी इस नैरेटिव से प्रभावित हुए हैं।"