पप्पू यादव के साधु वेश प्रदर्शन पर प्रमोद कृष्णम का हमला, राहुल गांधी से माफी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कल्किधाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 2 अगस्त को बुलंदशहर में पत्रकारों से बात करते हुए पूर्णिया सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद परिसर में साधु वेश धारण कर किए गए प्रदर्शन की कड़ी निंदा की। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से संत समाज के प्रति सार्वजनिक क्षमा याचना की मांग की।
आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पप्पू यादव की संसद परिसर में की गई हरकत को लेकर कहा, 'पप्पू यादव ने कुंभकरण की भूमिका अदा की है। जिस तरह रावण के परिवार में खर-दूषण, मेघनाद और कुंभकरण जैसे लोग थे, उसी तरह उनकी पूरी जमात रावण का कुनबा है।' उन्होंने राहुल गांधी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें यह तय करना है कि वह 'रावण मंडली के सरदार' बनकर सनातन, भगवा और संतों का कितना अपमान करना चाहते हैं।
संत समाज से माफी की मांग
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राहुल गांधी और पप्पू यादव दोनों को बिना देरी किए संत समाज से क्षमा याचना करनी चाहिए। उन्होंने इस घटना को सनातन परंपरा और साधु समाज के प्रति अपमान करार दिया।
संस्कृति और सभ्यता की रक्षा पर अपील
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने देशवासियों से भारतीय संस्कृति और सभ्यता की रक्षा का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'मैं देश भर के सभी माता-पिता से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों को गौतम बुद्ध, महावीर, स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, शहीद भगत सिंह और महर्षि दयानंद के दिखाए रास्ते पर चलने की सीख दें।' उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगली पीढ़ी अपने संस्कारों से दूर होती रही, तो यह देश के लिए अत्यंत हानिकारक होगा।
पीएम मोदी को निशाना बनाने को बताया विदेशी साजिश
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 'कॉकरोच मूवमेंट' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने की विदेशी शक्तियों की साजिश बताया। उनके अनुसार, 'दुर्भाग्य की बात है कि इसमें लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष मिले हुए हैं।' उन्होंने कहा कि भारत की एकता और सनातन को निशाना बनाना निश्चित रूप से एक विदेशी षड्यंत्र का हिस्सा है।
राहुल गांधी पर तानाशाही का आरोप
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी पर तानाशाही का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र की स्थापना के बाद से तानाशाही के नजरिए से देखा जाए, तो राहुल गांधी 'भारत के सबसे बड़े तानाशाह राजनेता' हैं। यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में तीखी बहस का विषय बन सकती है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।