16 सितंबर 2026
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यूपीआई एमडीआर विवाद: चिदंबरम सहित 5 कांग्रेस सांसदों ने संसदीय समिति में शुल्क ढांचे का समर्थन किया

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यूपीआई एमडीआर विवाद: चिदंबरम सहित 5 कांग्रेस सांसदों ने संसदीय समिति में शुल्क ढांचे का समर्थन किया

सारांश

कांग्रेस के भीतर यूपीआई एमडीआर मुद्दे पर विरोधाभास उजागर हुआ है — राहुल गांधी शुल्क की आलोचना कर रहे हैं, जबकि चिदंबरम सहित पाँच कांग्रेस सांसद संसदीय समिति में इसी ढांचे का समर्थन कर चुके हैं। यह टकराव डिजिटल भुगतान की वित्तीय स्थिरता और राजनीतिक स्थिरता दोनों पर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

चिदंबरम , मनीष तिवारी , गौरव गोगोई , किशोरी लाल और के.
गोपीनाथ — पाँच कांग्रेस सांसदों ने वित्त संबंधी स्थायी समिति में यूपीआई के लिए स्तरीय एमडीआर/राजस्व ढांचे का समर्थन किया।
12 अगस्त को रिपोर्ट पारित होने के समय उपस्थित इन सांसदों में से किसी ने भी प्रकाशित कार्यवृत्त में असहमति दर्ज नहीं कराई।
समिति ने चेताया कि एमडीआर ढांचे में देरी से साइबर सुरक्षा , धोखाधड़ी रोकथाम और नेटवर्क अवसंरचना में निवेश खतरे में पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले को अमेरिकी दबाव का नतीजा बताया, जिसे केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने निराधार कहकर खारिज किया।
समिति ने टियर 3-6 शहरों में डिजिटल भुगतान के विस्तार के लिए तीन वर्षीय बहुवर्षीय योजना और कैशबैक घटक को आवश्यक बताया।

संसद में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने को लेकर राजनीतिक विरोधाभास सामने आया है — लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जहाँ ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना कर रहे हैं, वहीं उन्हीं की पार्टी के पाँच वरिष्ठ सांसदपी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ — संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति में इसी एमडीआर ढांचे का समर्थन कर चुके हैं। यह घटनाक्रम 16 सितंबर को सार्वजनिक हुआ।

समिति की सिफारिश और कांग्रेस सांसदों की भूमिका

वित्त संबंधी स्थायी समिति ने इस वर्ष यूपीआई के लिए स्तरीय एमडीआर/राजस्व ढांचे पर जोर दिया और स्पष्ट किया कि इसे बिना किसी देरी के अधिसूचित एवं कार्यान्वित किया जाना चाहिए। 12 अगस्त को जब यह रिपोर्ट संसद में पारित हुई, उस समय उक्त पाँचों कांग्रेस सांसद — जिनमें पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम और पूर्व केंद्रीय मंत्री तिवारी शामिल हैं — उपस्थित थे। प्रकाशित कार्यवृत्त के अनुसार, किसी भी सदस्य ने समिति की सिफारिशों पर औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई।

समिति के तर्क: वित्तीय स्थिरता बनाम सरकारी सब्सिडी

समिति के अनुसार, यूपीआई इकोसिस्टम की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए एक व्यवहार्य राजस्व तंत्र की स्थापना अत्यंत आवश्यक है, ताकि सरकारी खजाने पर लगातार बोझ न पड़े। समिति ने यह भी पाया कि उच्च मूल्य के लेनदेन पर कैलिब्रेटेड एमडीआर की अनुमति देने के लिए वैधानिक प्रावधान पहले से मौजूद हैं।

समिति ने चेताया कि इस ढांचे को अधिसूचित करने में किसी भी देरी से भुगतान सेवा प्रदाता अपर्याप्त सब्सिडी पर अत्यधिक निर्भर हो जाएंगे। इससे साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और नेटवर्क अवसंरचना में महत्वपूर्ण निवेश खतरे में पड़ सकता है।

तीन वर्षीय योजना और टियर 3-6 शहरों पर फोकस

समिति ने सिफारिश की कि प्रस्तावित तीन वर्षीय बहुवर्षीय योजना और कैशबैक घटक टियर 3 से 6 शहरों में डिजिटल भुगतान को व्यापक बनाने के लिए आवश्यक हैं। साथ ही, वित्तीय सेवा विभाग को एक आत्मनिर्भर, स्तरीय राजस्व मॉडल पर भी विचार करना चाहिए — यानी सब्सिडी और स्व-वित्तपोषण दोनों का संतुलन।

एनडीए की प्रतिक्रिया और राहुल गांधी का अमेरिकी दबाव वाला आरोप

बुधवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने राहुल गांधी की उस आलोचना को खारिज किया जिसमें उन्होंने यूपीआई शुल्क के निर्णय को अमेरिका के दबाव का परिणाम बताया था। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि ₹2,000 तक के यूपीआई लेनदेन पर लिया गया निर्णय निष्पक्ष है और इससे छोटे विक्रेताओं एवं व्यवसायों को कोई कठिनाई नहीं होगी।

अठावले ने अमेरिकी दबाव वाले आरोप को भी सिरे से नकारते हुए कहा, 'राहुल गांधी का यह आरोप कि यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया गया है, पूरी तरह निराधार है। इस निर्णय से अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है।'

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणालियों में से एक बन चुकी है और इसके इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता पर बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि एमडीआर को वर्ष 2020 में यूपीआई और रुपे ट्रांजेक्शन पर शून्य कर दिया गया था। अब स्तरीय एमडीआर ढांचे को अधिसूचित करने का निर्णय और उसकी समयसीमा सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व इसी नीति को जनता के सामने सरकार के खिलाफ हथियार बनाता है। यह विरोधाभास बताता है कि तकनीकी-वित्तीय नीतियों पर विपक्षी राजनीति अक्सर विशेषज्ञता और लोकलुभावन बयानबाजी के बीच फंसी रहती है। यूपीआई इकोसिस्टम की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता एक वास्तविक चुनौती है जिसे नकारा नहीं जा सकता, लेकिन शुल्क का बोझ किस पर पड़े — व्यापारी, उपभोक्ता या सरकार — यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई पर एमडीआर ढांचा क्या है और इसका क्या मतलब है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वह शुल्क है जो डिजिटल लेनदेन पर भुगतान सेवा प्रदाताओं को मिलता है। संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि यूपीआई पर — विशेषतः उच्च मूल्य के लेनदेन पर — स्तरीय एमडीआर लागू किया जाए ताकि इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
कांग्रेस सांसदों ने समिति में एमडीआर का समर्थन क्यों किया?
वित्त संबंधी स्थायी समिति के सदस्य के रूप में पाँचों कांग्रेस सांसदों ने माना कि यूपीआई इकोसिस्टम को सरकारी सब्सिडी पर अत्यधिक निर्भरता से बचाने के लिए एक आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल जरूरी है। 12 अगस्त को रिपोर्ट पारित होने पर किसी ने असहमति दर्ज नहीं कराई।
राहुल गांधी ने यूपीआई शुल्क पर क्या आरोप लगाए हैं?
राहुल गांधी ने ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना की और कथित तौर पर इसे अमेरिकी दबाव का परिणाम बताया। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इस आरोप को निराधार करार देते हुए खारिज किया।
₹2,000 से कम के यूपीआई लेनदेन पर क्या असर पड़ेगा?
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के अनुसार, ₹2,000 तक के यूपीआई लेनदेन से जुड़ा निर्णय निष्पक्ष है और इससे छोटे विक्रेताओं एवं व्यवसायों को कोई कठिनाई नहीं होगी। शुल्क ढांचा मुख्यतः उच्च मूल्य के लेनदेन पर केंद्रित है।
टियर 3-6 शहरों पर इस नीति का क्या प्रभाव होगा?
समिति ने सिफारिश की है कि तीन वर्षीय बहुवर्षीय योजना और कैशबैक घटक टियर 3 से 6 शहरों में डिजिटल भुगतान को व्यापक बनाने के लिए आवश्यक हैं। इसके साथ ही एक आत्मनिर्भर स्तरीय राजस्व मॉडल भी लागू किया जाना चाहिए ताकि छोटे शहरों में यूपीआई विस्तार जारी रहे।
राष्ट्र प्रेस
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