राहुल गांधी की PM मोदी से माँग: ₹2,000 से अधिक UPI लेन-देन पर लगा MDR टैक्स तुरंत वापस लो
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 16 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूपीआई (UPI) पर लगाए गए नए शुल्क को तत्काल वापस लेने की सार्वजनिक माँग की। ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के बाद व्यापारियों और उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए यह अपील की।
राहुल गांधी का आरोप और पूर्व पीएम का संदर्भ
सांसद राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उल्लेख किया और कहा कि उनकी सोच बिल्कुल सीधी थी। उन्होंने PM मोदी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि 'यूपीआई टैक्स वापस लीजिए।' यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ारों से लेकर बड़े-बड़े शोरूम तक यह प्रश्न चर्चा का विषय बना हुआ है कि ₹2,000 की सीमा से अधिक के लेन-देन पर वास्तव में कितना शुल्क देना होगा।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस नीति की आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि यह शुल्क धीरे-धीरे बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस लेन-देन पर पहले कोई टैक्स नहीं लगता था, उस पर अब ₹2,000 से अधिक होने पर शुल्क लगेगा, और एक बार नौकरशाही को इसमें प्रवेश मिल जाए तो सभी लेन-देन पर टैक्स का रास्ता खुल जाएगा। उनके अनुसार, इसका अंतिम बोझ ग्राहकों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और कीमतें बढ़ेंगी।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे 'अमेरिका के सामने पूरी तरह घुटने टेकने' जैसा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय भारत के आम लोगों को दंडित करने वाला है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकार ने पहले UPI अपनाने को प्रोत्साहित किया और अब उसी पर टैक्स की मार लगाई जा रही है। उन्होंने 'रकम बहुत कम है' वाले तर्क को सिरे से खारिज किया।
अन्य दलों की राय
पट्टाली मक्कल काची (PMK) अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने कहा कि जब UPI लॉन्च हुआ था, तो सरकार ने वादा किया था कि यह पूरी तरह निःशुल्क होगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी नुकसान नहीं उठाएगा — वह यह बोझ ग्राहक पर डाल देगा, जो कि एक 'अप्रत्यक्ष तरीका' है।
झारखंड सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने भी केंद्र की आलोचना की और कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है, और जनता इसका जवाब देगी।
झारखंड सरकार में मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस मामले पर सतर्क रुख अपनाया और कहा कि वे तब तक कोई राय नहीं देंगे, जब तक विषय का पूर्ण अध्ययन नहीं कर लेते।
आम जनता और व्यापारियों पर असर
गौरतलब है कि भारत में UPI के दैनिक लेन-देन की संख्या करोड़ों में है और यह डिजिटल भुगतान प्रणाली विशेष रूप से छोटे व्यापारियों की रीढ़ बन चुकी है। 0.4 प्रतिशत MDR छोटा लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार थोक व्यापार और बड़े रिटेल स्टोर में इसका संचयी प्रभाव उपभोक्ता मूल्यों पर पड़ सकता है। यह Nवीं ऐसी स्थिति है जब डिजिटल भुगतान को 'निःशुल्क' रखने के सरकारी वादे पर सार्वजनिक बहस छिड़ी है।
क्या होगा आगे
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि क्या सरकार MDR की सीमा, दर या छूट में कोई संशोधन करती है। व्यापार संगठनों और उपभोक्ता समूहों की नज़रें अब वित्त मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं।