यूपीआई एमडीआर विवाद: चिदंबरम समेत 5 कांग्रेस सांसदों ने संसदीय समिति में शुल्क ढांचे का समर्थन किया
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जहाँ केंद्र सरकार के ₹2,000 से अधिक के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर शुल्क लगाने के निर्णय की कड़ी आलोचना की, वहीं उनकी ही पार्टी के पाँच वरिष्ठ सांसदों — पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ — ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति में यूपीआई के लिए स्तरीय मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर)/राजस्व ढांचे का स्पष्ट समर्थन दर्ज कराया। 12 अगस्त 2026 को संसद में पारित समिति की रिपोर्ट इस विवाद के केंद्र में है, जिसने राजनीतिक हलकों में अपनी ही पार्टी के भीतर एक उल्लेखनीय अंतर्विरोध उजागर कर दिया है।
समिति की सिफारिशें और कांग्रेस सांसदों की भूमिका
वित्त संबंधी स्थायी समिति ने इस वर्ष अपनी रिपोर्ट में यूपीआई के लिए स्तरीय एमडीआर/राजस्व ढांचे पर ज़ोर देते हुए कहा कि इसे बिना किसी विलंब के अधिसूचित और कार्यान्वित किया जाना चाहिए। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी सहित पाँचों कांग्रेस सांसद 12 अगस्त को रिपोर्ट के संसद में पारित होने के समय उपस्थित थे। प्रकाशित कार्यवृत्त के अनुसार, किसी भी सदस्य ने असहमति दर्ज नहीं कराई।
गौरतलब है कि यह वही समिति है जिसने अपनी पिछली सिफारिशों में भी व्यवहार्य राजस्व मॉडल की अनिवार्यता पर बल दिया था, और इस बार उसने पाया कि स्तरीय एमडीआर संरचना के लिए आवश्यक विधायी प्रावधान अब उपलब्ध हैं।
यूपीआई इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता की चिंता
समिति ने रेखांकित किया कि यूपीआई इकोसिस्टम की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आत्मनिर्भर राजस्व तंत्र स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि सरकारी खजाने पर लगातार बोझ न बढ़े। समिति के अनुसार, यदि इस ढांचे को अधिसूचित करने में और देरी होती है, तो भुगतान सेवा प्रदाता अपर्याप्त सब्सिडी पर अत्यधिक निर्भर हो जाएंगे। इससे साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और नेटवर्क अवसंरचना में महत्वपूर्ण निवेश खतरे में पड़ सकते हैं।
समिति ने यह भी सिफारिश की कि प्रस्तावित तीन वर्षीय बहुवर्षीय योजना और कैशबैक घटक, टियर 3-6 शहरों में डिजिटल भुगतान को लोकतांत्रिक बनाने के लिए आवश्यक हैं, लेकिन साथ-साथ वित्तीय सेवा विभाग को एक स्तरीय, आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल पर भी विचार करना चाहिए।
एनडीए की प्रतिक्रिया: राहुल के आरोपों को नकारा
बुधवार, 16 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने यूपीआई शुल्क को लेकर राहुल गांधी की आलोचना और उनके इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि यह निर्णय अमेरिकी दबाव में लिया गया है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि ₹2,000 तक के यूपीआई लेनदेन पर लगने वाले शुल्क से जुड़ा निर्णय न्यायसंगत है और इससे छोटे विक्रेताओं तथा व्यवसायियों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होगी।
अठावले ने अमेरिकी दबाव के आरोप को 'पूरी तरह निराधार' बताया और कहा कि इस निर्णय का अमेरिका से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आगे कहा, 'राहुल गांधी का यह दावा भ्रामक है और इससे जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।'
राजनीतिक अंतर्विरोध का असर
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस यूपीआई शुल्क के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। पार्टी के भीतर यह विभाजन — एक ओर राहुल गांधी का सार्वजनिक विरोध और दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं का संसदीय समिति में मौन समर्थन — विपक्षी खेमे के लिए असहज सवाल खड़े करता है। आलोचकों का कहना है कि इस अंतर्विरोध से कांग्रेस की नीतिगत स्थिति पर सवालिया निशान लगता है।
आगे की राजनीतिक बहस इस बात पर केंद्रित होगी कि क्या एमडीआर ढांचे को वास्तव में अधिसूचित किया जाएगा और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा क्या होगी।