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UPI शुल्क विवाद: सीतारमण ने जयराम रमेश के आरोपों को नकारा, MDR केवल व्यापारियों पर लागू

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UPI शुल्क विवाद: सीतारमण ने जयराम रमेश के आरोपों को नकारा, MDR केवल व्यापारियों पर लागू

सारांश

यूपीआई शुल्क पर छिड़ी राजनीतिक जंग में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जयराम रमेश को 'अफवाह' फैलाने का आरोप लगाते हुए साफ किया कि MDR केवल व्यापारियों पर लागू होगा, आम उपभोक्ता पर नहीं। कांग्रेस ने ₹2.86 लाख करोड़ के RBI अधिशेष का हवाला देकर MDR की ज़रूरत को ही नकारा।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त 2026 को जयराम रमेश के यूपीआई शुल्क संबंधी दावों को 'अफवाह' करार दिया।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल व्यापारियों पर लागू होगा, आम उपभोक्ताओं या अंतिम उपयोगकर्ताओं पर नहीं — सरकार का स्पष्टीकरण।
कांग्रेस ने ₹2.86 लाख करोड़ के RBI अधिशेष ( 2025-26 ) का हवाला देते हुए MDR लागू करने की ज़रूरत को नकारा।
सीतारमण ने कांग्रेस की संसद के बाहर बहस करने की रणनीति की आलोचना की; कहा — सदन में रचनात्मक भागीदारी होती तो चर्चा वहाँ होती।
कराधान एवं अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, 2026 अभी संसद में विचाराधीन है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त 2026 को वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि कराधान एवं अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, 2026 के ज़रिए यूपीआई लेनदेन को शुल्क के दायरे में लाया जा रहा है। सीतारमण ने स्पष्ट किया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल व्यापारियों पर लागू होता है, न कि आम उपभोक्ताओं या अंतिम उपयोगकर्ताओं पर।

मुख्य घटनाक्रम

वित्त मंत्री सीतारमण ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि रमेश को 'अफवाह फैलाने से पहले' तथ्यों की जाँच करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'MDR केवल व्यापारियों पर लागू होता है, न कि अंतिम उपयोगकर्ताओं या ग्राहकों पर। इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढाँचे, नवाचार और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी। यूपीआई के सभी उपयोगकर्ता इस निवेश का लाभ उठाएंगे।'

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष सरकार की डिजिटल भुगतान नीतियों पर लगातार दबाव बना रहा है।

कांग्रेस की आपत्ति और रमेश के तर्क

इससे पहले, जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि प्रस्तावित संशोधन उस वैधानिक गारंटी को समाप्त कर देता है जिसके तहत यूपीआई लेनदेन अब तक शुल्क-मुक्त रहे हैं। उनका कहना था कि इससे भविष्य में डिजिटल भुगतानों पर MDR लगाने का रास्ता खुल जाएगा। रमेश ने सरकार के 'आर्थिक टिकाऊपन' वाले तर्क को भी अस्वीकार किया।

कांग्रेस नेता ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 2025-26 में केंद्र सरकार को हस्तांतरित ₹2.86 लाख करोड़ के अधिशेष का हवाला देते हुए तर्क दिया कि व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले बिना डिजिटल भुगतान बुनियादी ढाँचे को समर्थन देने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

वित्त मंत्री सीतारमण ने कांग्रेस की संसद के बाहर इस मुद्दे को उठाने की रणनीति पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'यदि आपकी पार्टी विधेयक पेश होने के समय लोकसभा और राज्यसभा में रचनात्मक रूप से भाग लेती, तो इन सभी मुद्दों पर सदन में चर्चा हो सकती थी।' गौरतलब है कि यह टिप्पणी विपक्ष की संसदीय भागीदारी पर एक सीधा प्रहार है।

आम जनता पर असर

यदि MDR केवल व्यापारियों पर ही लागू रहता है, जैसा कि सरकार का दावा है, तो करोड़ों आम यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए लेनदेन पहले की तरह निःशुल्क बने रहेंगे। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि व्यापारियों पर MDR का बोझ अंततः उत्पादों और सेवाओं की कीमतों के ज़रिए उपभोक्ताओं तक पहुँच सकता है।

क्या होगा आगे

कराधान एवं अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, 2026 अभी संसद में विचाराधीन है। इस विधेयक पर राजनीतिक बहस के तेज़ होने की संभावना है, विशेष रूप से यह देखते हुए कि भारत में यूपीआई लेनदेन की संख्या हर महीने अरबों में है और डिजिटल भुगतान करोड़ों नागरिकों की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस असली चिंता को नज़रअंदाज़ करता है कि व्यापारियों पर पड़ने वाला बोझ अंततः उपभोक्ता कीमतों में प्रतिबिंबित होता है। RBI के ₹2.86 लाख करोड़ के अधिशेष का हवाला देकर कांग्रेस ने एक ठोस वैकल्पिक वित्तपोषण तर्क रखा है, जिसका सरकार ने अभी तक सीधा जवाब नहीं दिया। मुख्यधारा की कवरेज इस बहस को महज़ राजनीतिक झड़प की तरह पेश कर रही है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या यूपीआई की 'मुफ़्त' छवि टिकाऊ है और इसकी कीमत कौन चुकाएगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) क्या होता है?
MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी को बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देना होता है। सरकार के अनुसार, यह शुल्क केवल व्यापारियों पर लागू होता है, न कि आम उपभोक्ताओं या अंतिम उपयोगकर्ताओं पर।
जयराम रमेश ने यूपीआई शुल्क को लेकर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि कराधान एवं अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, 2026 उस वैधानिक गारंटी को हटा देता है जिसके तहत यूपीआई लेनदेन शुल्क-मुक्त रहे हैं। उनका कहना था कि इससे भविष्य में डिजिटल भुगतानों पर MDR लगाने का रास्ता खुल जाएगा।
निर्मला सीतारमण ने इन आरोपों का क्या जवाब दिया?
वित्त मंत्री सीतारमण ने रमेश के दावों को 'अफवाह' करार दिया और स्पष्ट किया कि MDR केवल व्यापारियों पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढाँचे, नवाचार और सुरक्षा में निवेश करने में मदद मिलेगी, जिसका लाभ सभी यूपीआई उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।
कांग्रेस ने RBI अधिशेष का हवाला क्यों दिया?
जयराम रमेश ने तर्क दिया कि 2025-26 में RBI ने केंद्र सरकार को ₹2.86 लाख करोड़ का अधिशेष हस्तांतरित किया है, जो व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले बिना डिजिटल भुगतान बुनियादी ढाँचे को वित्तपोषित करने के लिए पर्याप्त है।
कराधान एवं अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, 2026 अभी किस स्थिति में है?
यह विधेयक अभी संसद में विचाराधीन है। वित्त मंत्री सीतारमण ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि यदि पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा में विधेयक पेश होने के समय रचनात्मक रूप से भाग लिया होता, तो इन मुद्दों पर सदन में चर्चा हो सकती थी।
राष्ट्र प्रेस
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