10 अगस्त 2026
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राज्यसभा में कराधान संशोधन विधेयक 2026 पारित; निर्मला सीतारमण बोलीं — यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई शुल्क नहीं

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राज्यसभा में कराधान संशोधन विधेयक 2026 पारित; निर्मला सीतारमण बोलीं — यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई शुल्क नहीं

सारांश

राज्यसभा ने कराधान संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया, लेकिन असली सुर्खी यह रही कि वित्त मंत्री सीतारमण को सदन में खड़े होकर यह सफाई देनी पड़ी कि यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं लगेगा — यह अटकलें इतनी तेज़ थीं कि सरकार को दो बार सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना पड़ा।

मुख्य बातें

राज्यसभा ने 10 अगस्त 2026 को कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित किया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10ए में संशोधन केवल 'सक्षम प्रावधान' है; MDR की रूपरेखा अभी तय नहीं।
90 प्रतिशत से अधिक यूपीआई लेनदेन — दैनिक खरीदारी सहित — MDR से मुक्त रहेंगे।
यदि MDR लागू हुआ, तो दर डेबिट/क्रेडिट कार्ड के MDR से 'काफी कम' होगी; NPCI समिति इस पर निर्णय लेगी।

राज्यसभा ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उच्च सदन में स्पष्ट किया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से भुगतान करने वाले आम उपयोगकर्ताओं पर इस कानून के तहत किसी प्रकार का कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यह विधेयक पिछले सप्ताह लोकसभा से पारित होने के बाद संक्षिप्त चर्चा के बाद राज्यसभा में भी स्वीकृत हो गया।

विधेयक में क्या है

भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10ए में प्रस्तावित संशोधन को वित्त मंत्री ने 'केवल एक सक्षम प्रावधान' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें उपभोक्ताओं पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का शुल्क लागू नहीं होता। सीतारमण ने कहा, 'हम जो प्रावधान ला रहे हैं, वह यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाता।'

एमडीआर पर अंतिम फैसला अभी बाकी

वित्त मंत्री ने बताया कि संसद की मंजूरी के बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की यूपीआई और सेवा संचालन समिति यह तय करेगी कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क लागू किया जाए या नहीं। उन्होंने जोड़ा, 'अभी तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट की कोई रूपरेखा अंतिम रूप से तय नहीं की गई है।' गौरतलब है कि यह स्पष्टीकरण उन बढ़ती अटकलों के बीच आया है जिनमें यह आशंका जताई जा रही थी कि संशोधन के बाद यूपीआई भुगतान पर शुल्क लागू हो जाएगा।

आम जनता पर असर

वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में स्पष्ट किया था कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई लेनदेन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दूध, सब्जियों और किराने के सामान जैसी दैनिक खरीदारी सहित 90 प्रतिशत से अधिक लेनदेन पर MDR शुल्क नहीं लगेगा। यदि MDR लागू किया जाता है, तो यह केवल एक निश्चित सीमा से अधिक के सीमित व्यापारी लेनदेन पर ही लागू होगा।

व्यापारी लेनदेन पर सीमित और मामूली दर

सरकार ने कहा कि अगर MDR लागू होता है, तो उसकी दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर लागू मर्चेंट डिस्काउंट रेट की तुलना में 'काफी कम' होगी। मंत्रालय ने यह भी कहा, 'यूपीआई पर व्यापारियों के लिए अधिकांश लेनदेन शुल्क-मुक्त रहेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूपीआई लेनदेन की संख्या और मूल्य दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं और डिजिटल भुगतान को लेकर नीतिगत दिशा पर व्यापक बहस जारी है।

आगे क्या होगा

विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद NPCI की समिति MDR की रूपरेखा पर विचार-विमर्श शुरू करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयसीमा पर सभी की नज़र रहेगी, क्योंकि यूपीआई अब करोड़ों भारतीयों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकार को संसद और शनिवार — दोनों जगह सफाई देनी पड़ी, यह खुद बताता है कि नीतिगत संवाद में कहीं चूक हुई। जब 90% लेनदेन शुल्क-मुक्त रहने की बात कही जा रही है, तो शेष 10% की परिभाषा और MDR की दर तय करने का अधिकार NPCI की एक समिति को सौंपना — बिना संसदीय निगरानी के — एक महत्वपूर्ण नीतिगत सवाल खड़ा करता है। यूपीआई की सफलता काफी हद तक उसकी शून्य-शुल्क संरचना पर टिकी है; किसी भी MDR ढाँचे का, चाहे वह कितना भी 'मामूली' हो, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण उपयोगकर्ताओं पर असमान प्रभाव पड़ सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा लाया गया एक विधेयक है जो भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10ए सहित कई कर कानूनों में संशोधन करता है। लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी इसे 10 अगस्त 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
क्या यूपीआई से भुगतान पर अब शुल्क लगेगा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाया जाएगा। व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या होता है और इसका यूपीआई से क्या संबंध है?
MDR वह शुल्क है जो व्यापारियों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर लिया जाता है। सरकार ने कहा है कि यूपीआई पर MDR की रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है और इस पर NPCI की समिति विचार करेगी। यदि लागू हुआ, तो यह केवल सीमित बड़े व्यापारी लेनदेन पर और डेबिट/क्रेडिट कार्ड की तुलना में काफी कम दर पर होगा।
क्या दैनिक खरीदारी जैसे दूध, सब्जी पर यूपीआई शुल्क लगेगा?
नहीं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार दूध, सब्जियों और किराने के सामान सहित 90 प्रतिशत से अधिक यूपीआई लेनदेन पर MDR शुल्क नहीं लगेगा। अधिकांश व्यापारी लेनदेन भी शुल्क-मुक्त रहेंगे।
इस विधेयक पर अगला कदम क्या होगा?
दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद NPCI की यूपीआई और सेवा संचालन समिति MDR की रूपरेखा पर विचार करेगी और अंतिम निर्णय लेगी।
राष्ट्र प्रेस
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