राज्यसभा में कराधान संशोधन विधेयक 2026 पारित; निर्मला सीतारमण बोलीं — यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई शुल्क नहीं
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उच्च सदन में स्पष्ट किया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से भुगतान करने वाले आम उपयोगकर्ताओं पर इस कानून के तहत किसी प्रकार का कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यह विधेयक पिछले सप्ताह लोकसभा से पारित होने के बाद संक्षिप्त चर्चा के बाद राज्यसभा में भी स्वीकृत हो गया।
विधेयक में क्या है
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10ए में प्रस्तावित संशोधन को वित्त मंत्री ने 'केवल एक सक्षम प्रावधान' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें उपभोक्ताओं पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का शुल्क लागू नहीं होता। सीतारमण ने कहा, 'हम जो प्रावधान ला रहे हैं, वह यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाता।'
एमडीआर पर अंतिम फैसला अभी बाकी
वित्त मंत्री ने बताया कि संसद की मंजूरी के बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की यूपीआई और सेवा संचालन समिति यह तय करेगी कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क लागू किया जाए या नहीं। उन्होंने जोड़ा, 'अभी तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट की कोई रूपरेखा अंतिम रूप से तय नहीं की गई है।' गौरतलब है कि यह स्पष्टीकरण उन बढ़ती अटकलों के बीच आया है जिनमें यह आशंका जताई जा रही थी कि संशोधन के बाद यूपीआई भुगतान पर शुल्क लागू हो जाएगा।
आम जनता पर असर
वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में स्पष्ट किया था कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई लेनदेन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दूध, सब्जियों और किराने के सामान जैसी दैनिक खरीदारी सहित 90 प्रतिशत से अधिक लेनदेन पर MDR शुल्क नहीं लगेगा। यदि MDR लागू किया जाता है, तो यह केवल एक निश्चित सीमा से अधिक के सीमित व्यापारी लेनदेन पर ही लागू होगा।
व्यापारी लेनदेन पर सीमित और मामूली दर
सरकार ने कहा कि अगर MDR लागू होता है, तो उसकी दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर लागू मर्चेंट डिस्काउंट रेट की तुलना में 'काफी कम' होगी। मंत्रालय ने यह भी कहा, 'यूपीआई पर व्यापारियों के लिए अधिकांश लेनदेन शुल्क-मुक्त रहेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूपीआई लेनदेन की संख्या और मूल्य दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं और डिजिटल भुगतान को लेकर नीतिगत दिशा पर व्यापक बहस जारी है।
आगे क्या होगा
विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद NPCI की समिति MDR की रूपरेखा पर विचार-विमर्श शुरू करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयसीमा पर सभी की नज़र रहेगी, क्योंकि यूपीआई अब करोड़ों भारतीयों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।